एक काम करिए।

अभी नहीं — पढ़ने के बाद। किचन में जाइए और कोई पुरानी चीज़ सूँघिए। माँ के हाथ का अचार। दादी के घर की वह मिट्टी। कोई पुरानी किताब। बरसात की पहली बूँद।

देखिए क्या होता है।


मेमोरी हमारे brain में neurons को जोड़ने वाले synaptic connections में होने वाले रासायनिक परिवर्तनों के रूप में store होती है। मनुष्य के brain में 100 trillion से भी अधिक synapses (neurons के जोड़) होते हैं और हर memory हज़ारों-लाखों synapses में होने वाले रासायनिक परिवर्तनों के रूप में store होती है। इस तरह यह कहा जा सकता है कि हमारी हर memory वास्तव में हज़ारों synapses से संबंधित होकर पूरे brain में distributed होती है — और हर synapse संभवतः हज़ारों memories से संबंधित होता है।

यदि कोई memory एक दिन से भी अधिक समय तक बनी रहती है तो यह brain के हज़ारों synapses में हो चुके स्थायी परिवर्तनों के रूप में store हो जाती है। अब यह सवाल उठता है कि यह memory कितने समय तक recall की जा सकती है? और यदि इसे recall करना संभव न हो — तो भी क्या यह brain में मौजूद रहती है?

Episodic memory — यह अतीत में घट चुकी घटनाओं की memory होती है जिसे neuroscience अभी तक अच्छे से नहीं समझ सका है। ऐसा माना जाता है कि यह केवल मनुष्यों में ही मौजूद होती है और मनुष्यों में इसके neural mechanism को समझने के लिए किए जाने वाले प्रयोग logistical और नैतिक कारणों से व्यवहार्य नहीं हैं।

Nature पत्रिका में वर्ष 2005 में छपी एक आश्चर्यजनक research में मिर्गी से पीड़ित मरीजों के उपचार के लिए की जाने वाली surgery में episodic memory के क्षेत्र (hippocampus) में individual neurons की गतिविधियों के बारे में बताया गया था। एक मरीज में उन्होंने देखा कि एक neuron Bill Clinton की फोटो के लिए प्रतिक्रिया दे रहा था जबकि दूसरा अभिनेत्री Jennifer Aniston की फोटो के लिए। Jennifer Aniston के लिए प्रतिक्रिया देने वाला neuron केवल उसी फोटो के लिए प्रतिक्रिया दे रहा था जिसमें Jennifer Aniston अकेली थी। Brad Pitt के साथ उसकी फोटो के लिए neuron ने कोई प्रतिक्रिया नहीं दी।

ऐसा नहीं है कि Jennifer Aniston की memory के लिए एक अकेला neuron ज़िम्मेदार था। वास्तव में Friends serial बहुत अधिक देखने वाले मरीजों के जीवन में Jennifer Aniston इतनी गहराई तक शामिल थी कि लाखों-करोड़ों neurons ने मिलकर उसके व्यक्तित्व के अलग-अलग पक्षों को store किया था — जिनमें से कम-से-कम एक अकेला neuron ऐसा था जो किसी फोटो में उसकी अकेली छवि की memory के लिए समर्पित था।

जीवन की घटनाओं की memory के recall होने की प्रक्रिया का संबंध उस memory की बहाली या पुनःप्राप्ति नहीं — बल्कि उसके पुनःनिर्माण से होता है। Memory समय के साथ कुंद हो जाती हैं या मिट जाती हैं। एक जैसी कई memories जुड़कर एक memory बन जाती हैं और एक-दूसरे से संबंधित memories के गुच्छे वर्तमान से अलग-थलग पड़ गए द्वीपों की तरह खो जाते हैं।

Memories के ऐसे द्वीप भुला दिए गए प्रतीत होते हैं — लेकिन किसी दिन अचानक ही कोई चीज़ इन द्वीपों को जोड़ देती है और वे एकदम-से तरोताज़ा हो जाते हैं।

महान फ्रांसीसी लेखक मार्सेल प्रूस्त (Marcel Proust) ने इसके बारे में लिखा था कि एक दिन madeleine बिस्कुट का एक टुकड़ा मुँह में रखते ही उनके बचपन की भुला दी गई अनेक बातें पूरी तरह से जीवंत होकर उनके मनमानस पर छा गई थीं।

जीवन की हर महत्वपूर्ण घटना brain को बदल देती है — भले ही उस घटना की memory को recall करना संभव नहीं हो। ये बदलाव बाद में नए आकार में ढलते हैं और इतनी बार नए सिरे से arrange होते हैं कि मूलभूत अनुभव की विश्वसनीय रूप से पुनःरचना नहीं की जा सकती।

