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इकिगाई

Ikigai — सुबह उठने का कारण

जापानियों के अनुसार हर व्यक्ति की एक इकिगाई (ikigai) होती है. इकिगाई शब्द का जापानी भाषा में अर्थ है ‘सुबह उठने का कारण’. इसे जीवन का उद्देश्य या जीवन का आनंद लेने का कारण भी कहा जाता है.

नीचे दिए गए डाइग्राम को देखिए. इसके भीतर दिए गए डीटेल्स अंग्रेजी में हैं लेकिन आपको समझने में दिक्कत नहीं होगी. यहां यह बताया गया है कि किन शर्तों के पूरा होने पर हमें क्या मिलता है (और क्या नहीं मिलता):

Ikigai A JAPANESE CONCEPT MEANING “A REASON FOR BEING” Ikigai What you LOVE What you are GOOD AT What the world NEEDS What you can be PAID FOR PASSION MISSION PROFESSION VOCATION Satisfaction, but feeling of uselessness Delight and fullness, but no wealth Comfortable, but feeling of emptiness Excitement and complacency, but sense of uncertainty

“कभी किसी को मुकम्मल जहाँ नहीं मिलता, कहीं ज़मीं तो कहीं आसमाँ नहीं मिलता।”

ग़ज़ल की यह लाइन आज बहुत-से professionals के जीवन की स्थिति पर खरी उतरती है। लोगों के जीवन का कोई-न-कोई पक्ष ऐसा रह जाता है जिसे लेकर वे खुश नहीं होते। यदि नौकरी में पैसा अच्छा-खासा मिल रहा होता है तो वे काम को पसंद नहीं करते। यदि मनचाहा काम करते हैं तो पैसे की तंगी से जूझते हैं। यदि काम और पैसा दोनों ही मनचाहा होता है तो अपने लिए और परिवार के लिए वक्त नहीं मिलता। यदि सब कुछ मिलता है तो भीतर दबी किसी चाह को पूरा न कर पाने की कसक दिल में बनी रहती है।

इकिगाई वह passion है जिसके लिए लोग आने वाली हर सुबह जागकर चाहे-अनचाहे अपने काम में लग जाते हैं।

एक-दूसरे को काटते वृत्तों के बीच का क्षेत्र आपकी इकिगाई है। यदि आपके जीवन में इन वृत्तों के भीतर लिखी गई चीज़ों की कमी है तो आप जीवन को उसकी पूर्णता में नहीं जी पा रहे हैं। इतना ही नहीं, इस कमी का आपके लम्बे और खुशहाल जीवन व्यतीत करने की कामना पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है।

किसी भी चीज़ को इकिगाई होने के लिए उसमें ये चार बातें अनिवार्य रूप से होनी चाहिए —

प्रेम
जिससे आप प्रेम करते हैं।
प्रवीणता
जिसे करने में आप प्रवीण हैं।
ज़रूरत
जिसकी दुनिया को ज़रूरत है।
अर्थ
जिससे आप पैसा कमा सकते हैं।

तो आपके मामले में जो activity ऊपर दी गई चारों शर्तों को पूरा करती हो — उसे आप अपनी इकिगाई कह सकते हैं। मैं अपने बारे में कहूँ तो translation और blogging मेरी इकिगाई है — और यह चारों शर्तों को पूरा करती है।

बहुतों को लगता है कि अपने passion की खोज करने का विचार पश्चिमी देशों से आया है — लेकिन यह बात सही नहीं है। इकिगाई एक जापानी शब्द है और अन्य संस्कृतियों में भी इससे मिलते-जुलते विचार सदियों से उपलब्ध हैं।

तो क्या आपने अपनी इकिगाई खोज ली है?

आप वह कौन-सा काम करने जा रहे हैं जिसे आप करना पसंद करते हैं? क्या यह ऐसा काम है जिसकी दुनिया को ज़रूरत है? क्या यह ऐसा काम है जिसमें आप expert हैं? और क्या यह ऐसा काम है जिससे आप पैसा कमा सकते हैं?

