कभी एक आदमी बहुतेरी मुसीबतों से घिरा हुआ था. उसने एक दिन शुद्ध मन से यह प्रतिज्ञा करी कि यदि उसे मुसीबतों से निजात मिल जायेगी तो वह अपना घर बेचकर सारा पैसा गरीबों में बाँट देगा.
देर-सबेर उस आदमी की मुसीबतें टल गईं और उसे अपनी प्रतिज्ञा का स्मरण हो आया. अच्छे दिन लौट आने के बाद अब उसका दिल इस बात की इज़ाज़त नहीं दे रहा था कि वह अपनी सारी दौलत दान में दे दे. कुछ सोचने के बाद उसे एक उपाय सूझ गया.
उसने घर के सामने इश्तिहार लगा दिया. उसमें लिखा था कि घर की कीमत सिर्फ पांच मोहरें थी. लेकिन घर के साथ एक बिल्ली को खरीदना ज़रूरी था जिसकी कीमत उसने दस हज़ार अशर्फियाँ रखी थी.
एक मालदार शख्स ने घर और बिल्ली दोनों को खरीद लिया. आदमी ने पांच मोहरें गरीबों में बाँट दीं और दस हज़ार अशर्फियों से नया घर खरीद लिया.
(इदरीस शाह की कहानी)










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