परंपरा : मुल्ला नसरुद्दीन

DSC06953कई लोगों की भीड़ में मुल्ला नसरुद्दीन नमाज़ अदा करने के दौरान आगे झुका. उस दिन उसने कुछ ऊंचा कुरता पहना हुआ था. आगे झुकने पर उसका कुरता ऊपर चढ़ गया और उसकी कमर का निचला हिस्सा झलकने लगा.

मुल्ला के पीछे बैठे आदमी को यह देखकर अच्छा नहीं लगा इसलिए उसने मुल्ला के कुरते को थोड़ा नीचे खींच दिया.

मुल्ला ने फ़ौरन अपने आगे बैठे आदमी का कुरता नीचे खींच दिया.

आगेवाले आदमी ने पलटकर मुल्ला से हैरत से पूछा – “ये क्या करते हो मुल्ला?”

“मुझसे नहीं, पीछेवालों से पूछो” – मुल्ला ने कहा – “शुरुआत वहां से हुई है”.

There are 15 comments

  1. neeti

    Sach hai. Kai bar parampara ki shuruaat to kisi thos vajah se hoti hai par baad me anukaran karne waale bina wajah samjhe hi nibhay chale jaate hein.

    Like

  2. प्रवीण पाण्डेय

    जब अपने साथ हो उसे बिना सोचे न बढ़ाया जाये ।

    Like

  3. shivangi

    मुल्ला नसीरुद्दीन की कहानियां मुझे बचपन से बेहद पसंद रही हैं. शुक्रिया !

    Like

  4. aradhana

    मेरे पिताजी अक्सर मुल्ला नसीरुद्दीन की कहानियाँ सुनाया करते थे. सबसे मजेदार लगती थी, कड़ाही के बच्चे की कहानी. सच में कितनी आसानी से मुल्ला मजाक ही मज़ाक में बड़ी बातें बता जाते थे.

    Like

  5. padmsingh

    किसी परंपरा को बिना सोचे समझे ढोने वालों के लिए बढ़िया तंज … शुरुआत कहीं से हुई हो … बुद्धिमत्ता तो उसकी विवेकशील परिणति मे ही है

    Like

  6. YADAV WARRIORS

    ये सब बेकार की बात है ,अब ये क्या मतलब की कोई गलती करे तो हम दोहराते रहे ..
    निराशाजनक

    Like

टिप्पणी देने के लिए समुचित विकल्प चुनें

Fill in your details below or click an icon to log in:

WordPress.com Logo

You are commenting using your WordPress.com account. Log Out / Change )

Twitter picture

You are commenting using your Twitter account. Log Out / Change )

Facebook photo

You are commenting using your Facebook account. Log Out / Change )

Google+ photo

You are commenting using your Google+ account. Log Out / Change )

Connecting to %s