ल्यूइस टरमैन (Lewis Terman) ने वर्ष 1916 में IQ की मूल अवधारणा को जन्म दिया जिसके अंतर्गत IQ की विभिन्न श्रेणियां बनाई गई हैं, जैसेः

  • 140 से ऊपर IQ वाला व्यक्ति जीनियस या जीनियस जैसा होता है
  • 120 से 140 IQ वाला व्यक्ति अत्यधिक बुद्धिमान माना जाता है
  • 110 से 119 IQ वाला व्यक्ति बहुत बुद्धिमान माना जाता है, और
  • 90 से 109 IQ वाला व्यक्ति औसत या सामान्य बुद्धिमान माना जाता है

टेड कैजिंस्की (Ted Kaczynski) का IQ मान 167 था. वह बचपन से ही विलक्षण बुद्धिसंपन्न था और 16 वर्ष की अवस्था में ही हार्वर्ड विश्वविद्यालय चला गया. मिशिगन विश्वविद्यालय से PhD करने के बाद उसे बर्कली, कैलीफोर्निया विश्वविद्यालय में असिस्टेंट प्रोफेसर का काम मिल गया.

फिर एक दिन अचानक पता नहीं क्या हुआ कि टेड जंगल में पानी और बिजली के बिना एक केबिन में रहने लगा और उसने प्रकृति के साथ कम-से-कम में गुज़ारा करते हुए जीना सीख लिया. वह आधुनिक तकनीकों का विरोध करने लगा और लोगों का ध्यान आकर्षित करने के लिए बम बनाने लगा. उसने पार्सल से कुछ लोगों को बम भेजकर घायल कर दिया और यह कहा कि वह आतंक का रास्ता तभी छोड़ेगा जब न्यू यॉर्क टाइम्स और वाशिंगटन पोस्ट उसके ‘घोषणापत्र’ को प्रकाशित करेंगे. उसे बाद में उसके खुफिया केबिन से गोला-बारूद के साथ गिरफ्तार कर लिया गया. उस पर तीन व्यक्तियों की हत्या और 23 को घायल करने का अभियोग लगा.

तो आपने देखा कि बचपन से ही विलक्षण बुद्धिसंपन्न 167 IQ वाला व्यक्ति भी सीरियल किलर हो सकता है. किसी भी व्यक्ति के अपराधी बनने का उसके IQ से कोई संबंध नहीं होता. इसी प्रकार यह भी ज़रूरी नहीं है कि बहुत ऊंचे IQ वाला व्यक्ति अपने जीवन और क्षेत्र में भी बहुत सफल हो. हर IQ मानक वाले व्यक्ति नैतिक और अपराधी हो सकते हैं. कुछ बहुत कुशाग्र बुद्धि वाले व्यक्ति भी कभी-कभी छोटे-मोटे अपराध (जैसे किसी दुकान से मौका पाकर कोई सामान चुरा लेना) करते पाए गए हैं. अपने बचपन में भी अधिकांश व्यक्तियों ने इस प्रकार की गलतियां की होती हैं. बहुत ऊंचे IQ वाले व्यक्ति भी घातक मादक पदार्थों का सेवन करते पाए गए हैं जबकि उन्हें इससे होने वाले नुकसान का भली-भांति ज्ञान होता है.

हम में से बहुतों को यह लगता है कि बहुत अधिक बुद्धिमान होने पर व्यक्ति को आदर्श चरित्र की तरह होना चाहिए. हम यह मानते हैं कि ऐसे व्यक्ति का जीवन तार्किक सिद्धातों के द्वारा शासित होना चाहिए, लेकिन ऐसा नहीं होता. ऐसे अनेक कारण हैं जिनसे व्यक्ति स्वयं को नष्ट कर देने के मार्ग पर चलने लगता है. इस सब कारणों में से “मुझे पता नहीं था कि इससे मेरा इतना अहित होगा” वाला कारण लिस्ट में बहुत नीचे होता है. आप अपने बारे में ही सोचिए… आपको पता है कि आपके लिए क्या सेहतमंद है और क्या नुकसानदेह है… फिर भी आप स्वाद के लालच में हानिकारक भोजन करते हैं, सिगरेट पीते हैं, और एक्सरसाइज़ करने के बजाए टीवी देखना पसंद करते हैं.

खैर… यदि आपको रूचि और धैर्य हो तो आप टेड के घोषणापत्र को यहां पढ़ सकते हैं. पूरा घोषणापत्र 35,000 शब्द का है.


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