डायनोसौरों के युग में चंद्रमा पृथ्वी के कितना समीप था?

इस प्रश्न का छोटा उत्तर यह है कि चंद्रमा की पृथ्वी से औसत दूरी 2,38,857 मील (3,84,404 किलोमीटर) है. लेकिन इस उत्तर को फाइनल उत्तर मान लेने से पहले आपको कुछ तथ्यों पर विचार करना पड़ेगा. सबसे पहले आप यह ध्यान दें कि मैंने “औसत” शब्द का प्रयोग किया है. इसका संबंध इस तथ्य से है कि चंद्रमा पृथ्वी के चारों ओर दीर्घवृत्ताकार कक्षा में परिक्रमा करता है, अर्थात कभी यह पृथ्वी के निकट होता है और कभी यह पृथ्वी से दूर होता है.

डायनोसौर पृथ्वी पर लगभग 8.5 करोड़ वर्ष पहले मौजूद थे. इस कालखंड को हम मीसोज़ोइक युग के नाम से जानते हैं.

वर्तमान में चंद्रमा पृथ्वी से प्रति वर्ष लगभग 1.5 इंच दूर जा रहा है. यदि हम 1.5 इंच को 8.5 करोड़ वर्ष से गुणा करें तो हमें उत्तर मिलता है लगभग 2,012 मील (3,238 किलोमीटर).

वर्तमान में चंद्रमा की पृथ्वी से औसत दूरी लगभग 2,38,857 मील (3,84,404 किलोमीटर) है. 2,012 मील (3,238 किलोमीटर) अधिक निकट (लगभग 0.8%) होने मात्र से यह कोई खास बड़ा नहीं दिखता.

कुछ स्टडीज़ से यह पता चला है कि अपने निर्णाण के समय चंद्रमा पृथ्वी से केवल लगभग 25,000 किलोमीटर दूर था. सिम्युलेशन से यह पता चलता है कि यदि यह इससे अधिक निकट बना होता तो गुरुत्व के कारण टूट जाता.

1969 में अपोलो अभियानों के दौरान चंद्रयात्रियों ने सतह पर रिफ्लेक्टर लगाए थे. पृथ्वी से इन रिफ्लेक्टरों पर लेज़र की किरण फेंकी जाती है और इसके हम तक लौटकर आने में लगे समय से चंद्रमा की दूरी सटीकता से नापी जाती है. हर वर्ष किए जा रहे परिक्षणों से पता चला है कि यह हमसे बहुत धीरे-धीरे दूर जा रहा है. इससे उठने वाली ज्वारीय तरंगों में परिवर्तन आने से पृथ्वी के घूर्णन की गति भी कम हो रही है. कोणीय संवेग के संरक्षण का नियम यह कहता है कि पृथ्वी के घूर्णन की गति में कमी आने पर चंद्रमा हमसे दूर जाने लगेगा.

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