यदि पृथ्वी के निकट किसी तारे में विस्फोट हो जाए तो क्या होगा?

यदि कभी ऐसा हो जाए तो हमें इसका पता चलने से पहले ही हमारी मृत्यु हो जाएगी.

तारे हमारी कल्पना से भी बहुत अधिक विशाल होते हैं. एक औसत तारा (कोई ब्राउन ड्वार्फ़ नहीं) बृहस्पति ग्रह से लगभग 70 गुना भारी होता है. क्या आप जानते हैं कि अकेले बृहस्पति ग्रह का भार सौरमंडल के अन्य ग्रहों के भार का ढाई गुना है? सबसे छोटे लाल बौने तारा (red dwarf) की त्रिज्या भी बृहस्पति की त्रिज्या की चार गुनी होगी.

तो… पृथ्वी के निकट ऐसे किसी भी तारे में विस्फोट हो जाने पर हमारा बचना लगभग असंभव है. तारे बहुत गर्म और ऊर्जावान होते हैं. तारों में होने वाले विस्फोट ब्रह्मांड की सबसे विध्वंसक घटनाएं हैं. तारे किसी सुपरनोवा की तरह न भी फटें तो भी वे हमारी पूरे सौरमंडल को राख कर सकते हैं.

इससे कोई फर्क नहीं पड़ेगा कि ऐसा कोई तारा हमसे कितनी दूर है. यदि वह तारा हमारे सौरमंडल में कहीं भी हो तो उसमें होने वाला विस्फोट हमें नष्ट कर देगा. सूर्य के सबसे निकट स्थित एल्फ़ा सैंटोरी तारा हमसे 4.367 प्रकाश वर्ष दूर है, फिर भी इसमें होने वाले विस्फोट से पृथ्वी पर सारा जीवन खत्म हो जाएगा.

exploding-starजब किसी तारे में विस्फोट होता है तो उसमें तो बहुत बड़े गोले के आकार में पदार्थ अंतरिक्ष में फेंका जाता है. साइड में दिए इस चित्र को देखिए, यह कितना सुंदर लग रहा है लेकिन यह भयानक है. हम नहीं चाहेंगे कि हमें पृथ्वी से ऐसा कुछ कभी दिखाई दे.

तारे के मलबे के इस आवरण में अत्यंत गर्म प्लाज़मा है जो प्रकाश की गति से अंतरिक्ष में फैल रहा है. इससे निकलनेवाली ऊर्जा कणों की धाराएं हमारे वायुमंडल से टकराएंगीं. पृथ्वी का चुंबकीय क्षेत्र इससे हमारी रक्षा नहीं कर पाएगा. ये धाराएं चुंबकीय क्षेत्र को एक मिलीसेकंड में ही नष्ट कर देंगीं.

इसके बाद हमारा वातावरण इस सौर आंधी में उड़ जाएगा. यह आंधी आग जैसी होगी और इसकी गति कई लाख किलोमीटर प्रति घंटा होगी. हम नहीं कहते कि हम यह सब होते हुए देख पाएंगे क्योंकि यह इतनी तेजी से होगा कि हमें पता भी नहीं चलेगा. इससे पहले कि हमारा मष्तिष्क इसे प्रोसेस कर पाए, हमारा शरीर ऊर्जा कणों से भरकर राख हो जाएगा. हम कणों के ढेर बनकर रह जाएंगे.

यह प्लाज़मा पृथ्वी को बहुत लंबे समय तक तार-तार करता रहेगा. इस प्रलय से कोई भी बच नहीं पाएगा भले ही वह कहीं भी छुप जाए. प्लाज़्मा की लहर पूरी पृथ्वी को पल भर में ही पार कर जाएगी और यह अनंत अंतरिक्ष में अनंत काल तक आगे बढ़ती ही जाएगी. (image credit)

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