रेगिस्तान में एक फकीर भूखा-प्यासा, थका-मांदा ठोकरें खा रहा था. किस्मत से उसे रसीले फलों से लदा हुआ एक बड़ा छायादार पेड़ मिल गया. पेड़ के नीचे एक महीन जलधारा भी फूट रही थी.
फकीर ने रसीले फल खाए, शीतल जल पिया और ठंडी छाँव में विश्राम किया.
वहां से चलने से पहले फकीर ने उस पेड़ से पूछा – “ऐ प्यारे पेड़, मैं तुझे क्या आशीर्वाद दूं?”
“क्या मैं यह कहूं कि तेरे फल बहुत मीठे हों? वे तो पहले से ही बहुत मीठे हैं!”
“क्या मैं यह कहूँ कि तेरी छाँव बहुत घनी हो? वह तो बहुत घनी और शीतल है!”
“क्या मैं यह कहूँ कि तुझे भरपूर पानी मिले? पानी का सोता तो तेरी जड़ों के पास ही फूट रहा है!”
“तुझे तो मैं एक ही आशीर्वाद दे सकता हूँ, प्यारे पेड़, कि तेरे बीजों से पनपनेवाले सारे पेड़ तुझ जैसे ही हों!”
(पाउलो कोएलो के ब्लॉग से – From the blog of Paulo Coelho)
(~_~) Photo by Katya Austin on Unsplash











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