Buddha and Cowdund – बुद्ध और गोबर का ढेर

Swayambhunath


प्रसिद्द चीनी कवि सू तुंग-पो (1036-1100) ने बौद्ध दर्शन पर बहुत सुन्दर कवितायेँ लिखीं हैं. वह स्वयं बहुत धार्मिक व्यक्ति था और राजदरबार में साहित्य प्रभारी के पद पर आसीन था.

एक दिन सू बौद्ध मंदिर गया और उसने संत बुद्धस्तंप के साथ ध्यान किया. कुछ देर बाद सू ने संत से पूछा, “मुझे देखिये, यहाँ ध्यान करता हुआ मैं कैसा दिखता हूँ?”

बुद्धस्तंप ने सू को गौर से देखा और कहा, “महामना, आप अत्यंत शांत, स्वस्थ, और सुन्दर लग रहे हैं. आप साक्षात् बुद्धस्वरूप लग रहे हैं”. यह सुनकर सू बहुत खुश हो गया.

कुछ देर बाद बुद्धस्तंप ने सू से पूछा, “और मैं ध्यान करते समय कैसा लगता हूँ?”

सू ने सोचा कि बातचीत के दौरान बुद्धस्तंप हमेशा ही प्रभावी रहते थे और उनकी स्थिति अधिक सुदृढ़ रहती थी. इसलिए उसने इस अवसर पर उन्हें नीचा दिखने का सोचा और कहा, “आप तो बिलकुल गोबर के ढेर जैसे लगते हैं.”

बुद्धस्तंप उसकी बात सुनकर मुस्कुरा दिए और कुछ न बोले.

इस वार्तालाप में हावी रहने से सू ख़ुशी से फूला न समाया और सभी को इस बारे में बताया. जब उसकी पत्नी ने यह बात सुनी तो वह बोली, “आपको पता नहीं है पर आप इस वार्तालाप में बुरी तरह से परास्त हो गए हो.”

“क्या कहती हो!? यह तो साफ़ दिखता है कि बुद्धस्तंप के पास मेरी बात का कोई उत्तर नहीं था और वे चुप रह गए. फिर मैं भला कैसे हार सकता हूँ!?”

उसकी पत्नी ने कहा, “मुझे तो यह लगता है कि बुद्धस्तंप का ह्रदय बुद्ध की भावना से ओतप्रोत है इसीलिए उन्होंने तुममें बुद्ध की छवि देखी. जबकि तुम्हारे ह्रदय में गोबर भरा हुआ है इसलिए तुम्हें वह दिव्य पुरुष गोबर के ढेर के सिवाय कुछ और नहीं दिखा.”

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The famous Chinese poet Su Tung-po (1036-1100) in the Song Dynasty wrote very simple Chinese Poems based on Buddhist philosophy, as he himself is a very religious person. He was appointed to the position of the Director of Literature in the Imperial Court.

One day he visited a Buddhist Temple and meditated with the Monk Buddhastamp. After a little while, Su asked the Monk: “Look at me, Venerable. I am sitting here meditating. What do I look like?”

Buddhastamp examined Su closely for a while and said, “Officer, you are very solemn, radiant and gentle. You look like a Buddha Stature.” Su was very pleased and elated with the answer.

After a while, Buddhastamp asked Su, “Officer, I am sitting here meditating also. What do I look like?”

Mr. Su thought for sometime, this Monk is always in the upperhand whenever we debated on any subjects. Now, I got the opportunity to beat him. So, he replied, “You look like a heap of cow dung, Venerable.” On hearing this, the Monk simply smiled and did not argue with him at all.

Thinking that he had won the debate, Mr. Su went about telling everybody in town how he triumph over the monk, until his younger sister heard of it and enlightened him, “My dear brother, you had lost the debate completely.”

“What!? I am very sure the Monk was fooled this time. Why do you say so?”

“Dear brother,” said Miss Su, “the Monk’s heart was filled with Buddha nature, therefore he saw you as a Buddha. But your heart was filled with cow dung, and therefore you saw him as a heap of cow dung.”

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About Nishant Mishra

Nishant studied art history and literature at the university during 1990s. He works as a translator in New Delhi, India and likes to read about arts, photography, films, life-lessons and Zen.

There are 19 comments

  1. BHAGAT SINGH PANTHI

    “मुझे तो यह लगता है कि बुद्धस्तंप का ह्रदय बुद्ध की भावना से ओतप्रोत है इसीलिए उन्होंने तुममें बुद्ध की छवि देखी. जबकि तुम्हारे ह्रदय में गोबर भरा हुआ है इसलिए तुम्हें वह दिव्य पुरुष गोबर के ढेर के सिवाय कुछ और नहीं दिखा.”
    sahi hai

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