इंटरनेट पर घूम रही बहुत सी बैसिर-पैर की बातों को लोग फेसबुक और वॉट्सअप के जरिए फैलाते रहते हैं. मुझे मां की महिमा बतानेवाला एक फोटो हर जगह घूमता दिखा जिसमें बताया जा रहा है कि “मानव शरीर 45 डेल (यूनिट) तक दर्द सह सकता है जबकि बच्चे को जन्म देते वक्त मां को 57 डेल (यूनिट) तक का दर्द होता है. यह दर्द इतना अधिक है जैसे किसी व्यक्ति की 20 हड़्डियां एक साथ टूट रही हों”.

ऊपर दिए गए फोटो जैसे कई फोटो इंटरनेट पर मिल जाते हैं जिनमें बहुत से मनगढंत दावे किए जाते हैं.

सच क्या है?

यदि मानव शरीर केवल 45 डेल यूनिट तक का का दर्द सहन कर सकता है तो उससे अधिक दर्द सहन कर सकना असंभव होना चाहिए, अर्थात 45 डेल का दावा सही प्रतीत नहीं होता. यदि बच्चे को जन्म देते समय मां को 57 डेल का दर्द अनुभव होता है तो किसी भी व्यक्ति के लिए उस दर्द को झेल पाना असंभव होना चाहिए. थोड़ा सा कॉमन सेंस लगाने पर ही हम समझ सकते हैं कि यह बात कितनी बेतुकी है.

दर्द की तीव्रता को बताने वाली डेल जैसी कोई यूनिट नहीं है. न केवल दर्द को बल्कि मानव शरीर को होनेवाली किसी भी अनुभूति को किसी भी तरह से नापा नहीं जा सकता. वैज्ञानिक जगत में कोई भी डेल जैसी किसी यूनिट के बारे में नहीं जानता. आश्चर्य है कि लोग अपनी बातों को सच साबित करने के लिए किसी भी सीमा तक जाकर उन्हें तथ्य का जामा पहनाने लगते हैं.

जैसा कि पहले बताया जा चुका है, दर्द को नापना संभव नहीं है, तो यह कैसे बताया जा सकता है कि बच्चे को जन्म देते समय किसी मां को कितना दर्द होता है? बच्चे को जन्म देते वक्त मां को होने वाला दर्द पूरी तरह से एक निजी अनुभव है. हर महिला इसे अलग-अलग तरह से वर्णित करती है. यह ज़रूरी भी नहीं है कि हर महिला इसे निगेटिवली ही ले. कुछ महिलाओं को इस दर्द में भी एक खुशी का अहसास होता है.

हमें यह भी जानना चाहिए कि जन्म लेने वाले हर बच्चे का आकार और वजन एक सा नहीं होता. बच्चा जिस मार्ग से होकर बाहर निकलता है उसका आकार भी अलग-अलग होता है. कुछ स्त्रियां खड़ी अवस्था में तो कुछ बैठकर या लेटकर प्रसव करती हैं. इस प्रकार ऐसे बहुत से फैक्टर्स होते हैं जो किसी भी प्रसव को सरल या कठिन बना सकते हैं और हर मां को हर बार 57 डेल जैसा कोई दर्द होने की कोई संभावना नहीं है. जिस स्त्री ने कई बार बच्चों को जन्म दिया हो वह बता सकती है कि उसके किस बच्चे के जन्म के समय कितना दर्द हुआ था.

इसी के साथ ही हम बच्चे को जन्म देते समय होनेवाले दर्द की तुलना किसी अन्य तरह के दर्द से भी नहीं कर सकते. दुनिया का कोई भी व्यक्ति यह नहीं बता सकता कि कितनी हड्डियों के टूटने पर कितना दर्द होता है.

इस पोस्ट में बताया गया है कि अन्य मादा स्तनधारियों की तुलना में स्त्रियों को बच्चे को जन्म देते समय अधिक दर्द क्यों होता है. (featured image courtesy)


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