अब कुछ tips जिनसे अपनी इकिगाई को पहचानने और follow करने में मदद मिलेगी —

वह उद्देश्य खोजिए जिसमें आप गहराई से यकीन करते हों।

लोग अपना passion या इकिगाई कई तरह से खोज सकते हैं — जीवन को बदल देने वाले अच्छे-बुरे अनुभव, गहन आंतरिक विचार-विमर्श, या जीवन की दिशा को बदल देने वाली किसी घटना का अचानक हो जाना। अपने उद्देश्य को खोजने की शुरुआत खुद से एक प्रश्न पूछकर करें — “मैं इस दुनिया में कौन-सा परिवर्तन देखना चाहता हूँ?”

सोचना बंद कीजिए और काम करना शुरू कीजिए।

अपने passion को follow करने की कोई उम्र नहीं होती। Mark Zuckerberg ने Facebook 19 वर्ष की अवस्था में बनाया, दूसरी ओर Charles Flint ने IBM तब बनाया जब वे 61 वर्ष के हो चुके थे। यदि आपके कई passions हैं तो उनकी list में कटौती करके अपने top 2 passions तक ले आएँ। फिर पूरे मन से उन्हें follow करें और यह निर्णय करें कि आप अंततः क्या करना चाहते हैं।

आपके जैसा passion रखने वालों के सम्पर्क में रहें।

उन व्यक्तियों के सम्पर्क में रहें जिनके passion और रुचियाँ आप जैसी हैं। उनकी गलतियों से सीखें और वे आपकी गलतियों के बारे में बताएँ। एक जैसे passion को follow करने वाले जब साथ में काम करते हैं तो उनमें स्वस्थ प्रतिस्पर्धा होती है।

राह में लगने वाली ठोकरों से विचलित न हों।

जब व्यक्ति अपने दिल की सुनकर अपनी इकिगाई को follow करता है तो अनजानी राहों पर ठोकरें भी लगती हैं। Alibaba के founder Jack Ma के साथ यह सब हो चुका था — वह कई बार गिरे और हर बार धूल झाड़कर फिर चलने लगे। इसके सिवाय और कौन-सा विकल्प हो सकता था?

अपनी इकिगाई की पहचान कीजिए। इसे follow करना ही नहीं — बल्कि इसकी खोज करना भी आत्मविकास की दिशा में आपके जीवन की सबसे महत्वपूर्ण यात्रा हो सकती है। यह यात्रा चुनौतियों और कंटकों से भरी होगी। आपके मार्ग में उतार-चढ़ाव और खराब मौसम आते-जाते रहेंगे। आपको मन में विश्वास बनाए रखना है — और यह भी जान लेना है कि बड़ी यात्राएँ एक रात में पूरी नहीं होतीं।

आपको उठना है, चलना है, और मंज़िल तक पहुँचे बिना रुकना नहीं है।

Okinawa का रहस्य — इकिगाई और 100 साल की उम्र

जापान के Okinawa द्वीप में दुनिया के सबसे अधिक शतायु लोग रहते हैं। Dan Buettner ने अपनी पुस्तक “Blue Zones” में पाँच ऐसे स्थानों का अध्ययन किया जहाँ लोग असाधारण रूप से लम्बा जीवन जीते हैं — Okinawa उनमें से एक है।

शोधकर्ताओं ने जब वहाँ के बुज़ुर्गों से दीर्घायु का रहस्य पूछा तो अधिकांश ने एक ही बात कही — “मुझे हर सुबह उठने का कारण पता है।”

102 वर्ष के एक मछुआरे की इकिगाई थी — अपने परिवार को ताज़ी मछली खिलाना। 97 वर्ष की एक महिला की इकिगाई थी — अपनी पोती को बड़ा होते देखना।