भूली हुई memory के टुकड़ों की खोजबीन करने के काम की तुलना किसी पुरातत्वविद के काम से की जा सकती है जो यूनान के प्राचीन नगर ट्रॉय (Troy) का नक्शा बनाने की कोशिश कर रहा हो। ट्रॉय का नगर अनेक शताब्दियों तक बनता-बिगड़ता रहा। बहुत सारी खुदाई और अपनी कल्पनाशक्ति का प्रयोग करके पुरातत्वविद ट्रॉय नगर के अतीत के पक्षों का पुनःनिर्माण करने में सक्षम होता है। लेकिन यह भी संभव है कि ज़मीन के नीचे दबे ट्रॉय के अवशेष इतने बिगड़ चुके हों कि उन्हें जोड़कर पुरानी शक्ल में लाने की कोशिश करने पर कोई दूसरी ही चीज़ बन जाए।

Brain के मामले में “भूली हुई” चीज़ें हज़ारों neuroreceptor अणु होते हैं जो brain के विशाल synaptic network में छितरे हुए होते हैं — जो यदि अतीत की वह घटना नहीं घटी होती तो वहाँ नहीं होते। किसी खास memory को recover करने की brain की योग्यता पूरी तरह से विलुप्त हो सकती है — या वह तब तक प्रसुप्त हो सकती है जब तक कि ऐसा कोई सही अनुभव या घटना नहीं घटे जो ऐसा सधा हुआ आंतरिक signal pattern बनाए जो उस भूली हुई memory के pattern से मिलता-जुलता हो। उस स्थिति में वह भूली हुई memory फिर से बनकर सतह पर उभर आती है।


महादेवी वर्मा (Mahadevi Varma) — हिंदी की महान कवयित्री और छायावाद की स्तंभ — ने “स्मृति की रेखाएँ” नाम से एक संस्मरण-संग्रह लिखा। उसमें उन्होंने उन लोगों को याद किया जो उनके जीवन में आए और चले गए — एक गिलहरी, एक हिरन, एक अंधा भिखारी।

वे उन्हें याद नहीं कर रही थीं जैसे कोई archive खोलता है। वे उन्हें महसूस कर रही थीं — जैसे कोई घाव अभी भी ताज़ा हो।

यही है episodic memory का काव्यात्मक सत्य।

जो चला गया — वह brain में कहीं है। सोया हुआ। किसी गंध की, किसी आवाज़ की, किसी स्पर्श की प्रतीक्षा में।


British neurologist Oliver Sacks (ऑलिवर सैक्स) ने अपनी किताब “The Man Who Mistook His Wife for a Hat” में ऐसे रोगियों के किस्से दर्ज किए जिनकी memories अजीब तरह से टूट गई थीं। एक मरीज़ अपनी पत्नी का चेहरा नहीं पहचान सकता था — लेकिन उसकी आवाज़ सुनते ही पहचान जाता था।

उसकी visual memory गई थी — लेकिन auditory memory बची थी।

यह इस बात का प्रमाण है कि memory एक जगह नहीं रहती। वह brain में हज़ारों जगह बिखरी रहती है — अलग-अलग रूपों में। एक रास्ता बंद हो जाए — दूसरा खुला रह सकता है।

हम अपनी memories को “भूला” नहीं देते। हम उनका रास्ता भूल जाते हैं।


2000 की फिल्म “Memento” — Christopher Nolan की — एक ऐसे आदमी की कहानी है जो short-term memory नहीं बना सकता। वह हर बात अपने शरीर पर tattoo करवाता है। Polaroid photos पर notes लिखता है।

लेकिन जो सबसे चौंकाने वाली बात फिल्म में सामने आती है — वह यह है कि वह अपनी memories को खुद ही तोड़-मरोड़ता रहा है। उसने वह सच याद रखा जो वह याद रखना चाहता था।

यही Nolan कह रहे हैं — और यही neuroscience भी।

Memory retrieval एक reconstruction है — not a recording। हम वही याद करते हैं जो हम याद करना चाहते हैं। हर बार जब हम किसी memory को recall करते हैं — हम उसे थोड़ा बदल देते हैं। थोड़ा रंग चढ़ा देते हैं। थोड़ा मिटा देते हैं।

ट्रॉय की खुदाई की तरह।


तो वह काम करिए जो पोस्ट की शुरुआत में कहा था।

किचन में जाइए। कुछ सूँघिए।

देखिए कौन सा द्वीप उभर आता है।



Discover more from हिंदीज़ेन : HindiZen

Subscribe to get the latest posts sent to your email.

Leave a comment

Trending

Discover more from हिंदीज़ेन : HindiZen

Subscribe now to keep reading and get access to the full archive.

Continue reading

Discover more from हिंदीज़ेन : HindiZen

Subscribe now to keep reading and get access to the full archive.

Continue reading