जीवन में सफलता, समृद्धि, संतुष्टि और शांति स्थापित करने के मंत्र और ज्ञान-विज्ञान की जानकारी

आप उड़ने के लिए बने हैं

एक दिन सैर करते वक्त मैंने बिजली के तार पर दो चिड़ियाँ बैठी देखीं।

वे सुस्ता रही थीं। बातें कर रही थीं।

थोड़ा चहचहाने के बाद वे फुदककर एक-दूसरे से दूर हो गईं। उन्होंने एक-दूसरे को कुछेक बार मुड़-मुड़कर देखा। फिर अचानक से उन्होंने तारों से नीचे हवा में गोता-सा लगा लिया।

अपने पंखों को खोलकर उन्होंने मज़बूत उड़ान भरी, और अपनी-अपनी दिशा को चली गईं।

चिड़ियाँ यही करती हैं। वे उड़ती हैं।

और कभी-कभार नीचे गिर जाने के खतरे के बावजूद चिड़ियाँ हर सुबह अपने आसरे से निकलकर उड़ने को तरजीह देती हैं। क्योंकि वे उड़ने के लिए ही बनी हैं।

एक बार खुली हवा में पहुँच जाने पर वे ऊपर उठती रहती हैं। आगे बढ़ती रहती हैं।

ठीक इसी तरह संसार की हर वस्तु चलायमान है। दुनिया अपनी गति से घूम रही है। जीवन एक सपना है, रोमांच है। यह किसी यात्रा की भाँति है।

और हर बार ऊँची उड़ान भरने के पहले किसी बिजली के तार से नीचे गिरते वक्त यह खतरा बना होता है कि यह गिरकर नष्ट हो जाएगा।

मशहूर motivational लेखक Tim Ferriss के प्रशिक्षक Jerzy Gregorek अक्सर यह बात कहते हैं —

“मुश्किल निर्णय लेने से ज़िंदगी आसान बनती है। आसान निर्णय लेने से ज़िंदगी मुश्किल बनती है।”

उड़ते रहना ही अगर आपके जीवन का उद्देश्य है तो भी उड़ते रहने का निश्चय करना एक कठिन निर्णय है।

यह निर्णय आपको बार-बार लेना होता है। लेकिन हर निर्णय के साथ संसार के विराट पैमाने पर जीवन सरल होता जाता है — क्योंकि आप अपने उद्देश्य से जुड़े रहते हैं।

यदि आप यह नहीं करेंगे तो क्या करेंगे? कुछ नहीं करेंगे? शिकायतें करते रहेंगे? मृत्यु की प्रतीक्षा करते रहेंगे?

हम मनुष्य भी हमेशा अपने घोंसलों में नहीं रह सकते। हमें भी उसके बाहर छलाँग लगाकर ऊँचे आसमान में उड़ना होगा। जीवन वहीं है।

बाहर निकल जाने पर जीवन बेहतर लगने लगता है। उड़ते वक्त जीवन के बेहतर होने का अहसास होता है।

आज आप जो कुछ भी कर रहे हों… भले ही आप सुस्ता रहे हों या किसी से बातें कर रहे हों या मनोरंजन कर रहे हों या काम कर रहे हों या जीवन के बहाव में उसके साथ आगे बह रहे हों… आप यह याद रखिए कि जीवन किसी भी समय आपको गोता लगवा सकता है, आपको किसी भी समय नीचे गिरने पर मजबूर कर सकता है। उस वक्त आपको सँभलने का मौका नहीं मिलेगा।

इसलिए वह समय जब आए तब घबराएँ नहीं। हिचकिचाएँ नहीं। जीवन के कठिन हो जाने का रोना नहीं रोएँ।

छलाँग लगाएँ और अपने पंखों को पसारकर उड़ान भरने की कोशिश करें।

गिर जाएँ तो धूल झाड़कर फिर आगे बढ़ चलें।

आप उम्र भर बिजली के तार पर आराम से बैठने के लिए नहीं बने।

आप उड़ने के लिए बने हैं।


वह गोता — जो सब कुछ बदल देता है

दो चिड़ियाँ तार पर बैठी थीं। सुरक्षित। स्थिर। आरामदेह।

और फिर — बिना किसी चेतावनी के — उन्होंने नीचे गोता लगाया।

वह एक पल था जिसमें न तार था, न ज़मीन। बस हवा और खुला आसमान।

उड़ान उसी गोते से शुरू होती है। उस क्षण से जब आप जाने-पहचाने तार को छोड़ देते हैं।

हम सब जानते हैं कि हमें उड़ना है। लेकिन तार की सुरक्षा छोड़ना — यही सबसे कठिन काम है।


