काली नाक वाले बुद्ध

एक बौद्ध भिक्षुणी निर्वाण प्राप्ति के लिए साधनारत थी। उसने भगवान् बुद्ध की एक मूर्ति बनवाई और उसपर सोने का पत्तर लगवाया। उस मूर्ति को वह जहाँ भी जाती अपने साथ ले जाती थी।

साल-दर-साल गुजरते गए। वह भिक्षुणी अपने भगवान् की मूर्ति लेकर एक ऐसे मठ में रहने आ गई जहाँ बुद्ध की अनेकों मूर्तियाँ थीं।

भिक्षुणी अपने बुद्ध के सामने रोज़ धूपबत्ती जलाया करती थी। लेकिन वह चाहती थी कि उसकी धूपबत्ती की सुगंध केवल उसके बुद्ध तक ही पहुंचे। इसके लिए उसने बांस की एक पोंगरी बनाई जिससे होकर धूपबत्ती का धुआं केवल उसके बुद्ध तक ही पहुँचने लगा।

धुएँ के कारण उसके बुद्ध की नाक काली हो गई।

Photo by Ciprian Boiciuc on Unsplash

There are 5 comments

  1. आशुतोष आंगिरस

    सुन्दर सरल एवम् सहज सटीक कथा है। कथा के साथ मनोवैज्ञानिक संकेत करेंगे तो कथा अधिक मूल्यवान सिद्धहोगी
    सुभकामनाओं सहित।

    1. Nishant

      यह कहानी ओशो की किसी पुस्तक में हो सकती है लेकिन वहां से नहीं ली गई है. यह एक बहुत प्रसिद्द ज़ेन कथा है जिसके कई वर्ज़न इन्टरनेट पर उपलब्ध हैं, किसी पर भी कोई कॉपीराइट नहीं है.

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