सफलता की रेसिपी

आज मैं आपको इतिहास की किताब के एक रोचक पन्ने पर लेकर चलता हूं:

Samuel Langley

19वीं शताब्दी के अंत में… या कह लें कि बीसवीं शताब्दी की शुरुआत में (मतलब वर्ष 1900 के आसपास) सैमुएल लैंग्ली बहुत प्रसिद्ध खगोलशास्त्री और भौतिकविद् था. इसके अलावा वह प्रतिष्ठित स्मिथसोनियन इंस्टीट्यूट में सैक्रेटरी तथा हार्वर्ड ऑब्ज़रवेटरी में एसिस्टेंट प्रोफेसर होने के साथ-साथ सं.रा. अमेरिका की नौसेना अकादमी में गणित भी पढ़ाता था.

इस सबसे यह ज़ाहिर होता है कि लैंगली निश्चित ही बहुत योग्यतासंपन्न बुद्धिमान व्यक्ति था.

तो, वर्ष 1900 के आसपास हमारे इस बुद्धिमान वैज्ञानिक सैमुएल लैंग्ली ने कुछ अनूठा करने की सोची… उसने किसी ऐसी वस्तु का आविष्कार करने का विचार किया जिसमें किसी को भी सफलता न मिली हो. फिलहाल हम उसकी योजना को प्रोजेक्ट-एक्स का नाम दे देते हैं.

पूरा विश्व लैंग्ली की इस महत्वाकांक्षा के बारे में जानकर हैरान था. और उसकी इस योजना में उसका साथ देने वाले लोग भी बड़े वैज्ञानिक और उद्योगपति थे, जैसे एलेक्ज़ेंडर ग्राहम बेल और एंड्र्यू कार्नेगी.

यहां तक कि सं.रा. अमेरिका के रक्षा मंत्रालय ने भी प्रोजेक्ट एक्स के लिए 50,000 डॉलर की सहायता दी. पचास हज़ार डॉलर आज भी बहुत बड़ी रकम है, सोचिए आज से 100 साल से भी पहले यह कितनी बड़ी रकम रही होगी.

न्यूयॉर्क टाइम्स ने प्रोजेक्ट-एक्स की प्रगति पर हर समय निगाह बनाए रखी. सैमुएल लैंग्नी का नाम बच्चे-बच्चे की जुबान पर था. सफलता पाने से पहले ही प्रसिद्धि उसके कदम चूम रही थी. उस दौर के सबसे मेधावी लोग इस प्रोजेक्ट से जुड़े हुए थे.

और लगभग इसी समय ओहियो राज्य के डेटोन शहर में दो भाई वीराने में शांति से उनके अपने प्रोजेक्ट-एक्स को सफलतापूर्वक पूरा करने में जुटे थे.

ये दोनों भाई कोई खास शिक्षित नहीं थे. दोनों कभी कॉलेज नहीं गए. वे वैज्ञानिक या गणितज्ञ तो कतई नहीं थे. उनकी एक साइकिल की दुकान थी जिससे होनेवाली आय वे प्रोजेक्ट पर खर्च करते थे. उनके संपर्कों का दायरा बहुत सीमित था. उसके संसाधन बहुत सीमित थे. किसी को पता ही नहीं था कि वे किस काम में लगे हुए थे.

अब आप मुझे बताइए कि किसने प्रोजेक्ट-एक्स को पूरा करने में सफलता पाई?

A. सैमुएल लैंग्ली – प्रसिद्ध और धनी उच्चशिक्षित वैज्ञानिक व गणितज्ञ, जिसके पास सभी साधन, संसाधन, संपर्क और सहायता सुलभ थी.

या…

B. दो भाई – जिनके पास वास्तव में कुछ भी नहीं था.

यदि आपका उत्तर ‘A’ है तो… अफ़सोस… गलत ज़वाब.

और अब मैं आपको जो रोचक जानकारी देने जा रहा हूं वह यह है कि:

उन दोनों भाइयों को हम राइट ब्रदर्स के नाम से जानते हैं. और प्रोजेक्ट-एक्स था पहले वायुयान का निर्माण.

सैमुएल लैंग्ली के पास सफल होने के लिए ज़रूरी सारी सामग्री थी, जबकि राइट ब्रदर्स के पास थे लगातार असफलता से मिलनेवाले सबक.

फिर भी वे सफल हुए और लैंग्ली असफल हुआ, ऐसा क्यों? इस प्रश्न का उत्तर बहुत महत्वपूर्ण है,

सैमुएल लैंग्ली इस प्रोजेक्ट में सफल होकर इतिहास में अमर होने की मंशा रखता था. वह प्रसिद्ध तो था ही लेकिन और भी अधिक प्रसिद्ध, बल्कि अपने दोस्त एलेक्ज़ेंडर ग्राहम बेल से भी बड़ा वैज्ञानिक कहलाना चाहता था. इसके दूसरी ओर, राइट ब्रदर्स का केवल एक ही मकसद थाः वे उड़नेवाली मशीन बनाकर मनुष्यों को पंख देना चाहते थे. वे मनुष्यता की मदद करना चाहते थे.

लेकिन जब कभी दोनों (लैंग्ली और राइट ब्रदर्स) को असफलता का सामना करना पड़ा तो लैंग्ली ने हार मान ली जबकि राइट ब्रदर्स ने अपनी राह पर चलते जाना मुनासिब समझा. केवल इतना ही नहीं, राइट ब्रदर्स ने मनुष्यता की सहायता करने के अपने शुभ संकल्प के माध्यम से अनगिनत लोगों को प्रेरित किया.

तो, इस सबसे आपने क्या सीखा?

सफल होने के लिए आपको किन्हीं आदर्श परिस्तिथियों की ज़रूरत नहीं होती. आपका उद्देश्य स्पष्ट होना चाहिए, आपमें भरपूर लगन और हौसला होना चहिए ताकि आप बार-बार घटने वाली असफलताओं से हार न मानकर अपने कार्य को पूरा करने में जुटे रहें. यही सफलता की रेसिपी है.

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