इक़बाल — शाहीन की उड़ान

अल्लामा इक़बाल ने शाहीन (बाज) को अपनी कविता का सबसे प्रिय प्रतीक बनाया। वे बार-बार लिखते थे —

“तू शाहीन है, परवाज़ है काम तेरा, तेरे सामने आसमाँ और भी हैं।”

इक़बाल के लिए शाहीन वह आत्मा थी जो ऊँचाइयों के लिए बनी है — जो पहाड़ों की चोटियों पर रहती है, जो मेहनत से शिकार करती है, जो किसी के दिए पर नहीं — अपनी उड़ान पर जीती है।

बिजली के तार पर बैठी वे दो चिड़ियाँ भी उसी शाहीन की भाँति थीं — जो जानती थीं कि तार उनकी नियति नहीं, बस एक पड़ाव है।


Anais Nin — जब तक दर्द इतना बड़ा न हो जाए

फ्रांसीसी-अमेरिकी लेखिका Anaïs Nin ने एक बात लिखी थी जो आज भी दुनियाभर में share की जाती है —

“और एक दिन वह जोखिम जो वह ले नहीं सकती थी — उसे उठाना उस दर्द से कम दर्दनाक लगने लगा जो उस जोखिम को न उठाने से हो रहा था।”

यही वह क्षण है जब चिड़िया तार छोड़ती है। जब घोंसले की तंगी उड़ान के डर से बड़ी लगने लगती है। जब रुकने का दर्द उड़ने के डर से अधिक हो जाता है।


Wright Brothers — जिन्होंने खुद ही छलाँग लगाई

1903 में Orville और Wilbur Wright के पास न पैसा था, न सरकारी मदद, न किसी बड़े संस्थान का समर्थन। वे एक छोटी-सी bicycle की दुकान चलाते थे।

लेकिन उन्होंने तय किया कि इंसान उड़ सकता है।

जब 17 दिसम्बर 1903 को Kitty Hawk में Orville Wright ने पहली बार उड़ान भरी — वह 12 सेकंड और 37 मीटर की थी। इतनी छोटी उड़ान कि आज के एक हवाई जहाज़ से छोटी।

लेकिन उस 12 सेकंड के गोते ने दुनिया बदल दी।

पहली उड़ान हमेशा छोटी होती है। गोता लगाना ज़रूरी है।


“The Jump” — हर महान यात्रा की शुरुआत

दुनिया के हर महान काम की शुरुआत एक छलाँग से हुई है।

स्टीव जॉब्स ने 1985 में Apple से निकाले जाने के बाद NeXT और Pixar बनाए — और दस साल बाद उसी Apple को बचाने लौटे।

J.K. Rowling ने तलाक, अवसाद और गरीबी में Harry Potter लिखी — और उसे 12 publishers ने reject किया।

अब्राहम लिंकन ने कई चुनाव हारे, व्यवसाय में असफल रहे — और अमेरिका के सबसे महान राष्ट्रपति बने।

हर बार — एक गोता। हर बार — पंख पसारना। हर बार — उड़ान।


मिर्ज़ा ग़ालिब — उड़ान से पहले का डर

ग़ालिब ने लिखा था —

“हज़ारों साल नरगिस अपनी बेनूरी पे रोती है, बड़ी मुश्किल से होता है चमन में दीदावर पैदा।”

यानी — हज़ारों साल की तड़प के बाद एक ऐसी आँख जन्म लेती है जो देख सके। वह तड़प व्यर्थ नहीं जाती।

बिजली के तार पर बैठे रहने की तड़प — उड़ने की तैयारी है।


फिल्म “Queen” — एक अकेली उड़ान

“Queen” (2014) में Kangana Ranaut का किरदार रानी — शादी टूटने के बाद अकेले honeymoon पर निकल जाती है। पहले डर, फिर हिचकिचाहट, फिर — छलाँग।

और उस अकेली यात्रा में वह खुद को खोज लेती है।

यही है वह गोता। जो अकेले लगाना होता है। जो किसी और के लिए नहीं — खुद के लिए होता है।


तार और उड़ान — दोनों ज़रूरी हैं

यहाँ एक बात और —

चिड़ियाँ तार पर बैठती हैं। सुस्ताती हैं। यह भी ज़रूरी है।

उड़ान और विश्राम — दोनों जीवन के हिस्से हैं। Gregorek का वाक्य सच है — मुश्किल निर्णय ज़िंदगी आसान बनाते हैं। लेकिन इसका अर्थ यह नहीं कि हम कभी रुकें ही नहीं।

रुकना — ताकि उड़ सकें। उड़ना — ताकि जी सकें।

और जब समय आए — बिना हिचकिचाहट के गोता लगा दें।


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