Discover the Habits of Exceedingly Healthy People – स्वास्थ्य को संजोनेवाले उपाय

food prayer by cornelia kopp

आपको आश्चर्य होता होगा कि आपके परिजनों या मित्रों में कुछ लोग ऐसे भी हैं जो कभी बीमार नहीं पड़ते. जब दूसरे लोग बदलते मौसम की गड़बड़ियों जैसे जुकाम, वायरल, पेट की गड़बड़ या आंखों की बीमारी से परेशान दिखते हैं तब भी ये लोग भले-चंगे बने रहते हैं. क्या कारण है कि कुछ लोग बहुत कम बीमार पड़ते हैं जबकि कुछ लोग हमेशा किसी-न-किसी स्वास्थ्य समस्या से ग्रस्त दिखते हैं?

मैं इस पोस्ट में आपको ऐसे उपायों के बारे में बताऊंगी जो अच्छे स्वास्थ्य का आधार हैं तथा इनका पालन करने से शरीर रोगों का मुकाबला करने में सक्षम बना रहता है और व्याधियां आसानी से अपनी गिरफ्त में नहीं लेतीं. इनमें से कुछ तो बहुत सरल-सहज हैं जबकि कुछ को विस्तृत रिसर्च में पाया गया है-

अच्छा आराम –

स्वस्थ रहने के लिए यह ज़रूरी है कि शरीर को पर्याप्त आराम दिया जाए. यदि आप रात-रात भर काम-काज या मनोरंजन के लिए खुद को जगाए रखते हैं तो आपका इम्यून सिस्टम प्रभावी तरीके से काम नहीं करता. रात को दस बजे तक सोने की आदत डालने तथा कम्प्यूटर स्क्रीन आदि की रोशनी से दूर रहने से शरीर में मेलेटोनिन की वृद्धि होती है जो इम्यून सिस्टम को सुदृढ़ करता है.

आहार में पोषक तत्वों का समावेश –

आहार में उत्तम गुणवत्ता के भोज्य पदार्थ तथा विटामिन C और ज़िंक प्रदान करनेवाले सब्जियों-फलों के समावेश से स्वास्थ्य का संरक्षण होता है. इसी के साथ ही भोजन में चीनी तथा नमक को कम करना भी ज़रूरी है. रिफ़ाइंड चीनी के प्रयोग से इम्यून सिस्टम सुस्त पड़ जाता है. अच्छे स्वास्थ्य के धारक सामान्यतः चाय-कॉफी, कार्बोनेटेड ड्रिंक्स, कैंडी-चॉकलेट और आइसक्रीम से परहेज करते हैं जिससे उनका शरीर सशक्त बना रहता है.

मालिश, योग और एक्यूप्रेशर –

किसी भी तरह का तनाव शरीर को कमज़ोर करता है. रिसर्च से पता चला है कि सतत तनाव में रहनेवालों का स्वास्थ्य खराब होने की संभावना बहुत बढ़ जाती है. स्वास्थ्य के प्रति सजग रहनेवाले व्यक्ति अपने तनाव पर लगाम लगाने का प्रयास करते हैं. मालिश से शरीर को अनेक लाभ होते हैं. इससे ब्लड-प्रेशर और एंज़ाइटी कम होती है जिससे व्यक्ति को राहत का अनुभव होता है. योग तथा एक्यूप्रेशर से भी इम्यून सिस्टम सशक्त बनता है. एक्यूप्रेशर में शरीर के किसी खास बिंदु जैसे थायमस ग्रंथि पर संतुलित दबाव डालने से इम्यून तथा लिंफेटिक सिस्टम की कार्यप्रणाली में सुधार होता है.

शीतल स्नान –

बहुत से लोग ठंडे पाने से नहाने के विचार से ही भयभीत हो जाते हैं, लेकिन रिसर्च से यह पता चला है कि शीतकाल में भी ठंडे पानी से नहाने से श्वेत रक्त कणिकाओं की सक्रियता बढ़ जाती है जिससे शरीर हानिकारक जीवाणुओं तथा रोगाणुओं के विरुद्ध लड़ने में अतिरिक्त सक्षम हो जाता है. अनेक देशों में स्वास्थ्य के प्रति सजग लोग हर मौसम में ठंडे पानी से ही नहाते हैं.