जीने का कारण — जीवन को लम्बा बनाता है। यह अब केवल दर्शन नहीं, विज्ञान है।

चार पुरुषार्थ — भारत की अपनी इकिगाई

इकिगाई पश्चिम से नहीं आई — और न ही यह विचार जापान की खोज है। भारतीय दर्शन में हज़ारों वर्ष पहले जीवन के चार पुरुषार्थ निर्धारित किए गए थे —

धर्म
अपने स्वभाव और कर्तव्य के अनुसार जीना।
अर्थ
जीवन के लिए आवश्यक धन और संसाधन।
काम
जो करने में आनंद आए।
मोक्ष
वह उद्देश्य जो स्वयं से परे हो।

इकिगाई के चार वृत्त और ये चार पुरुषार्थ — एक ही सत्य को दो अलग भाषाओं में कह रहे हैं। हज़ारों वर्ष पहले भारतीय ऋषियों ने वही पूछा था जो आज जापान से सीखकर आधुनिक दुनिया पूछ रही है।

रवींद्रनाथ टैगोर — जिनकी इकिगाई कभी नहीं बदली

रवींद्रनाथ टैगोर ने 8 वर्ष की उम्र में कविता लिखनी शुरू की। 80 वर्ष की आयु में, अपनी मृत्यु के कुछ समय पहले, उन्होंने अपनी आखिरी कविताएँ लिखीं — जो उनकी सर्वश्रेष्ठ रचनाओं में मानी जाती हैं।

उन्होंने कभी नहीं पूछा — “क्या यह व्यावहारिक है?” वे बस लिखते रहे। और दुनिया ने उन्हें Nobel Prize दिया।

जिसे आप सबसे अधिक प्रेम करते हैं, जिसे आप सबसे अच्छे से जानते हैं — उसमें ही आपकी इकिगाई छुपी है।

फिल्म “Swades” — एक engineer की इकिगाई

“Swades” (2004) में Shah Rukh Khan का किरदार Mohan Bhargava — NASA का एक successful scientist — भारत के एक छोटे गाँव में आता है और वहाँ बिजली की ज़रूरत देखता है।

वह वापस जा सकता था। अमेरिका में करियर था, पैसा था, सुविधाएँ थीं।

लेकिन उसे अपनी इकिगाई मिल गई — “जो मैं कर सकता हूँ, जिसकी यहाँ ज़रूरत है, और जो मुझे सार्थक लगता है।”

वह रुक गया।

इकिगाई हमेशा पैसे में नहीं होती। कभी-कभी वह सेवा में होती है।

? ? ? तीन ज़रूरी सवाल

यदि मुझे अपना passion पता ही नहीं है तो इकिगाई कैसे खोजूँ?

Passion खोजा नहीं जाता — बनाया जाता है। Cal Newport अपनी पुस्तक “So Good They Can’t Ignore You” में कहते हैं कि passion किसी काम को इतना अच्छे से करने से जागता है कि लोग आपकी तारीफ करने लगें। वह एक काम खोजिए जो आप किसी से थोड़ा बेहतर कर सकते हैं — उसे और बेहतर करते जाइए। Passion अपने आप जाग उठेगा।

क्या इकिगाई केवल career तक सीमित है?

बिल्कुल नहीं। Okinawa के वे बुज़ुर्ग जो 100 साल जीते हैं — उनकी इकिगाई बागवानी करना, पड़ोसियों से मिलना, बच्चों को पढ़ाना है। इकिगाई किसी बड़े करियर का नाम नहीं — यह उस छोटी-सी चीज़ का नाम है जो आपको हर सुबह उठने का कारण देती है।

यदि इकिगाई के चारों वृत्त कभी मेल न खाएँ तो?

यह आदर्श स्थिति है जो हर किसी को नहीं मिलती। लेकिन जितने वृत्त मिलें — उतना बेहतर। यदि आप वह काम करते हैं जिसे पसंद करते हैं और जो दुनिया के काम आए — भले ही उससे बहुत पैसा न मिले — तब भी जीवन में एक गहरी तृप्ति होती है। पूर्णता की ओर यात्रा ही इकिगाई है, पूर्णता नहीं।


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