मैं यह जान गयी हूँ कि…

मैं यह जान गयी हूँ कि कितना ही बुरा क्यों न हुआ हो और आज मन में कितनी ही कड़वाहट क्यों न हो, यह ज़िंदगी चलती रहती है और आनेवाला कल खुशगवार होगा.

मैं यह जान गयी हूँ कि किसी शख्स को बारिश के दिन और खोये हुए लगेज के बारे में कुछ कहते हुए, और क्रिसमस ट्री में उलझती हुई बिजली की झालर से जूझते देखकर हम उसके बारे में बहुत कुछ समझ सकते हैं.

मैं यह जान गयी हूँ कि हमारे माता-पिता से हमारे संबंध कितने ही कटु क्यों न हो जाएँ पर उनके चले जाने के बाद हमें उनकी कमी बहुत शिद्दत से महसूस होती है.

मैं यह जान गयी हूँ कि पैसा बनाना और ज़िंदगी बनाना एक ही बात नहीं है.

मैं यह जान गयी हूँ कि ज़िंदगी हमें कभी-कभी एक मौका और देती है.

मैं यह जान गयी हूँ कि ज़िंदगी में राह चलते मिल जाने वाली हर चीज़ को उठा लेना मुनासिब नहीं है. कभी-कभी उन्हें छोड़ देना ही बेहतर होता है.

मैं यह जान गयी हूँ कि जब कभी मैं खुले दिल से कोई फैसला लेती हूँ तब मैं अमूमन सही होती हूँ.

मैं यह जान गयी हूँ कि मुझे दर्द सहना गवारा है मगर दर्द बन जाना मुझे मंज़ूर नहीं.

मैं यह जान गयी हूँ कि हर दिन मुझे किसी को प्यार से थाम लेना है. गर्मजोशी से गले मिलना या पीठ पर दोस्ताना धप्पी पाना किसी को बुरा नहीं लगता.

मैं यह जान गयी हूँ कि लोग हमारे शब्द और हमारे कर्म भूल जाते हैं पर कोई यह नहीं भूलता कि हमने उन्हें कैसी अनुभूतियाँ दीं.

मैं यह जान गयी हूँ कि मुझे अभी बहुत कुछ सीखना है.

माया ऐन्जेलू

* * *

इसी ब्लॉग में इससे मिलती-जुलती एक पोस्ट और भी है. उसे भी पढ़कर देखें.

12 Comments

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12 Responses to मैं यह जान गयी हूँ कि…

  1. ”मैं यह जान गयी हूँ कि मुझे अभी बहुत कुछ सीखना है”. अच्‍छी सीख.

  2. ई मेल सदस्‍यता ले लिया है अब बिना हाजिरी चटका के नियमित रहेंगें.

  3. वाणी गीत

    जान लिया हमने भी जीवन का सत्य …फिर भी सीखने को कितना कुछ बाकी है यहाँ …!

  4. बेहद सुन्दर चटका …
    कभी कभी आप उम लोगों की महत्ता को समझ नहीं पाते जब तक की वो आपके करीब रहते हैं … काश जिंदगी एक और मौका देती उनसे गुजारिश करने की … उनके साथ फिर से दो पल बिताने की …
    राजीव

  5. rachna

    “मै ये जान गयी हूँ कि जीने के लिये बार बार मरने कि जरुरत नहीं हैं ” रचना

    अद्भुत हैं क्या नारी कविता ब्लॉग पर माया ऐन्जेलू को दे सकती हूँ ??

  6. मैं यह जान गयी हूँ कि मुझे अभी बहुत कुछ सीखना है.
    ———
    यह अपना जोड़ दूं –

    सीखने की जद्दोजहद में कभी लगता है ट्रैक बदलता या पॉज लेना भी जरूरी होता है!

  7. निशांत जी ,
    बहुत बहुत अच्छी पोस्ट . बहुत दिनों बाद कुछ ऐसा पड़ने को मिला कि कुछ सीखा जा सके…
    निशांत जी , क्या ये पोस्ट मैं अपने एक ब्लॉग अंतर्यात्रा के लिये ले सकता हूँ .
    धन्यवाद.
    विजय

    • अवश्य. आप इस पोस्ट को इस ब्लॉग का लिंक देकर अपने ब्लॉग पर लगा सकते हैं.

  8. rafatalam

    निशांत जी सभी लाइनें दिल छुलेने वाली है और जीवन अनुभव का निचोड़ ….मैं यह जान गयी हूँ कि मुझे अभी बहुत कुछ सीखना है.यह मन्त्र जीवन की आखरी साँस तक फोलो किया जाना चाह्ये .प्रेरक प्रसंग ने आनंदित किया .धन्यवाद

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