सकारात्मकता –

सकारात्मक के उजले पक्ष को कम करके मत आंकिए. सकारात्मक रवैया रखनेवाले व्यक्तियों को आंतरिक प्रेरणा और ऊर्जा की कमी नहीं पड़ती. नकारात्मकता से घिरते ही शरीर और मन हर चीज से लड़ने की ताकत खो देता है. जीवन के उजले पक्षों को देखने और उनके प्रति कृतज्ञ रहनेवाले व्यक्ति तनावग्रस्त नहीं रहते और तनावजन्य व्याधियों से दूर रहते हैं. सकारात्मकता को बढ़ाने का सबसे सरल उपाय यह है कि आप किसी भी घटना या व्यक्ति के उजले पक्षों पर भी नज़र डालें और बुरी बातों से सीख लेते हुए आगे बढ़ें. किसी भी रूप में कटुता तथा वैरभाव से दूर रहें. जीवन के विविध पक्षों के लिए आभारी रहने के बारे में लिखी इस अंग्रेजी पोस्ट को भी देखिए.

आशा है कि आप ऊपर बताए गए उपायों को ध्यान में रखेंगे, उनका अनुसरण करेंगे और अपने स्वास्थ्य को परिपूर्ण बनाए रखने के लिए भरसक प्रयास करेंगे. याद रखें, तंदरुस्ती हज़ार नियामत है.


Source: “Discover the Seven Habits of Exceedingly Healthy People,”  from naturalnews.com, by Carolanne Wright. Carolanne believes if we want to see change in the world, we need to be the change. As a nutritionist, natural foods chef and wellness coach, she has encouraged others to embrace a healthy lifestyle of green living for over 13 years. Through her website http://www.Thrive-Living.net, she looks forward to connecting with other like-minded people who share a similar vision.

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Narcissus – नरगिस की कहानी

cornelia kopp

अल्केमिस्ट ने वह किताब पढ़ने के लिए उठाई जिसे कारवां में कोई अपने साथ लाया था. पन्ने पलटने पर उसे किताब में नारसिसस की कहानी दिखी.

अलकेमिस्ट को नारसिसस की कहानी के बारे में पता था. नारसिसस एक युवक था जिसने किसी झील के किनारे बैठकर पानी में अपना अक्स देखा. अपने अप्रतिम रूप को देखकर वह खुद पर इतना मोहित हो गया कि सुध-बुध खो बैठा और झील में गिरकर डूब गया (एक दूसरी कहानी यह कहती है कि वह खुद को देखकर सब कुछ भूल गया और वहीं बैठे-बैठे उसने भूख-प्यास से दम तोड़ दिया).

कहते हैं कि जिस जगह वो गिरा था वहां एक सुंदर फूल उगा, जिसे हम नरगिस के नाम से जानते हैं.

लेकिन उस किताब में नारसिसस की इस कहानी के अलावा और कुछ भी बयां किया गया था. उसमें लिखा था कि नारसिसस की मौत के बाद उस वन की देवियां उस झील तक आईं, और उन्होंने देखा कि झील का मीठा पानी खारा हो चुका था.

“तुम क्यों रो रही हो?”, वनदेवियों ने झील से पूछा.

“ये आंसू नारसिसस के लिए हैं”, झील ने कहा.

“हम जानते हैं कि नारसिसस के गुज़र जाने का तुम्हें सबसे ज्यादा दुख है” उन्होंने कहा, “क्योंकि हमने उसे हमेशा दूर से ही देखा जबकि तुमने उसकी सुंदरता को करीब से जी भर के निहारा”.

“लेकिन… क्या वो बहुत सुंदर था?”, झील ने पूछा.

“तुमसे बेहतर इस बात को कौन जान सकता है?”, वनदेवियों ने अचरज से कहा, “तुम्हारे किनारे पर बैठकर ही तो वह पानी में अपनी छवि को निहारता रहता था!”

यह सुनकर झील कुछ पल को चुप रही, फिर वह बोली:

“मैं नारसिसस के लिए रोती रही लेकिन मुझे यह पता न था कि वह सुंदर था. मेरे रोने की वज़ह कुछ और थी. जब वह मेरे किनारों पर बैठकर मुझे देखता था तो मुझे उसकी आंखों में अपनी खूबसूरती नज़र आती थी.”

