बड़ी सफलता के लिए बड़े खतरे उठाने ही पड़ते हैं

2004 में मार्क ज़ुकरबर्ग हार्वर्ड यूनीवर्सिटी में पढ़ रहा था.

वहां उसे एक HarvardConnect वेबसाइट के बारे में पता चला. इस वेबसाइट को दो भाइयों कैमरोन और टाइलर विंकलवॉस ने बनाया था. इसे देखकर ज़ुकरबर्ग को फ़ेसबुक बनाने की प्रेरणा मिली.

ज़ुकरबर्ग विंकलवॉस ब्रदर्स से मिलकर और उनसे डील करके बड़े आराम के साथ बैठकर फ़ेसबुक बना सकता था. विंकलवॉस ब्रदर्स भी उसके आइडिया को पसंद करते और साथ काम करते, जिससे ज़ुकरबर्ग को फ़ेसबुक बनाने में बहुत कम समय लगता.

लेकिन ज़ुकरबर्ग ने ऐसा नहीं किया.

उसने फ़ेसबुक बनाने की योजना पर अकेले ही काम करने का निश्चय किया. उसे भली-भांति पता था कि ऐसा करने पर उसके और विंकलवॉस ब्रदर्स के बीच बहुत सी समस्याएं खड़ी हो जाएंगी.

यदि ज़ुकरबर्ग ने यह नहीं किया किया होता तो आज वह इस पोज़ीशन पर नहीं होता. आज ज़ुकरबर्ग की नेट वर्थ 60 अरब डॉलर से भी अधिक है.


1994 में जेफ़ बेज़ोस वॉल स्ट्रीट की एक इन्वेस्टमेंट फ़र्म में काम करता था.

उस कंपनी में बेज़ोस की पोज़ीशन सीनियर वाइस-प्रेसीडेंट की थी. ज़ाहिर है कि उसे बहुत अच्छा पैकेज मिलता था. उस नौकरी में वह लगातार सालों-साल बेहतरीन ज़िंदगी का आनंद उठा सकता था.

लेकिन उसने ऐसा नहीं किया.

1994 में बेज़ोस ने उस नौकरी को छोड़ दिया जिसे पाने का लोग सिर्फ़ सपना ही देखते थे. उसने बहुत बड़ी फ़ाइनेंशियस सिक्योरिटी को एक पल में ही ठुकरा दिया.

वह सियाटल चला गया. वहां उसने लाखों किताबें ऑनलाइन बेचनेवाली कंपनी बनाने की योजना पर काम शुरु कर दिया.

इस तरह अमेज़न कंपनी जुलाई, 1995 में विधिवत लांच हुई.

जेफ़ बेज़ोस आज दुनिया का सबसे संपन्न व्यक्ति है. उसकी नेट वर्थ लगभग 130 अरब डॉलर है.

उन दिनों यदि बेज़ोस ने अपनी नौकरी नहीं छोड़ी होती तो वह आज भी किसी कंपनी के पे-रोल पर काम कर रहा कोई आम एक्ज़ीक्यूटिव होता.


इस समय इलोन मस्क दो बड़ी कंपनियों का सर्वेसर्वा है. ये कंपनियां हैं Tesla और SpaceX.

ये दोनों कंपनियां उस क्षेत्र में काम कर रही हैं जहां पहले कभी किसी प्राइवेट लिमिटेड कंपनी ने उतरने का जोखिम नहीं उठाया.

टेसला ने ऐसी पहली इलेक्ट्रिक कारें बनाईं हैं जिनकी दक्षता और क्षमता के साथ किसी तरह के समझौते नहीं किए गए हैं. वे पेट्रोल-डीज़ल से चलनेवाली कारों जितनी ही कुशल हैं.

स्पेसएक्स अंतरिक्ष अनुसंधान के क्षेत्र में उतरनेवाली पहली निजी कंपनी है. इसकी परियोजनाएं बहुत महत्वाकांक्षी हैं और मंगल पर पहुंचना इसका बड़ा उद्देश्य है.

इलोन मस्क ने बहुत बड़ा रिस्क लेते हुए अपना और अपने निवेशकों का धन इन दोनों कंपनियों में लगाया है जबकि बहुत से आम निवेशक इनकी सफलता को लेकर अभी भी संदेह करते हैं.

लेकिन मस्क ने उन्हें गलत साबित किया.

आज मस्क की नेट वर्थ 20 अरब डॉलर है, और टेसला व स्पेसएक्स सफल और अनूठी कंपनियों के रूप में प्रतिष्ठित हो चुकी हैं.


तो मैं आपको यह सारी बातें क्यों बता रहा हूं?

क्योंकि बड़े रिस्क लेने वाले व्यक्ति बड़ी सफलताएं अर्जित करते हैं.

वे हमेशा अपनी नौकरी बचाने की फ़िक्र नहीं करते.

वे कुछ खो देने के डर से हर चीज़ को जकड़कर नहीं बैठे रहते.

वे उनके पास मौजूद हर चीज़ को दांव पर लगा देते हैं.

वे जानते हैं कि वे सब कुछ खो सकते हैं. वे जानते हैं कि सफल होने की दर बहुत कम होती है.

लेकिन वे हिम्मत नहीं हारते.

और यही उनकी सफलता का कारण है.


खुद को हर तरह के खतरे से बचाकर आप सफल नहीं हो सकते.

सब कुछ पा लेने के पहले सब कुछ खो देने की संभावना से गुज़रना पड़ता है.


By Julian Frank, Film Buff, Stephen King Lover, Amateur Writer, Awkward Teen. Photo by Ben White on Unsplash

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There are 3 comments

  1. Harshvardhan Srivastav

    आपकी इस पोस्ट को आज की बुलेटिन गुरुदेव रबीन्द्रनाथ टैगोर और ब्लॉग बुलेटिन में शामिल किया गया है। कृपया एक बार आकर हमारा मान ज़रूर बढ़ाएं,,, सादर …. आभार।।

    पसंद करें

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