प्रयोजन

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एक दिन महान मध्ययुगीन इटालियन कवि दांते एलीघरी एक चिड़ियाघर के पास से गुज़रे और उन्होंने एक पिंजड़े में कैद शेर को देखा. पिंजड़े के भीतर बेबस बैठे शेर ने दांते के ह्रदय में एक अमर छंद रच दिया जो बाद में उनके महान काव्य ‘द डिवाइन कॉमेडी’ में संकलित हुआ.

“उस पिंजड़े तक पहुँचने वाले शेर का अपने अस्तित्व के लिए संघर्ष करने के पीछे बस इतना ही प्रयोजन था कि उसे उस सुबह देखकर एक अमर छंद कौंध जाए!” – जॉर्ज लुईस बोर्गेज़ ने कहीं लिखा है.

उस शेर की ही भांति हम भी इस पृथ्वी पर एक अति महत्वपूर्ण प्रयोजन से उपस्थित हैं, और वह प्रयोजन है – इस सुबह इस क्षण यहाँ होना.

(A inspirational anecdote about Dante Alighieri – in Hindi)

There are 5 comments

  1. seema gupta

    उस शेर की ही भांति हम भी इस पृथ्वी पर एक अति महत्वपूर्ण प्रयोजन से उपस्थित हैं, और वह प्रयोजन है – इस सुबह इस क्षण यहाँ होना.

    क्या बात कही है ….., सच में सुन्दर प्रयोजन है….
    regards

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