क्या हम कभी क्षुद्रग्रहों पर माइनिंग कर सकेंगे?

बेशक! और मेरे अनुमान से कुछ समय के भीतर यह होने लगेगा.

धातुओं का हमारे जीवन और विकास में बहुत अधिक महत्व है. हम इन्हें पिघलाकर और विविध रूप देकर सुई से लेकर स्पेसशिप तक बना सकते हैं. क्षुद्रग्रह धातुओं का भंडार हैं. पृथ्वी पर भी धातुओं की कोई कमी नहीं है और अभी तक हम धातुओं के लिए पृथ्वी पर ही निर्भर हैं.

लेकिन जब हम अंतरिक्ष में रहने लगेंगे तब पृथ्वी से धातुएं लेना कठिन और बहुत अव्यावहारिक हो जाएगा. क्योंकिः

  1. पृथ्वी बहुत विशाल है और इसका गुरुत्वाकर्षण भारी धातुओं को अंतरिक्ष में ले जाने में बाधक है. यही कारण है कि हमारे रॉकेट इतने विशालकाय होते हैं.
  2. पृथ्वी का वायुमंडल भी अंतरिक्ष में जाने में बहुत कठिनाइयां उत्पन्न करता है. अंतरिक्ष से वापस आते समय यह स्पेसशिप को लगभग भूनकर रख देता है और ऊपर जाते समय इसके प्रतिरोध के कारण ईंधन की बहुत ज्यादा बर्बादी होती है.
  3. पृथ्वी पर पौधों द्वारा प्रकाश संष्लेषण होने के कारण मुक्त ऑक्सीजन की प्रचुरता है (लगभग 21%) जिससे अधिकांश धातुएं ऑक्सीकृत (oxidized) रूप में मिलती हैं. इन्हें उपयोग लायक धातु बनाने में बहुत अधिक खर्च होता है.
  4. अंत में, पृथ्वी के अधिकांश भूभाग में जीव-जंतु और वनस्पतियां पाए जाते हैं. यह बहुत अच्छी बात है लेकिन पृथ्वी पर बहुत सारे क्षेत्रों में इनके कारण अच्छे से माइनिंग नहीं की जा सकती.

इसलिए यदि हम अंतरिक्ष में रहना चाहते हैं तो हमें धातुओं के लिए पृथ्वी पर निर्भरता छोड़नी होगी. क्षुद्रग्रह ही हमारे लिए धातुएं प्राप्त करने का सबसे अच्छा विकल्प होंगे. बड़े क्षुद्रग्रहों का गुरुत्व भी लगभग न-के-बराबर होता है. उनका कोई वायुमंडल भी नहीं होता. उनमें मौजूद धातुएं अक्सर शुद्धतम रूप में होती हैं जिन्हें फैक्टरी में रिफाइन करने की ज़रूरत नहीं होती. वहां माइनिंग करने पर किसी को कोई आपत्ति भी नहीं होगी क्योंकि वहां एन.जी.ओ. भी नहीं होंगे. 🙂

क्षुद्रग्रहों के साथ सबसे अच्छी बात तो ये है कि वे पूरे मुफ़्त हैं… टोटली फ्री. और वे इतने अधिक हैं कि उनमें से एक का इस्तेमाल करके हमने स्पेसशिप बना भी लिया तो भी उनकी कोई कमी नहीं होगी.

मेरा अनुमान है कि 100 से 150 वर्षों के भीतर हम क्षुद्रग्रहों पर माइनिंग करने लगेंगे. इस काम में न सिर्फ भरपूर मुनाफा होगा, बल्कि हमारे अंतरिक्ष में बसने के सपने या मजबूरी के लिए यह सबसे व्यावहारिक चुनाव होगा. (image credit)

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