पिछली सदी के शुरुआती वर्षों में चिकित्सा सुविधाएँ अच्छी दशा में नहीं थीं. बहुत बड़ी संख्या में साल भर से छोटे बच्चे अस्पतालों में दाखिल किए जाते थे लेकिन बेहतर निदान और उपचार के अभाव में वे काल–कवलित हो जाते थे. हालात इतने बुरे थे कि किसी–किसी अस्पताल में तो बहुत गंभीर दशा में भर्ती रखे गए बच्चे के भर्ती कार्ड पर Hopeless लिख दिया जाता था.
जर्मनी के डसेलडोर्फ़ शहर में डॉ फ्रिट्ज़ टालबोट का बच्चों का अस्पताल था. Hopeless बच्चों का बेहतरीन इलाज करके उनकी जान बचा लेने के लिए डॉ टालबोट की ख्याति दूर–दूर तक फ़ैली हुई थी. हर दिन वह सुबह अस्पताल के सारे वार्डों में राउंड लगाकर बच्चों की हालत का मुआयना करते थे और जूनियर डाक्टरों को उपचार के निर्देश देते थे.
ऐसे ही एक जूनियर डाक्टर जोसेफ ब्रेनरमान ने डॉ टालबोट के बारे में यह बात बताई:
“कई बार हमारे यहां ऐसा बच्चा भर्ती होता था जिसपर हर तरह के उपचार निष्फल हो जाते थे. डॉ टालबोट जब ऐसे बच्चे का चार्ट देखते थे तब उसके एक कोने पर कुछ अस्पष्ट सा लिखकर नर्स को दे देते थे. नर्स बच्चे को लेकर कहीं चली जाती थी. ज्यादातर मामलों में वह बच्चा बच जाता था और पूर्णतः स्वस्थ हो जाता था. मैं हमेशा यह जानना चाहता था कि डॉ टालबोट चार्ट पर क्या लिखते थे. क्या उनके पास कोई चमत्कारी दवाई थी?
एक दिन राउंड लेने के बाद मैं वार्ड में गया और एक Hopeless बच्चे के चार्ट पर डॉ टालबोट की लिखी दवा का नाम पढ़ने की कोशिश करने लगा. जब मुझे कुछ भी समझ नहीं आया तो मैंने हेड-नर्स से पूछा कि उस दवा का नाम क्या है.
“दादी माँ” – नर्स बोली. फ़िर वह मुझे अस्पताल के एक अज्ञात कमरे में ले गयी जहाँ एक बहुत बूढ़ी औरत एक hopeless बच्चे को सीने से लगाए बैठी थी.
नर्स ने कहा, “जब हमारे यहाँ ऐसा बच्चा लाया जाता है जिसकी हम कोई मदद नहीं कर सकते तब हम उसे यहाँ लाकर दादी माँ की गोद में रख देते हैं. इस अस्पताल के सभी डाक्टर और नर्सें मिलकर भी उतने बच्चे नहीं बचा पाते जिनको दादी माँ का अनुपम स्नेह दूसरा जीवन दे देता है“.
Photo by Liv Bruce on Unsplash





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