सुकरात के प्रसंग

प्राचीन यूनान में डेल्फी नामक स्थान के बारे में लोग यह मानते थे कि वह विश्व के केंद्र पर स्थित है. वहां स्थित एक मंदिर के लिए यह मान्यता थी कि उस मंदिर का पुजारी (ऑरेकल) समाधिस्थ होने पर अपोलो देवता की वाणी में दिव्य सन्देश सुनाता है.

एक बार किसी ने ऑरेकल से पूछा कि यूनान का सबसे बुद्धिमान व्यक्ति कौन है. ऑरेकल ने उत्तर दिया – “एथेनियन दार्शनिक सुकरात यूनान का सबसे बुद्धिमान व्यक्ति है.”

लोगों ने सुकरात को ऑरेकल के कथन के बारे में बताया. यह सुनकर सुकरात ने कहा – “यदि देवता मुझे यूनान का सबसे बुद्धिमान व्यक्ति बताते हैं तो मुझे इसपर विश्वास करना चाहिए. इसका एकमात्र कारण यह हो सकता है कि समस्त यूनानियों में केवल मैं ही यह बात जानता हूँ कि मैं कुछ भी नहीं जानता.”

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ऊपर दिया गया चित्र ‘सुकरात की मृत्यु’ प्रसिद्द फ्रांसीसी चित्रकार ज़ाक-लुइ डेविड ने 1787 में बनाया था. चित्र विकिपीडिया से.

अपनी पुस्तक अपोलोजिया में प्लेटो सुकरात के अंतिम शब्दों के बारे में लिखते हैं – “मृत्यु से पहले सुकरात ने हमसे कहा ‘विदा लेने का समय आ गया है… और हम सब अपने-अपने मार्ग को जायेंगे… मैं मृत्यु की ओर, और तुम जीवन की ओर. कौन सा मार्ग श्रेष्ठ है, यह ईश्वर ही जानता है.”

(सामान्यतः इन्हें सुकरात के अंतिम शब्द कहा जाता है: “क्रितो, मुझे एस्कुलापियास को एक मुर्गा देना था. क्या तुम मेरा उधार चुका दोगे?’)

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There are 9 comments

  1. Vijay Wadnere

    अभी कल परसों ही आपका ब्लाग देखा.

    और अभी अभी पुरे २६ पन्ने पढ कर ‘खतम’ कर दिया। 🙂
    एक कहानी पढने के बाद, अगली पढे बिना रहा ही नहीं गया।

    बहुत अच्छा संग्रह है।

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