“कितनी सुंदर है यह कहानी”, अल्केमिस्ट ने खुद से कहा.


The Alchemist picked up a book that someone in the caravan had brought. Leafing through the pages, he found a story about Narcissus.
The Alchemist knew the legend of Narcissus, a youth who daily knelt beside a lake to contemplate his own beauty. He was so fascinated by himself that, one morning, he fell into the lake and drowned.
At the spot where he fell, a flower was born, which was called the narcissus.
But this was not how the author of the book ended the story. He said that when Narcissus died, the Goddesses of the Forest appeared and found the lake, which had been fresh water, transformed into a lake of salty tears.
“Why do you weep?” the Goddesses asked.
“I weep for Narcissus,” the lake replied.
“Ah, it is no surprise that you weep for Narcissus,” they said, “for though we always pursued him in the forest, you alone could contemplate his beauty close at hand.”
“But….. was Narcissus beautiful?” the lake asked.
“Who better than you to know that?” the Goddesses said in wonder, “After all, it was by your banks that he knelt each day to contemplate himself!”
The lake was silent for some time. Finally it said:
“I weep for Narcissus, but I never noticed that Narcissus was beautiful. I weep because, each time he knelt beside my banks, I could see, in the depths of his eyes, my own beauty reflected.”
“What a lovely story,” the Alchemist thought.
(From the blog of Paulo Coelho)

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खुशियों के लकी नंबर

time alice popkorn

एक अकेले दिन में ही आपको अपने फिटनेस गोल्स को पूरा करना है, घर और ऑफिस के ज़रूरी काम निपटाने हैं, और खुद को तरोताजा रखने के लिए थोड़ा मनबहलाव भी करना है. लेकिन आज के माहौल में एक दिन पूरा नहीं पड़ता. ऐसा लगता है कि थोड़ा सा वक्त और मिलता तो बहुत कुछ किया जा सकता था. ऐसे में थोड़े से सुकून के लिए मैं आपको कुछ ऐसे लकी नंबर देती हूं जिनसे आपको बहुत मदद मिलेगी. मैं इन्हें लकी नंबर इसलिए कहती हूं क्योंकि ये आपको कोई ज़रूरी काम कर डालने के लिए बहुत प्रोत्साहित करते हैं. कई विशेषज्ञों ने लंबी-चौड़ी रिसर्च और खोजबीन के बाद इन्हें आजमाया है और ये अपना काम बखूबी करते हैं. ये हैं वे लकी नंबरः

लकी नंबर 2 -

प्रसिद्ध पुस्तक “गेटिंग थिंग्स डन” (Getting Things Done) के लेखक डेविड एलन कहते हैं कि यदि आपको लगता है कि आप किसी काम को 2 मिनट में पूरा कर सकते हैं तो उसे तुरंत कर डालिए! ये “Two-Minute Rule” आपको बहुत से छोटे लेकिन ज़रूरी कामों को झटपट पहली फुर्सत में पूरा कर देने में मदद करेगा और आपके कामों की फेहरिस्त कुछ छोटी तो हो ही जाएगी.

लकी नंबर 5 -

यदि आप घर या दफ्तर में किसी कठिन चीज से जूझ रहे हैं तो “Five-Minute Rule” का प्रयोग करें. काम को ऊबकर या खीझकर टालें नहीं बल्कि खुद से कहें, “मैं इस काम को करने के लिए अच्छे से पूरे 5 मिनट दूंगा और उसके बाद यदि मेरा मन रुकने को कहेगा तो ही रुकूंगा.” अपने मन में लगन विकसित करने के लिए इस नियम का अभ्यास करें और खुद से कहें, “मैं इस प्रोजेक्ट पर कम-से-कम 5 मिनट काम करने के बाद ही उठूंगा.” आप 5 मिनट के बाद भी आप काम करते रहना चाहें तो अच्छी बात है. यदि आप रुक भी जाएं तो भी आपने काम को 5 मिनट तो दे ही दिए… अब आपको काम को 5 मिनट कम देने हैं. लेखक एम जे रायन ने अपनी किताब “This Year I Will” में इसपर बहुत विस्तार से लिखा है.

