गिरिजाकुमार माथुर – कविता – हम होंगे कामयाब

spotted smile


होंगे कामयाब, होंगे कामयाब

हम होंगे कामयाब एक दिन
हो-हो मन में है विश्वास, पूरा है विश्वास
हम होंगे कामयाब एक दिन

होंगी शांति चारो ओर
होंगी शांति चारो ओर
होंगी शांति चारो ओर एक दिन
हो-हो मन में है विश्वास, पूरा है विश्वास
होंगी शांति चारो ओर एक दिन

हम चलेंगे साथ-साथ
डाल हाथों में हाथ
हम चलेंगे साथ-साथ एक दिन
हो-हो मन में है विश्वास, पूरा है विश्वास
हम चलेंगे साथ-साथ एक दिन

नहीं डर किसी का आज
नहीं भय किसी का आज
नहीं डर किसी का आज के दिन
हो-हो मन में है विश्वास, पूरा है विश्वास
नहीं डर किसी का आज के दिन

हम होंगे कामयाब एक दिन

(A very famous Hindi poem ‘ Hum Honge Kaamyaab’ by Girija Kumar Mathur)

We Shall Overcome by Pete Seegar

There are 11 comments

  1. हिमान्शु मोहन

    बहुत अच्छा किया आपने जो यह कविता प्रस्तुत की। यह उन कालजयी रचनाओं में से है जो रचनाकार से बड़ी हो जाती हैं। यदि आप ‘छाया मत छूना मन – होगा दुख दूना मन’ भी ले आएँ तो और अच्छा लगेगा।
    आभार!

  2. Vicky G

    क्या यह वाकई श्री गिरिजा कुमार माथुर की कविता है? अभी तक मैं इसे अमेरिकी कवि पीट सीगर की “वी शैल ओवरकम” का हिंदी अनुवाद समझता था. क्रिप्या वास्तविक तथ्यों से अवगत कराएं.

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