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सच और झूठ – स्टीव जॉब्स का एक किस्सा

स्टीव जॉब्स को लोग उसके वीज़न और उद्यमशीलता के लिए बहुत-बहुत लंबे समय तक याद करते रहेंगे. कुछ लोग उसे नापसंद भी करते हैं क्योंकि निजी जीवन में वह बहुत अच्छा व्यक्ति नहीं था. एपल कंपनी के सर्वेसर्वा होने के नाते वह बहुत निर्मम बॉस था. उसके साथ काम करना बहुत कठिन था. छोटी-छोटी गलतियों पर अपने मेहनती कर्मचारियों की नौकरी खाने में उसे कोई संकोच नहीं होता था.

लेकिन जॉब्स के जीवन में और उसके काम में ऐसा कुछ था जो उसे महान औंत्रपेन्योर और बिजनेसमेन बनाता है. बेस्टसेलर किताब “रिच डैड, पुअर डैड” के लेखक गाय कावासाकी ने भी कभी स्टीव जॉब्स के साथ एपल में काम किया था. उसके साथ काम करने का एक अनुभव वे यहां बता रहे हैंः

एक दिन जॉब्स मेरे केबिन में किसी अजनबी के साथ आया. उसने उस व्यक्ति से मेरा परिचय नहीं कराया और पूछा, “नोवेयर (Knoware) कंपनी के बारे में तुम्हारी क्या राय है?”

मैंने जॉब्स को बताया कि उस कंपनी के प्रोडक्ट खराब, बोरिंग और बहुत सिंपल थे – उनमें ऐसा कुछ नहीं था जिससे एपल को कोई मतलब होता… ये कंपनी बेकार थी.

मेरी बड़बड़ सुनने के बाद जॉब्स ने कहा, “इनसे मिलो, ये हैं नोवेयर के CEO मिस्टर आर्ची मैक्गिल.”

उफ्फ्फ़… ये तुमने क्या किया स्टीव! मैंने मन में खुद से कहा.

इस घटना में खास बात क्या थी? मैंने स्टीव जॉब्स का IQ टेस्ट पास कर दिखाया. यदि मैंने उस कंपनी के बारे में अच्छी बातें कही होतीं तो जॉब्स को पता चल जाता कि मुझे कुछ पता नहीं था. एपल में वह मेरा आखिरी दिन होता.

जॉब्स के साथ काम करना बहुत कठिन था. वह अपने नीचे काम करनेवालों में ऐसी कुशलता चाहता था जो दुर्लभ होती है. यदि आप इस गेम में टॉप पर नहीं रहते तो गायब हो जाते. मुझे दूसरी जगहों पर नौकरी करने के दौरान इतना कुछ सीखने को नहीं मिला जो मैंने एपल-मैकिंटोश में सीखा.

इस अनुभव ने मुझे सिखाया कि हमें इन तीन कारणों से परिणाम की चिंता किए बिना सच बोलना चाहिए:

  • सच बोलने से हमारी बुद्धि और चरित्र की परीक्षा होती है. सच को जानने से हमारी बुद्धि और बोलने से शक्ति की पहचान होती है.

  • लोग सच जानना चाहते हैं. सिर्फ पॉज़िटिव बातें करने के लिए लोगों से उनके बेकार प्रोडक्ट की तारीफ करने पर वे उसमें सुधार नहीं कर पाएंगे.

  • केवल एक बात ही सच हो सकती है, बाकी सब झूठ होगा, इसलिए यदि आप सच बोल रहे हैं तो आपको हमेशा वही बात कहनी है, वही बात करनी है. हमारे सारे ऑप्शंस खत्म हो जाते हैं. जब हम झूठ बोलते हैं तो हमें एक ही ट्रेक पर बने रहने की जद्दोजहद करनी पड़ती है.


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2 responses to “सच और झूठ – स्टीव जॉब्स का एक किस्सा”

  1. Harshvardhan Srivastav अवतार

    आपकी इस पोस्ट को आज की बुलेटिन में शामिल किया गया है। एक बार आकर हमारा मान ज़रूर बढ़ाएं…

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