अपने आप चलनेवाली कारों के उपयोग से जुड़ा नैतिक संकट

क्या आप अपने आप चलनेवाली किसी ऐसी कार में बैठना चाहेंगे जिसे इस प्रकार से प्रोग्राम किया गया हो कि गंभीर दुर्घटना हो सकने की स्थिति में वह अधिक-से-अधिक व्यक्तियों की जान बचाने के लिए आपकी जान को संकट में डाल दे?

एक रिसर्च में यह पता चला है कि अधिकांश लोग इस विचार का समर्थन करते हैं कि किसी दुर्घटना की स्थिति में अपने आप चलने वाली कार (autonomous vehicles AV या self-driven vehicle) को यह प्रयास करना चाहिए कि जान-माल का कम-से-कम नुकसान हो भले ही इसके लिए कार के भीतर बैठे व्यक्तियों को खतरा हो. लेकिन यह मामला इसके आगे बढ़ने पर पेचीदा हो जाता है. रिसर्च में यह रोचक बात भी पता चली है कि लोग नैतिक निर्णय ले सकने वाले ऐसे वाहन के विचार का समर्थन तो करते हैं लेकिन वे ऐसे किसी वाहन में सफर करना नहीं चाहेंगे जो दूसरों के प्राण बचाने के लिए उनके प्राणों को संकट में डाल सकती हो.

यह गंभीर नैतिक संकट अपने आप चलनेवाली कारों की प्रगति में बहुत बड़ा अवरोध है. गूगल, एपल, और टेसला इस तरह की कारों की परियोजना पर कई वर्षों से काम रही हैं. इन कारों का वास्तविक परिस्तिथियों में परीक्षण अभी भी जारी है और यह देखा गया है कि ये कारें मानव ड्राइवर द्वारा चलाई जाने वाली कारों से अधिक सुरक्षित हैं.

तकनीक के इतिहास में हम संभवतः पहली बार मशीन के उपयोग के साथ इस प्रकार का नैतिक संकट खड़ा होता देख रहे हैं. हम ऐसी वस्तु के स्वामित्व की बात कर रहे हैं जिसे हम यह जानते हुए भी रोज उपयोग में लाएंगे कि किसी दिन किसी विशेष परिस्तिथि में वह हमें मार देने का निर्णय ले सकती है. केवल कार ही नहीं बल्कि सामान्यजन ऐसी कोई भी वस्तु खरीदना पसंद नहीं करेंगे जो किसी विशेष परिस्तिथि में उन्हें नुकसान पहुंचा सकती हो.

हम अमेरिका की बात करें तो आंकड़े यह दर्शाते हैं कि प्रतिवर्ष 40,000 व्यक्तियों की मृत्यु सड़क दुर्घटनाओं में होती है और इससे लगभग 1 ट्रिलियन डॉलर की आर्थिक हानि होती है. रिसर्च यह बताती है कि इन दुर्घटनाओं में से 90% मानवी त्रुटियों के कारण होती हैं. ऑटोनामस कारें हमें बहुत सारी दुर्घटनाओं से बचा सकती हैं लेकिन कुछ परिस्तिथियां ऐसी हो सकती हैं जिनमें टक्कर को टालना नामुमकिन हो.

ऐसी परिस्तिथियों में प्रोग्रामर्स को ऐसे एल्गोदरिम लिखने होंगे जो पल भर में ही उन स्थितियों का पूर्वानुमान कर लें जिनमें बहुत सारे लोगों की जान जाने की आशंका हो. मान लें कि आप अपने एक मित्र के साथ ऐसी कार में बैठकर पहाड़ी मार्ग से जा रहे हैं और कार की गति बहुत अधिक है. वैसे तो कार को उसके सामने की सड़क और अवरोधों के बारे में पूरी जानकारी होगी लेकिन यदि अचानक ही सड़क के किनारे खड़ा एक परिवार सड़क पार करने लगे तो तेज गति के कारण कार का रुकना बहुत कठिन हो जाएगा. कार को उसके सेंसर बता देंगे कि वह सामने सड़क पर चार व्यक्तियों के परिवार को हिट कर सकती है. ऐसे में चूंकि कार के भीतर दो व्यक्ति बैठे हैं, इसलिए कार उन चार व्यक्तियों को बचाने के लिए खुद को दाएं या बांए मोड़ देगी. किसी भी स्थिति में कार के भीतर बैठे दो लोग गंभीर दुर्घटनाग्रस्त हो जाएंगे. वे या तो सड़क के एक ओर पहाड़ से टकराएंगे या दूसरी ओर खाई में जा गिरेंगे. यह भी संभव है कि तेजी से मोड़ने के कारण कार अनियंत्रित होकर हवा में उछल जाए.

रिसर्च करने वालों को अपने प्रश्नों के अनेक रोचक उत्तर मिले. 76% से भी अधिक व्यक्तियों ने इस बात को नैतिक आधार पर सही माना कि रोड पर खड़े 10 व्यक्तियों को टक्कर मारने की बजाए कार में बैठे एक व्यक्ति को मारना उचित रहेगा. बहुत से लोग इस बात पर भी सहमत दिखे कि रोड पर खड़े केवल दो व्यक्तियों को बचाने के लिए कार में बैठे एक व्यक्ति की बलि चढ़ाई जा सकती है. परिकल्पनात्मक परिस्तिथि में जब कार में उनका कोई बहुत प्रिय जन बैठा हो तब भी लोग इस तरह की प्रोग्रामिंग से सहमत दिखे. लेकिन जब उनसे यह पूछा गया कि सरकार कानून बनाकर कार कंपनियों को ऑटोनामस कार में यह प्रोग्रामिंग करना अनिवार्य कर दे तो क्या वे ऐसी कार खरीदेंगे तो अधिकांश व्यक्तियों ने या तो ना में उत्तर दिया या वे कन्फ़्यूज़ दिखे.

जब तक खतरा स्वयं उनपर नहीं मंडरा रहा हो तक तक अधिकांश लोग इन कारों के विचार से सहमत दिखते हैं. पर वे हमेशा ऐसी कार खरीदने को ही प्राथमिकता देंगे जो उन्हें हर परिस्तिथि में सुरक्षित रखती हो. अब सरकार के सामने ऐसी कारों से जुड़े रूल्स और रेगुलेशन को कानूनी जामा पहनाने का संकट खड़ा हो गया है. यदि सरकारें ऐसा कोई भी कानून बनाती हैं तो कंपनियों के सामने बिक्री का संकट खड़ा हो जाएगा. यदि ये कारें और अधिक सुरक्षित हो सकती हों तो सरकारी नियमों-कानूनों की परवाह किए बिना लोग इन्हें अपनाने लगेंगे लेकिन ऐसा होने में बहुत समय लगेगा. ऑटोनामस कारें भविष्य में ट्रांसपोर्टेशन को पूरी तरह से बदल कर रख देंगी लेकिन पहले इनके उपयोग से जुड़ी नैतिक, भावनात्मक और सामाजिक चुनौतियों का समाधान करना ज़रूरी है. (featured image, गूगल की अपने आप चलने वाली कार)

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