कल्पना कीजिए कि आप एक नाव पर सवार हैं। इस नाव के द्वारा आप सैलानियों को समुद्र की सैर कराते हैं।

एक रात आपको किसी मछुआरे का फोन आता है।

वह फोन पर बताता है कि एक बड़ी whale मछली उसके जाल में फँस गई है।

वह तारों के जाल में उलझकर छटपटा रही है। वह थक गई है और साँस नहीं ले पा रही है।

आप कुछ जान-पहचान के लोगों को फोन करते हो जो scuba diving करते हैं। वे जल्द ही आपकी नाव तक आ जाते हैं। फिर आप ज़रूरी सामान लादकर तट से दूर समुद्र की ओर निकल चलते हो।

वहाँ पहुँचने पर आपको स्थिति की गंभीरता का आभास होता है।

यह एक विशालकाय मादा humpback whale है। इसके पुच्छ जाल में फँस गए हैं। जाल के तार उसके मुँह, आँख, और पूरे शरीर को अनेक स्थानों पर कसकर काट रहे हैं। उसकी त्वचा घायल हो रही है।

इन जालों से निकलने की जद्दोजहद में whale उसमें और अधिक गुत्थमगुत्था होती गई। वह पानी में लंबवत फँस गई है और साँस लेने के लिए बार-बार अपना मुँह पानी से निकालने का असफल प्रयास कर रही है।

आप अपने दोस्तों के साथ scuba diving के उपकरण fit करके पानी में उतरते हो। 15 मीटर नीचे उतरने पर आपको लगभग 22 टन वजनी whale दिखाई देती है।

आपके उसके करीब पहुँचते ही वह डर जाती है और तेज़ी से छटपटाने लगती है।

आप उसके चारों ओर तैरकर जाल का मुआयना करते हो। वह छटपटाती रहती है। इस बीच आप अपना चाकू निकालकर जाल की मुख्य डोरियों को काटते हो।

आप समुद्र के ठंडे पानी में whale के चारों ओर घूम-घूमकर जाल काटते हो — और वह अपनी बड़ी-सी आँख से आपको टकटकी लगाकर देखती रहती है। वह आपकी हर हरकत को गौर से देख रही है।

कुछ मिनटों के भीतर whale को यह समझ में आ जाता है कि आप क्या कर रहे हैं — और वह शांत हो जाती है। लेकिन वह अभी भी आपकी हर गतिविधि का मुआयना कर रही है। जाल के ढीले होने पर उसका सतह की ओर जाना आसान होता जा रहा है।

कुछ देर बाद आप और आपके साथी जाल की मुख्य डोरियों को काटकर उसके शरीर के बाकी अंगों में फँसे तारों को काटना शुरू करते हैं। यह जाल असल में केकड़ों को पकड़ने के लिए पानी में गिराए गए भारी-भरकम पिंजड़ों से जुड़ा हुआ था — जो whale को ऊपर नहीं जाने दे रहे थे।

आप चाकू से खचाक-खचाक करते हुए चारों ओर काटना जारी रखते हो। अंततः चाकू के कुछ वार से वे डोरियाँ कट जाती हैं जिन्होंने उसकी पूँछ को पिंजड़ों से फँसा रखा था। जाल के कटते ही डोरियों का गुच्छा तल की ओर गिरने लगता है — और whale पलक झपकते ही तेज़ी से चली जाती है।

अपनी नाव पर पहुँचकर आप चैन की साँस लेते हो। आप एक-दूसरे को काम सकुशल पूरा होने की बधाई देते हो।

लेकिन अभी एक अद्भुत घटना होने वाली है।

आप हिचकोले खाती नाव पर समुद्र के बीचोंबीच हो। आपने हाल में ही एक असहाय प्राणी को मरने से बचाया है।

आप अपनी नाव के चारों ओर बड़े-बड़े बुलबुले उठते देखते हो।

आप पानी में झाँककर देखने की कोशिश करते हो।

आपको गहरे पानी में कुछ नहीं दिखता।

यह समुद्र है। विशाल और अथाह।

एकाएक आपको लगता है कि पानी के अंधकार से कोई चीज़ आपकी ओर आ रही है।

पास आते-आते उसका आकार विशाल होता जा रहा है।

यह बड़ी होती जाती है।

और अधिक बड़ी।

बहुत बड़ी।

आपके बहुत करीब।

फिर इसकी गति कुछ थमती है।

यह रुक जाती है।

यह वही whale है।

22 टन वजनी यह मछली नाव के चारों ओर घूम रही है। यह नाव को ठोकर मारकर धीरे-धीरे हिलाती है।

