What Goes Around, Comes Around – भलाई का बदला

alexander fleming


उस युवक का नाम फ्लेमिंग था और वह एक गरीब स्कॉटिश किसान था. एक दिन, जब वह जंगल में कुछ खाने का सामान ढूंढ रहा था तभी उसे कहीं से किसी लड़के के चिल्लाने की आवाज़ सुनाई दी. अपना सामान उधर ही पटक कर वह आवाज़ की दिशा में दौड़ा.

उसने देखा कि एक दलदली गड्ढे में एक लड़का छाती तक फंसा हुआ है और बचने के लिए छटपटा रहा है. फ्लेमिंग ने किसी तरह लकडी आदि की सहायता से उसे खींचकर बाहर निकाला. ज़रा सी देर और हो जाती तो वह लड़का उस दलदल में समा जाता.

अगले दिन फ्लेमिंग की गरीब बस्ती में एक लकदक बग्घी आकर रुकी. एक कुलीन सज्जन उसमें से उतरे और उन्होंने फ्लेमिंग को बताया कि वे उस लड़के के पिता थे जिसकी जान फ्लेमिंग ने बचाई थी.

“मैं आपको कुछ देना चाहता हूँ” – उन्होंने फ्लेमिंग से कहा – “आपने मेरे पुत्र की जान बचाई है”.

“नहीं, माफ़ करें लेकिन मैं इसके लिए आपसे कुछ नहीं ले सकता” – फ्लेमिंग ने कहा. इसी बीच उनकी बातचीत सुनकर फ्लेमिंग का छोटा बेटा झोपड़ी से बाहर आ गया.

“क्या ये तुम्हारा बेटा है?” – कुलीन सज्जन ने फ्लेमिंग से पूछा. फ्लेमिंग ने गर्व से कहा – “हाँ, वह बहुत होनहार है”.

“मैं चाहता हूँ कि मैं उसकी शिक्षा-दीक्षा का खर्च वहन करूँ. यदि वह भी अपने पिता की ही भांति है तो एक दिन उसपर सभी गर्व करेंगे” – कुलीन सज्जन ने कहा.

इस प्रकार बालक फ्लेमिंग की पढ़ाई विधिवत अच्छे स्कूल में शुरू हुई. उसने लन्दन के सेंट मेरी मेडिकल कॉलेज से चिकित्सा में स्नातक की उपाधि प्राप्त की. आगे चलकर उसने विश्व की पहली एंटी-बायोटिक पेनीसिलीन की खोज की. उसकी इस खोज के लिए उसे नोबल पुरस्कार दिया गया. हम सब उसे सर अलेकजेंडर फ्लेमिंग के नाम से जानते हैं.

सालों बाद उस कुलीन सज्जन के उसी पुत्र को निमोनिया हो गया जिसकी जान पिता फ्लेमिंग ने बचाई थी. उसकी चिकित्सा अलेकजेंडर फ्लेमिंग की देखरेख में पेनीसिलीन की सहायता से की गई.

उस कुलीन सज्जन का नाम था लॉर्ड रैन्डोल्फ चर्चिल और उसके बेटे को दुनिया सर विंस्टन चर्चिल कहकर याद करती है.

* * * * * * * * * *

What Goes Around, Comes Around

His name was Fleming, and he was a poor Scottish farmer. One day, while trying to eke out a living for his family, he heard a cry for help coming from a nearby bog. He dropped his tools and ran to the bog. There, mired to his waist in black mulch, was a terrified boy, screaming and struggling to free himself. Farmer Fleming saved the lad from what could have been a slow and terrifying death.

The next day, a fancy carriage pulled up to the Scotsman’s sparse surroundings. An elegantly dressed nobleman stepped out and introduced himself as the father of the boy Farmer Fleming had saved. “I want to repay you,” said the nobleman. “You saved my son’s life.”

“No, I can’t accept payment for what I did,” the Scottish farmer replied, waving off the offer. At that moment, the farmer’s own son came to the door of the family hovel. “Is that your son?” the nobleman asked. “Yes,” the farmer replied proudly.

“I’ll make you a deal. Let me take him and give him a good education. If the lad is anything like his father, he’ll grow to a man you can be proud of.”

And that he did. In time, Farmer Fleming’s son graduated from St. Mary’s Hospital Medical School in London, and went on to become known throughout the world as the noted Sir Alexander Fleming, the discoverer of penicillin.

Years afterward, the nobleman’s son was stricken with pneumonia. What saved him? Penicillin.

The name of the nobleman? Lord Randolph Churchill. His son’s name? Sir Winston Churchill.

Someone once said, “What goes around, comes around.”

Advertisements

About Nishant Mishra

Nishant studied art history and literature at the university during 1990s. He works as a translator in New Delhi, India and likes to read about arts, photography, films, life-lessons and Zen.

There is one comment

टिप्पणी देने के लिए समुचित विकल्प चुनें

Fill in your details below or click an icon to log in:

WordPress.com Logo

You are commenting using your WordPress.com account. Log Out / बदले )

Twitter picture

You are commenting using your Twitter account. Log Out / बदले )

Facebook photo

You are commenting using your Facebook account. Log Out / बदले )

Google+ photo

You are commenting using your Google+ account. Log Out / बदले )

Connecting to %s