शैतान के कुछ शिष्य काहिरा के नज़दीक रहनेवाले एक महात्मा को पतन के मार्ग पर लाने का भरसक प्रयास कर रहे थे. उन्होंने उसे नूबिया की हसीनाएं, मिस्र के लज़ीज़ पकवान, और लीबिया के जवाहरात का प्रलोभन देकर वश में करना चाहा पर उनकी किसी तरकीब ने काम नहीं किया.
एक दिन शैतान की निगाह अपने शिष्यों की कोशिशों पर पड़ गयी. शैतान ने झल्लाते हुए कहा, “नामुरादों! तुमने उस चीज़ को क्यों नहीं आजमाया जिसे फ़रिश्ते भी नज़रंदाज़ नहीं कर सकते!? देखो, मैं तुम्हें यह करके दिखता हूँ!”
महात्मा के करीब जाकर शैतान ने उसके कान में फुसफुसाते हुए कहा, “आपको अपने उस शिष्य की याद है जो सालों तक आपके क़दमों के पास बैठता रहा!? सुना है उसे सिकंदरिया के मठ का महंत बनाया गया है”.
यह सुनते ही महात्मा ने अपना आपा खो दिया और ईश्वर को ऐसा अन्याय करने के लिए लानतें भेजीं!
“आइंदा से हर मुश्किल आदमी के साथ सबसे पहले इसी प्रलोभन का प्रयोग करना”, शैतान ने शिष्यों को यह निर्देश दिया.
“आदमी हर उकसाव और प्रलोभन का संवरण कर सकता है लेकिन अपने से निचले दर्जे के आदमी की जीत कभी बरदाश्त नहीं कर सकता”.
(Hindi translation of a story from the blog of Paulo Coelho) Photo by Gianni Zanato on Unsplash











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