आपको डर लगता है। आप कुछ समझ नहीं पाते।

वह नाव को हिला रही है।

बार-बार।

लगातार।

फिर वह नाव के निकट आकर स्थिर हो जाती है।

आप उसकी बड़ी-सी आँख को पानी से निकलता देखते हो। आपसे बस 1 मीटर दूर।

उसकी निगाह आप पर है।

बीच समुद्र में हिचकोले खाती नाव पर — आप पृथ्वी के सबसे बड़े प्राणियों में से एक के सामने — उसके चेहरे से केवल 1 मीटर दूर।

करोड़ों वर्ष पुरानी प्रजाति का यह विशालकाय जीव आपका अवलोकन कर रहा है।

उसकी बड़ी-सी आँख आप पर टिकी हुई है। वह आपको 20–30 सेकंड तक देखती रहती है।

इसके बाद —

वह धीरे से तैरकर आगे बढ़ती है।

अब वह आपके दोस्त के पास पहुँचकर उसके साथ भी वैसा ही करती है। वह उसकी आँखों में झाँकती है। बारी-बारी से वह आपके हर दोस्त के पास जाकर उसे कुछ देर तक देखती है — हर वह व्यक्ति जिसने पानी के भीतर उसकी मदद की।

ऐसा लगता है कि वह आपके बारे में सोच रही है।

फिर वह चली जाती है।

यह 2005 में San Francisco के तट के पास घटी घटना का वृत्तांत है। उस नौका पर सवार प्रत्येक व्यक्ति ने इस अनुभव का वर्णन किया। उस प्राणी के साथ उनका यह संवाद बहुत गहरा और किसी आध्यात्मिक अनुभव जैसा था।

इस जैसी और भी कई कहानियाँ हैं।

कोई भी जीव विचारहीन अचेतन वस्तु नहीं है।


अगर वह whale बोल सकती — तो क्या कहती?

शायद कुछ नहीं।

शायद वह पहले ही कह चुकी थी — उस एक नज़र में।


डच primatologist फ्रांस डे वाल (Frans de Waal) ने अपनी किताब “Are We Smart Enough to Know How Smart Animals Are?” में दशकों के शोध के बाद एक बात कही जो science की किताबों में पहले नहीं थी —

“Empathy — दूसरे का दर्द महसूस करने की क्षमता — केवल मनुष्यों की विशेषता नहीं है।”

उन्होंने चिंपांज़ी, हाथी, और dolphins में grief, gratitude और compassion के प्रमाण दिए। Elephants अपने मृत साथियों की हड्डियों को बरसों बाद भी पहचानते हैं और उनके पास रुककर चुप खड़े हो जाते हैं।

वह humpback whale — जिसने बारी-बारी से हर इंसान की आँखों में झाँका — वह de Waal के शोध का जीवंत प्रमाण थी।

वह आभार व्यक्त कर रही थी।

22 टन के शरीर में — उतनी ही भावना थी।


जैन दर्शन में एक अवधारणा है — “जीव”

हर प्राणी में — चींटी से लेकर whale तक — एक आत्मा है। एक चेतना। जैन परंपरा में इसीलिए किसी भी जीव को कष्ट देना महापाप है — क्योंकि वह जीव भी उतना ही अनुभव करता है जितना आप।

उस San Francisco के समुद्र में — जब whale की आँख 1 मीटर दूर से उन गोताखोरों को देख रही थी — वह जैन दर्शन का वह “जीव” था जो बिना शब्दों के कह रहा था: मैं हूँ।

और तुम भी हो।

और यह मुलाकात असली थी।


2012 की फिल्म “लाइफ ऑफ़ पाई” (Life of Pi) में एक दृश्य है।

Pi एक lifeboat में है। उसके साथ Richard Parker — एक बाघ।

कहानी के अंत में जब भूमि मिलती है — Richard Parker जंगल में चला जाता है। पलटकर नहीं देखता।

Pi रोता है।

वह नहीं चाहता था कि बाघ चला जाए — उसे पता था वह नहीं पलटेगा। लेकिन वह चाहता था कि कोई देखे। कोई acknowledge करे। कोई कहे — “हम दोनों यहाँ थे। और यह real था।”

उस San Francisco की whale ने वह किया जो Richard Parker नहीं कर सका।

वह पलटी।

उसने देखा।

उसने acknowledge किया।



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