
Ignaz Semmelweis
1850 के आसपास हंगरी का एक डॉक्टर इग्नाज़ सेमेलवीस (Ignaz Semmelweis) वियना के एक अस्पताल के मेटर्निटी वार्ड में नौकरी करने के लिए आया. उसने देखा कि मेटर्निटी वार्ड में भर्ती महिलाओं की मृत्यु की दर बहुत अधिक थी. वह इसके कारणों का पता लगाना चाहता था.
सेमेलवीस ने यह पाया कि दाइयों द्वारा चलाए जा रहे क्लीनिकों की तुलना में अस्पताल के डॉक्टरों की देखरेख में भर्ती महिलाओं की मृत्यु की दर कहीं अधिक थी. डॉक्टरों की तरफ स्थिति इतनी बुरी थी कि महिलाएं दाइयों की देखरेख में भर्ती होने के लिए गिड़गिड़ाती थीं. कुछ तो अस्पताल में भर्ती होने की बजाए बाहर सड़क पर बच्चे को जन्म देने को तरजीह देती थीं.
सेमेलवीस ने दोनों स्थानों का बारीकी से मुआयना किया और कई संभावित कारणों के बारे में चिंतन किया. कई गलत विचारों को खारिज कर देने के बाद उसने इस बात को समझ लिया कि डॉक्टरों के हाथों में पोस्टमार्टम करने के कारण मृत व्यक्तियों के बारीक कण लग जाते थे जो महिलाओं को और अधिक बीमार कर देते थे. असल में डॉक्टरों के हाथ बैक्टीरिया और वायरस वगैरह से दूषित रहते थे जो कि महिलाओं को संक्रमित कर देते थे, लेकिन उन दिनों कोई भी बैक्टीरिया और वायरस के बारे में नहीं जानता था.
अपनी इस खोज के बाद सेमेलवीस ने हाथ धोने और साफ-सफाई रखने संबंधित कठोर नियम बनाए. ये नियम जहां लागू किए गए वहां मरीजों की मृत्यु दर में अप्रत्याशित कमी आई.
इस अभूतपूर्व कार्य के लिए सेमेलवीस को तो पुरस्कार मिलना चाहिए था न? लेकिन इसके ठीक विपरीत हुआ.
सेमेलवीस ने चिकित्सा के क्षेत्र में अपनी खोज को मान्यता दिलाने के लिए बहुत प्रयास किए. उस दौर के सामाजिक व वैज्ञानिक चिंतन की जड़ता और नई जानकारियों के अभाव में सेनेलवीस के विचारों को ठुकरा दिया गया.
इसके परिणामस्वरूप सेमेलवीस का मानसिक संतुलन बिगड़ गया. शायद उसे एल्ज़ीमर्स या सिफ़लिस रोग हो गया था. उसे पागलखाने भेज दिया गया. उन दिनों ऐसे मरीजों के साथ बहुत बुरा वर्ताव किया जाता था. सेमेलवीस को भी बहुत मारा-पीटा गया.
अंततः सेमेलवीस की मृत्यु खून में इन्फ़ेक्शन से हुई. यह विडंबना ही है कि वह उसी रोग का शिकार हुआ जिससे बचाव का आसान उपाय उसने ही खोजा था.
सेमेलवीस इस बात का उदाहरण है कि किसी वैज्ञानिक या डॉक्टर का जीवन कितना त्रासद हो सकता है. विज्ञान के इतिहास में ऐसे अनेक नाम दर्ज हैं जिन्हें जनहितकारी खोज व आविष्कार करने के बाद भी समझा व सराहा नहीं गया बल्कि लांछित और दंडित किया गया. (featured image)