गुम हुई कुल्हाड़ी

लाओ-त्ज़ु ने अपने शिष्यों से एकदिन कहा – “एक आदमी की कुल्हाड़ी कहीं खो गयी। उसे घर के पास रहनेवाले एक लड़के पर शक था कि कुल्हाड़ी उसने ही चुराई है। जब भी आदमी उस लड़के को देखता, उसे लगता कि लड़के की आंखों में अपराधबोध है। लड़के के हाव-भाव, बोलचाल, और आचरण से आदमी का शक यकीन में बदल गया कि वह लड़का ही चोर है।

एक दिन आदमी अपने घर में साफ़-सफाई कर रहा था तो उसे अपनी खोयी हुई कुल्हाड़ी घर में ही कहीं रखी मिल गई। उसे याद आ गया कि वह अपनी कुल्हाड़ी उस जगह पर रखकर भूल गया था। उसी दिन उसने उस लड़के को देखा जिसपर वह कुल्हाड़ी चुराने का शक करता था। उस दिन उसे लड़के के हाव-भाव, बोलचाल, और आचरण में जरा सा भी अपराधबोध नहीं प्रतीत हो रहा था।”

लाओ-त्ज़ु ने शिष्यों से कहा – “सत्य को देखने की चाह करने से पहले यह देख लो कि तुमने मन की खिड़कियाँ तो बंद नहीं कर रखीं हैं”।

Photo by Tyler Lastovich on Unsplash

There are 10 comments

  1. आलोक सिंह

    सही कहा उन्होंने “सत्य को देखने की चाह करने से पहले यह देख लो कि तुमने मन की खिड़कियाँ तो बंद नहीं कर रखीं हैं”, वरना मन वही दिखायेगा जो हम देखना चाहते हैं .

  2. *KHUSHI*

    100% true… aissa hi kuch humse huaa thaa, hamara golden chain mil nahi raha thaa to hame hamari kaamwaali bai pe doubt thaa, kintu humne kisiko kuch bataya nahi. do din ke baad hame chain mil gai, tabhi itna pachtava huaa ki hum kitni aasani kisiko chor samaj lete hai.aapki ye post ne hame wapas yaad dilai hamari galti ki. shukriya…

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