क्या हम प्लूटो को ग्रहों के दल में दोबारा शामिल कर सकते हैं?

प्लूटो की खोज उन दिनों हुई थी जब खगोलशास्त्री यह मानते थे कि बाहरी ग्रहों के परिक्रमा पथ में आनेवाला विचलन किसी नवें ग्रह के कारण हो रहा था. लेकिन प्लूटो की खोज हो जाने के बाद उन्होंने यह पाया कि प्लूटो का द्रव्यमान इसके लिए पर्याप्त नहीं था और यह बहुत छोटा था. नेप्च्यून और यूरेनस जैसे ग्रहों को प्रभावित करने के लिए इसका बड़ा होना बहुत ज़रूरी था. 1970 के दशक तक अधिकांश खगोलशास्त्री यह मानने लगे थे कि प्लूटो वास्तविक ग्रह के पैमाने पर खरा नहीं उतरता.

  • प्लूटो का परिक्रमापथ धूमकेतुओं के परिक्रमापथ की तरह बहुत अधिक झुका हुआ है.
  • प्लूटो का परिक्रमापथ नेप्च्यून के पथ को 2:3 के अनुनाद से इस प्रकार से क्रॉस करता है कि इनकी टक्कर नहीं हो पाती लेकिन यह नेप्च्यून के परिक्रमा पथ के भीतर और इसके क्रांतिवृत्त (ecliptic) तक आ जाता है. इस प्रकार यह नेप्च्यून का छद्म-चंद्र (pseudo-moon) उसी प्रकार से बन जाता है जिस प्रकार से अंतरिक्षीय पिंड 6R10DB9, और 3753 Cruithne पृथ्वी के छद्म-चंद्र बन जाते हैं.
  • प्लूटो हमारे चंद्रमा से भी छोटा है और इतना छोटा अंतरिक्षीय पिंड अपने परिक्रमा पथ को अंतरिक्षीय कचरे से मुक्त नहीं रख पाता.
  • 1990 के दशक तक यह स्पष्ट हो गया था कि प्लूटो और इसका उपग्रह चेरोन नई प्रजाति के अंतरिक्षीय पिंडों के सदस्य हैं जिन्हें कुइपर बेल्ट ऑब्जेक्ट्स (Kuiper Belt objects) कहा जाता है. नई जानकारी के अनुसार प्लूटो इन सभी ज्ञात ऑब्जेक्ट्स में से सबसे बड़ा भी नहीं है.

अब प्लूटो को केवल कुइपर बेल्ट ऑब्जेक्ट कहा जाता है, और यही वह हमेशा से था. एक समय खगोल्शास्त्रियों की संस्था Astronomical Union ने इसे क्षुद्र-ग्रह (dwarf planet) कहना केवल इसीलिए शुरु कर दिया था ताकि ऐतिहासिक आधार पर प्लूटो को ग्रह मानने वालों को बुरा न लगे. लेकिन यह गलत था.

हमें सही-गलत की चिंता किए बिना चीजों को वैसा बताना चाहिए जैसी वे वास्तविकता में हैं. अपनी भावनाओं को दरकिनार करके हमें यह मान लेना चाहिए कि प्लूटो एक कुइपर बेल्ट ऑब्जेक्ट है, न कि कोई ग्रह या क्षुद्र-ग्रह. इसे कुइपर बेल्ट ऑब्जेक्ट मान लेने से खगोलशास्त्रियों के लिए प्लूटो, चेरोन और इस जैसे अनेक ऑब्जेक्ट्स के परिक्रमा पथ का अध्ययन करके यह अनुमान लगाना संभव हो गया है कि सूर्य से बहुत-बहुत दूर एक नवां ग्रह कहीं मौजूद है, जिसकी खोज की जानी अभी बाकी है. प्लूटो जैसे ऑब्जेक्ट्स के परिक्रमा पथ में आने वाली गड़बड़ियां हमें उस ग्रह तक उसी तरह ले जाएंगी जिस तरह वे हमें प्लूटो तक ले गई थीं. (featured image, प्लूटो और चेरोन)

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