लकी नंबर 11 -

आप स्वस्थ रहना और लंबी आयु पाना चाहते हैं लेकिन इसके लिए हल्की-फुल्की एक्सरसाइज़ या वॉक करने के लिए एक घंटा भी समय नहीं निकाल पा रहे तो यह टिप आपके काम की है. हार्वर्ड मेडिकल स्कूल के रोगविज्ञानी आई-मिन ली ने लंबी रिसर्च के बाद यह निष्कर्ष निकाला है कि स्वस्थ रहने और लंबी आयु के लिए रोज़ाना कम-से-कम 11 मिनट की एक्सरसाइज़ करनेवाले लोग एक्सरसाइज़ नहीं करनेवालों से औसतन 1.8 वर्ष अधिक जीते हैं. रोज़ाना थोड़ी सी शारीरिक कसरत करने से ही स्वास्थ्य पर इतना प्रभाव पड़ता है. इससे भी अधिक व्यापक प्रभाव डालनेवाली बात के बारे में अंत में लिखा गया है.

लकी नंबर 15 -

आप अच्छे स्वास्थ्य के लिए या किसी बीमारी या परहेज के कारण बहुत सी चीजों के खाने या पीने पर नियंत्रण रखना चाहते हैं लेकिन कभी-कभी आपका मन ललचा जाता है. आपका मन भी थोड़ी सी और चटपटी चाट या आइसक्रीम खाने को करता है न? या शायद आपको सिगरेट की तलब से निजात नहीं मिल पा रही हो. ऐसी छटपटाहट होने पर लकी नंबर 15 को याद रखें. इस विषय पर की गई रिसर्च से पता चला है कि हमारी अधिकांश उत्कट इच्छाएं लगभग 15 मिनट तक प्रबल बनी रहती हैं. वैज्ञानिक एलन मार्लेट बताते हैं कि ऐसी इच्छाएं लहरों के समान होती है- ये अपनी उठान तक पहुंचती हैं और फिर गिरने लगती हैं. ऐसे में आपके लिए ज़रूरी होगा कि आप इस लहर का शिकार बनने की बजाए उनकी सवारी करें. इस बात को ध्यान में रखें कि आपकी लालसा को कमज़ोर होने में लगभग 15 मिनट का वक्त लगेगा और अपने किसी संकल्प को बनाए रखने के लिए हम 15 मिनटों तक तो कष्ट झेल ही सकते हैं.

लकी नंबर 20 -

आप किसी समस्या के समाधान में जी-जान से जुटे हैं लेकिन कोई हल नहीं निकल रहा. आप ठहरिए, थोड़ा सुस्ताइए. एक ब्रेक ले लीजिए और लगभग 20 मिनटों के लिए कोई बिल्कुल अलहदा चीज करिए. कहीं टहल आइए, दो-तीन गाने सुन लीजिए, आंखें बंद करके लेट जाइए या अपने किसी दोस्त से बातें कर लीजिए. फिर आप अपने काम की ओर लौटिए. बहुत संभव है कि आपको समस्या का हल एक झटके में कौंध जाए. हो सकता है कि हल आपके सामने ही मौजूद रहा हो और आप काम के दबाव में उसे देख नहीं पाए हों. कई बार क्रासवर्ड या सुडोकू करते वक्त आपके सामने ऐसे “अहा” मौके आए होंगे. काम के बीच में छो़टे-छोटे ब्रेक्स लेने का यही फायदा है. असल में जब कभी आप अपने काम के तयशुदा पैटर्न को बदलते हैं तो आपका दिमाग तनाव से मुकाबला करनेवाले रसायनों को सक्रिय कर देता है. दिमाग में आनेवाला यह रासायनिक परिवर्तन आपको राहत देता है और आपकी रचनाशीलता में वृद्धि करता है, जिसके कारण आपको उपाय रहस्यमयी रूप से सूझने लगते हैं. अनुसंधानकर्ता द्वय हर्बर्ट बैंसन और विलियम प्रोक्टर ने इसे “the breakout principle” का नाम दिया.

