Skip to content
About these ads

परम सत्य

“लोग अक्सर ही सत्य को भूल क्यों जाते हैं”, यात्री ने गुरु से पूछा.

“कैसा सत्य?”, गुरु ने पूछा.

“मैं जीवन में कई बार सत्य के मार्ग से भटक गया”, यात्री ने कहा, “और हर बार मैं किसी भांति मार्ग पर लौट आया”.

गुरु ने कहा, “सत्य तो यह है कि हम सभी हर घड़ी परिवर्तित हो रहे हैं. आज तुम जिसे सत्य कह रहे हो वह बीत चुके कल और आने वाले कल के सत्य सरीखा नहीं होगा. वास्तविक सत्य तो परिवर्तन के परे है. तुम उसे जकड़े या थामे नहीं रह सकते. वह तुम्हारे मार्ग से भटकने या उसपर वापस आ जाने से संबंधित नहीं है.”

“मुझे यह सत्य कैसे मिलेगा?”, यात्री ने पूछा.

“तुम ऐसा सत्य न तो खोज सकते हो और न ही उसे खो सकते हो. तुम उसे भुला भी नहीं सकते. यह सम्पूर्ण और शून्य दोनों को ही समाहित रखता है. यही परम सत्य है”.

About these ads
4 Comments Post a comment
  1. सत्य वचन ,

    Like

    March 16, 2012
  2. सच वास्तविक सत्य तो परिवर्तन के परे….

    Like

    March 16, 2012
  3. सार्थक !

    Like

    March 18, 2012
  4. Living moment to moment.

    Like

    March 28, 2012

टिप्पणी देने के लिए समुचित विकल्प चुनें

Fill in your details below or click an icon to log in:

WordPress.com Logo

You are commenting using your WordPress.com account. Log Out / Change )

Twitter picture

You are commenting using your Twitter account. Log Out / Change )

Facebook photo

You are commenting using your Facebook account. Log Out / Change )

Google+ photo

You are commenting using your Google+ account. Log Out / Change )

Connecting to %s

Follow

Get every new post delivered to your Inbox.

Join 3,509 other followers

%d bloggers like this: