वैज्ञानिक और ईश्वर

एक वैज्ञानिक ने ईश्वर को खोज लिया और उससे कहा, “ईश्वर, हमें अब तुम्हारी कोई ज़रूरत नहीं है. विज्ञान ने इतनी उन्नति कर ली है कि अब हम जीवन के किसी भी रूप की रचना कर सकते हैं. आदिकाल में तुमने जो किया वह हम अब करके दिखा सकते हैं.”

“अच्छा! बताओ तुम क्या कर सकते हो?”, ईश्वर ने पूछा.

वैज्ञानिक ने कहा, “हम मिट्टी से जीवन के विविध रूपों की रचना कर सकते हैं. हम इसे तुम्हारी आकृति में ढालकर इसमें प्राण फूंक सकते हैं. हम पुरुष, स्त्री और जीवन के हर उस रूप की रचना कर सकते हैं जो कभी अस्तित्व में रहा हो.”

“वाह! यह तो बहुत अच्छी बात है”, ईश्वर ने कहा, “मुझे दिखाओ तुम ऐसा कैसे करते हो”.

वैज्ञानिक नीचे झुकता है और अपनी परखनली में थोड़ी सी मिट्टी भरता है…

“रूको! ज़रा ठहरो!”, ईश्वर ने उसे टोकते हुए कहा, “वह तो मेरी मिट्टी है! तुम अपनी मिट्टी से यह काम करो!”

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