The Stolen Axe – गुम हुई कुल्हाड़ी

लाओ-त्ज़ु ने अपने शिष्यों से एकदिन कहा – “एक आदमी की कुल्हाड़ी कहीं खो गयी। उसे घर के पास रहनेवाले एक लड़के पर शक था कि कुल्हाड़ी उसने ही चुराई है। जब भी आदमी उस लड़के को देखता, उसे लगता कि लड़के की आंखों में अपराधबोध है। लड़के के हाव-भाव, बोलचाल, और आचरण से आदमी का शक यकीन में बदल गया कि वह लड़का ही चोर है।

एक दिन आदमी अपने घर में साफ़-सफाई कर रहा था तो उसे अपनी खोयी हुई कुल्हाड़ी घर में ही कहीं रखी मिल गई। उसे याद आ गया कि वह अपनी कुल्हाड़ी उस जगह पर रखकर भूल गया था। उसी दिन उसने उस लड़के को देखा जिसपर वह कुल्हाड़ी चुराने का शक करता था। उस दिन उसे लड़के के हाव-भाव, बोलचाल, और आचरण में जरा सा भी अपराधबोध नहीं प्रतीत हो रहा था।”

लाओ-त्ज़ु ने शिष्यों से कहा – “सत्य को देखने की चाह करने से पहले यह देख लो कि तुमने मन की खिड़कियाँ तो बंद नहीं कर रखीं हैं”।

* * * * *

A farmer one day lost his axe and was convinced that it was stolen.

He believed that his neighbor’s son had stolen the axe.

When asked why he thought this, he said that his neighbor’s son walked like a thief, looked like a thief and spoke like a thief.

Soon afterwards, the farmer found his axe.

After that, he noticed that his neighbor’s son no longer walked, looked or spoke like a thief. (image credit)

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About Nishant Mishra

Nishant studied art history and literature at the university during 1990s. He works as a translator in New Delhi, India and likes to read about arts, photography, films, life-lessons and Zen.

There are 10 comments

  1. आलोक सिंह

    सही कहा उन्होंने “सत्य को देखने की चाह करने से पहले यह देख लो कि तुमने मन की खिड़कियाँ तो बंद नहीं कर रखीं हैं”, वरना मन वही दिखायेगा जो हम देखना चाहते हैं .

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