लकी नंबर 43 -

यदि रोज़ाना 11 मिनट का एक्सरसाइज़ प्रोग्राम आपको बहुत कम लगता है और आपके पास थोड़ा अतिरिक्त समय है तो एक्सरसाइज़ का अधिकतम लाभ उठाने के लिए आपको रोज़ाना औसतन 43 मिनट अपने स्वास्थ्य के लिए समर्पित करने होंगे. ऐसा पाया गया है कि रोज़ाना इतने मिनटों तक एक्सरसाइज़ करनेवालों की औसत आयु दूसरों की तुलना में 4.2 साल अधिक होती है. यदि 43 मिनट कुछ ज्यादा लग रहे हों तो आपके पास 22 मिनटों का विकल्प है जो आपकी जिंदगी में 3.4 साल जोड़ सकता है. इसके बारे में विस्तार से यहां पढ़ें.


meg-seligThis post is © Meg Selig. Meg is the author of Changepower! 37 Secrets to Habit Change Success (Routledge, 2009), on sale here and here. She earned her M.A. Ed. in counseling at Washington University in St. Louis. In addition to her consulting work, she is also an adjunct professor of counseling at St. Louis Community College at Florissant Valley where she teaches a short class on “Habit Change.” Meg lives in St. Louis, Missouri. Her blogs can be found at www.psychologytoday.com/blog/changepower. Follow her on Twitter and Facebook

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पत्नी का प्रेत – Wife’s Ghost

यह कहानी एक ऐसे आदमी के बारे में है जो अपनी पत्नी से बहुत प्रेम करता था. उसकी पत्नी भी उससे बहुत प्रेम करती थी. फिर कुछ ऐसा हुआ कि पत्नी बहुत बीमार पड़ गयी और चल बसी. आदमी ने अपनी मरती हुई पत्नी को वचन दिया कि वह उसके मरने के बाद दूसरा विवाह नहीं करेगा.

कुछ समय तक तो आदमी अपनी पत्नी को दिए वचन पर अटल रहा पर किस्मत ने तो उसके भाग में कुछ और ही लिखा था. उसे किसी औरत से प्रेम हो गया.

उस औरत के प्यार में वह इतना डूबा कि अपनी पत्नी से किया वादा भूल गया. आदमियों के लिए कसमें-वादे, सालगिरह आदि भूल जाना तो आम बात है पर औरतें इनकी बहुत परवाह करतीं हैं.

अपने विवाह की रात्रि को उसने अपनी मृत पत्नी का प्रेत देखा जो उससे पुराने वादे को तोड़ने की शिकायत करने के लिए आया था. उसे अपने सामने पाकर वह बहुत डर गया. प्रेत ने उसे अपना वादा भूल जाने के लिए बहुत लताड़ा पर वह अब क्या कर सकता था? वह चुप ही रहा. लेकिन मृत पत्नी उसकी बेवफाई को स्वीकार नहीं कर सकी और उसका प्रेत बार-बार आकर उसकी ज़िंदगी को बर्बाद कर देने की धमकी देता रहा.

इस सबसे तंग आकर आदमी एक दिन किसी महात्मा से मिलने गया और उन्हें सारी बात बताई. महात्मा ने कहा – “यह प्रेत बहुत बुद्धिमान है. अगली बार जब वह आये तो तुम अनाज की बोरी में से एक मुठ्ठी अन्न निकालकर उससे पूछना कि तुम्हारे हाथ में कितने दाने हैं.”

जब मृत पत्नी का प्रेत वापस आया तो आदमी ने वैसा ही किया. उसने बोरी में हाथ डालकर अपनी मुठ्ठी में दाने भर लिए और प्रेत से पूछा – “बताओ, मेरे हाथ में कितने दाने हैं?” यह सुनते ही प्रेत विलुप्त हो गया और फिर कभी नहीं आया.

इस कहानी की सत्यता यह है कि असल में कोई प्रेत नहीं था. पत्नी से किये वादे को तोड़ देने का अपराधबोध उस व्यक्ति को भीतर ही भीतर सालता रहा और उसके मन की भावनाएं और भय बाहरी विश्व में प्रक्षेपित होने लगे. यह बहुत कुछ वैसा ही है जैसे स्वप्न में होता है. जैसे कटे हुए हाथ की मौजूदगी का अहसास करानेवाला ‘फैंटम लिम्ब’ आदमी को दुःख दर्द देता है उसी तरह मनुष्य का मन उसके कर्मों और कमजोरियों को विविध रूपों में ढालने में सक्षम हैं जिनमें से कई अबूझ होते हैं.


