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रस्सी : The Rope

ropeएक सूफी रहस्यवादी ने मुल्ला नसरुद्दीन और उसके एक शागिर्द का रास्ता रोक लिया. यह जांचने के लिए कि मुल्ला के भीतर आत्मिक जागृति हो चुकी है या नहीं, सूफी ने अपनी उंगली उठाकर आसमान की ओर इशारा किया.

इस इशारे से सूफी यह प्रदर्शित करना चाहता था कि ‘एक ही सत्य ने सम्पूर्ण जगत को आवृत कर रखा है’.

मुल्ला का शागिर्द आम आदमी था. वह सूफी के इस संकेत को समझ नहीं सका. उसने सोचा – “यह आदमी पागल है. मुल्ला को होशियार रहना चाहिए”.

सूफी का यह इशारा देखकर मुल्ला ने अपने झोले से रस्सी का एक गुच्छा निकाला और शागिर्द को दे दिया.

शागिर्द ने सोचा – “मुल्ला वाकई समझदार है. अगर पागल सूफी हमपर हमला करेगा तो हम उसे इस रस्सी से बाँध देंगे”.

सूफी ने जब मुल्ला को रस्सी निकालते देखा तो वह समझ गया कि मुल्ला कहना चाहता है कि ‘मनुष्य की क्षुद्र बुद्धि सत्य को बाँध कर रखने का प्रयास करती है जो आकाश पर रस्सी लगाकर चढ़ने के समान ही व्यर्थ और असंभव है’.

 (~_~)

A Sufi mystic stopped Nasruddin in the street. In order to test whether Nasruddin was sensitive to inner knowledge, he made a sign pointing to the sky. The Sufi meant, “There is only one truth, which covers all.”Nasrudin’s companion, an ordinary man, thought: “The Sufi is mad. I wonder what precautions Nasruddin will take?” Nasrudin looked in a knapsack and took out a coil of rope. This he handed to his companion. “Excellent,” thought the companion, “we will bind him up if he becomes violent.”

The Sufi saw that Nasruddin meant: “Ordinary humanity tries to find truth by methods as unsuitable as attempting to climb into the sky with a rope.”


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8 responses to “रस्सी : The Rope”

  1. राहुल सिंह अवतार

    मौन की अभिव्‍यक्ति, गूंगे का गुड़.

  2. प्रवीण पाण्डेय अवतार
    प्रवीण पाण्डेय

    अहा, बस यही।

  3. संतोष त्रिवेदी अवतार

    जो उसके लिए अँधेरा है,
    मेरे लिए उजाला
    अपनी-अपनी नज़रें हैं
    पहचाने देखनेवाला !

  4. Arun Sathi अवतार

    आज यही हल है
    सटीक..

  5. Hindi Sahitya अवतार

    सच के बारे में एक और सच !!!

  6. rafat alam अवतार
    rafat alam

    निशांत जी …मनुष्य की क्षुद्र बुद्धि सत्य को बाँध कर रखने का प्रयास करती है जो आकाश पर रस्सी लगाकर चढ़ने के समान ही व्यर्थ और असंभव है.सच में तो एक बिंदी भी कोई जोड़ घटा नहीं सकता पर झूंठ कितना चाहो बढ़ाई जा सकती है कोई अंत ही नहीं झूट का .

  7. AMITA NEERAV अवतार

    सही है, जहाँ बुद्धि की हद खत्म होती है, वहीं से सत्य की तरफ जाने वाली राह खुलती है।

  8. nirmla.kapila अवतार

    बुद्धि शायत कई अलामतों की जड है। आपको सपरिवार नये साल की हार्दिक शुभकामनायें।

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