इंटरनेट कितना भारी है?

एक यूट्यूब चैनल द्वारा की गई गणनाओं के आधार पर इंटरनेट का भार लगभग 50 ग्राम है. लेकिन यह जानकारी वर्ष 2011 की है. इसके बाद से इंटरनेट पर जितना डेटा अपलोड किया गया होगा उसके आधार पर यह कहा जा सकता है कि इटंरनेट का भार लगभग 1 पाव होना चाहिए.

लेकिन हम इस नतीजे तक कैसे पहुंचे? दरअसल इंटरनेट प्नवाहमान इलेक्ट्रॉनों के कारण कार्य करता है. इस क्षण इंटरनेट पर गति कर रहे जितने भी इलेक्ट्रॉन हैं उनका भार गणना करके निकाला जा सकता है. वैसे तो हम सभी जानते हैं कि इलेक्ट्रॉन लगभग भारहीन होते हैं लेकिन बहुत-बहुत-बहुत अधिक इलेक्ट्रॉनों का भार निकाला जा सकता है.

यह भार इंटरनेट पर अपलोड किए गए हर वेब पेज, ई-बुक, गीत, वीडियो, और फ़ोटो का भार है. अकेले यूट्यूब में ही करोड़ों वीडियो हैं. फ्लिकर और फेसबुक में भी में अरबों फोटो हैं. गूगल के सर्वरों पर भी अरबों-अरब गीगाबाइट डेटा स्टोर किया गया है.

कोई मैसेज टाइप करते समय हम अपने की-बोर्ड या फोन का कोई बटन भी दबाते हैं तो हमारे कंप्यूटर या फोन या किसी वेबसाइट या एप्प सर्वर पर डेटा का भार बढ़ जाता है. जब आप अपने किंडल पर कोई ई-बुक डाउनलोड करते हैं तो किंडल का भार इतनी कम मात्रा में बढ़ जाता है कि दुनिया की कोई भी तौलनेवाली मशीन हमें उसका मान नहीं बता सकती. 50 KB की एक ईमेल को बनाने में 8 अरब इलेक्ट्रॉन लगते हैं. 8 अरब की संख्या सुनने में बहुत बड़ी लगती है लेकिन इतने इलेक्ट्रॉनों का भार एक औंस का 10211021 भाग होता है.

आइंस्टीन के प्रसिद्ध सूत्र e=mc² का उपयोग करके बर्कली स्थित कैलीफ़ोर्निया विश्वविद्यालय के प्रोफेसर जॉन कुबियाटोविट्ज ने जटिल गणना करके यह बताया है कि 4GB डेटा का भार 0.000000000000000001 ग्राम होता है.

इस तरह इंटरनेट हर सैकंड भारी होता जा रहा है. इंटरनेट पर ऐसी बहुत सी थ्योरी उपलब्ध हैं जिनमें इंटरनेट के भार के बारे में बड़े रोचक अनुमान लगाए गए हैं. एक वेबसाइट ने इसे स्ट्राबेरी जितना भारी बताया है तो दूसरी वेबसाइट ने इसे सेब जितना भारी बताया है, लेकिन सच तो यह है कि इस संबंध में किसी भी वैज्ञानिक या वेबसाइट के दावे को गंभीरता से नहीं लिया जा सकता.

Photo by Markus Spiske on Unsplash

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