The wife of a man became very sick. On her deathbed, she said to him, “I love you so much! I don’t want to leave you, and I don’t want you to betray me. Promise that you will not see any other women once I die, or I will come back to haunt you.”

For several months after her death, the husband did avoid other women, but then he met someone and fell in love. On the night that they were engaged to be married, the ghost of his former wife appeared to him. She blamed him for not keeping the promise, and every night thereafter she returned to taunt him. The ghost would remind him of everything that transpired between him and his fiancee that day, even to the point of repeating, word for word, their conversations.

It upset him so badly that he couldn’t sleep at all. Desperate, he sought the advice of a Zen master who lived near the village.

“This is a very clever ghost,” the master said upon hearing the man’s story.

“It is!” replied the man. “She remembers every detail of what I say and do. It knows everything!”

The master smiled, “You should admire such a ghost, but I will tell you what to do the next time you see it.”

That night the ghost returned. The man responded just as the master had advised.

“You are such a wise ghost,” the man said, “You know that I can hide nothing from you. If you can answer me one question, I will break off the engagement and remain single for the rest of my life.”

“Ask your question,” the ghost replied.

The man scooped up a handful of beans from a large bag on the floor, “Tell me exactly how many beans there are in my hand.”

At that moment the ghost disappeared and never returned.

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बचपन – Childhood

कन्फ्यूशियस अपने शिष्यों के साथ लंबी यात्रा पर था. मार्ग में उसने किसी गाँव में रहनेवाले एक बुद्धिमान बालक के बारे में सुना. कन्फ्यूशियस उस बालक से मिला और उससे पूछा:

“विश्व में मनुष्यों के बीच बहुत असमानताएं और भेदभाव हैं. इन्हें हम किस प्रकार दूर कर सकते हैं?”

“लेकिन ऐसा करने की आवश्यकता ही क्या है?”, बालक ने कहा, “यदि हम पर्वतों को तोड़कर समतल कर दें तो पक्षी कहाँ रहेंगे? यदि हम नदियों और सागर को पाट दें तो मछलियाँ कैसे जीवित रहेंगीं? विश्व इतना विशाल और विस्तृत है कि इन असमानताओं और विसंगतियों का उसपर कोई प्रभाव नहीं पड़ता.”

कन्फ्यूशियस के शिष्य बालक की बात सुनकर बहुत प्रभावित हुए और उन्होंने बालक की भूरि-भूरि प्रशंसा की. लेकिन कन्फ्यूशियस ने कहा:

“मैंने ऐसे बहुत से बच्चे देखे हैं जो अपनी अवस्था के अनुसार खेलकूद करने और बालसुलभ गतिविधियों में मन लगाने की बजाय दुनिया को समझने की कोशिश में लगे रहते हैं. और मैंने यह पाया कि उनमें से एक भी प्रतिभावान बच्चे ने आगे जाकर अपने जीवन में कुछ भी महत्वपूर्ण नहीं किया क्योंकि उन्होंने अपने बचपन की सरलता और सहज अनुत्तरदायित्व का कोई अनुभव नहीं किया.


 

Confucius was travelling with his disciples when he learned that a very intelligent boy lived in a certain village. Confucius went there to talk to him and asked:

“What if you helped me put an end to inequality?

“Why put an end to inequality?” asked the boy. “If we flatten the mountains, the birds will no longer have shelter. If we put an end on the depth of the rivers and oceans, all fish will die. If the chief of the village has the same authority as the fool, no one will understand one another right. The world is very vast, let us keep its differences.”

The disciples left very impressed with the boy’s wisdom. As they were already on their way to another city, one of them said all children should be like that.

“I have met many children who instead of playing and doing things of their age, sought to understand the world,” said Confucius. “And none of these precocious children was able to something important later, because they never experienced innocence and the healthy irresponsibility of childhood.”

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