उन्नीसवीं शताब्दी के मध्य में Andrew Carnegie नामक एक स्कॉटिश लड़का अमेरिका में छोटा-मोटा काम करने के लिए आया। कुछ सालों की मेहनत से उसने तत्कालीन विश्व का स्टील का सबसे बड़ा व्यापारिक साम्राज्य खड़ा कर दिखाया। उसकी गिनती आधुनिक विश्व के उन पहले धनकुबेरों में होती है जिन्होंने फुटपाथ से ज़िंदगी की शुरुआत की थी। एक समय ऐसा भी था जब Andrew Carnegie के नीचे 43 लखपति कार्मिक काम करते थे।

आज से सौ साल पहले एक लाख डॉलर बहुत बड़ी रकम होती थी। आज भी यह बड़ी रकम है। किसी ने एक बार Carnegie से पूछा कि वे अपने साथ काम करने के लिए सर्वश्रेष्ठ लोगों को कैसे खोज निकालते हैं।

Carnegie ने कहा —

“सबसे अच्छे कार्मिकों का चयन करना सोने की खान से सोना निकालने जैसा काम है। एक तोला सोना प्राप्त करने के लिए टनों मिट्टी को खंगालना पड़ता है लेकिन जब आप खुदाई करते हैं तो आपकी नज़र मिट्टी को नहीं बल्कि सोने को टटोलती है।”


एक वाक्य में नेतृत्व का पूरा दर्शन

Carnegie का यह वाक्य सुनने में सरल है। लेकिन इसमें नेतृत्व, मानव स्वभाव और सफलता के बारे में एक गहरी बात छुपी है।

वे मिट्टी देखते ही नहीं थे।

जब आप किसी व्यक्ति में केवल उसकी कमियाँ, उसकी सीमाएँ, उसकी असफलताएँ देखते हैं — तो आप मिट्टी खोद रहे हैं और मिट्टी ही घर ले जा रहे हैं।

लेकिन जब आप यह पूछते हैं — “इस इंसान में क्या खास है?” — तो आप सोना ढूँढने निकले हैं। और सोना मिलता है उन्हीं को जो उसे खोजते हैं।


Carnegie की असली विरासत — पैसा नहीं, लोग

Carnegie की कहानी केवल steel और दौलत की नहीं है।

वे एक गरीब परिवार से आए थे। 13 साल की उम्र में एक factory में काम शुरू किया — हफ्ते में $1.20 की तनख्वाह पर। लेकिन उन्होंने हर जगह लोगों में संभावना देखी।

उनके सबसे करीबी सहयोगी Charles Schwab को Carnegie ने तब पहचाना जब वह एक साधारण दिहाड़ी मज़दूर था। Carnegie ने उसमें सोना देखा। Schwab आगे चलकर अमेरिका का पहला करोड़पति CEO बना।

Carnegie की असली खान लोग थे — steel नहीं।

और उनकी अपनी इच्छा थी कि उनकी कब्र पर लिखा जाए — “यहाँ वह व्यक्ति सोया है जो खुद से होशियार लोगों को अपने पास रखना जानता था।”


अब्दुल कलाम — जो हर बच्चे में वैज्ञानिक देखते थे

डॉ. A.P.J. Abdul Kalam जब राष्ट्रपति भवन में थे, तब भी वे school के बच्चों से मिलते थे। उनके करीबी बताते हैं कि वे हर बच्चे से इस तरह बात करते थे जैसे उस बच्चे में एक भविष्य का वैज्ञानिक या नेता छुपा हो।

उन्होंने एक बार कहा था — “हर बच्चा पैदाइशी प्रतिभाशाली होता है। लेकिन अगर आप एक मछली को पेड़ चढ़ने की क्षमता से आँकेंगे तो वह ज़िंदगी भर खुद को बेकार समझती रहेगी।”

यह Einstein का भी वाक्य था — और Kalam ने इसे अपने पूरे जीवन में जिया।

Carnegie और Kalam — दोनों ने एक ही काम किया। दोनों ने लोगों में सोना देखा।


मनोविज्ञान कहता है — “Pygmalion Effect”

1968 में Harvard के मनोवैज्ञानिक Robert Rosenthal ने एक प्रयोग किया।

उन्होंने teachers को बताया कि कुछ बच्चे “intellectually gifted” हैं — जबकि वे randomly चुने गए थे। साल के अंत में उन बच्चों ने सच में बाकियों से बेहतर प्रदर्शन किया।

कारण? Teachers ने उनसे अधिक अपेक्षाएँ रखीं, उन्हें अधिक attention दिया, उनकी गलतियों को सीखने के अवसर के रूप में देखा।

इसे “Pygmalion Effect” कहा जाता है — जब आप किसी में श्रेष्ठता देखते हैं, तो वह श्रेष्ठता खिलने लगती है।

Carnegie का नज़रिया और Rosenthal का विज्ञान — एक ही बात।


फिल्म “Chak De India” — एक coach जो सोना देखता था

“Chak De India” (2007) में Shah Rukh Khan का किरदार Kabir Khan एक ऐसी team को लेकर चलता है जिसे सब “बेकार” कह चुके थे।

लेकिन Kabir Khan ने वह देखा जो बाकियों ने नहीं देखा — हर लड़की में एक अलग ताकत। किसी में speed, किसी में aggression, किसी में leadership।

उसने मिट्टी नहीं देखी। उसने सोना देखा।

और वह टीम World Champion बनी।


आपकी नज़र कहाँ है?

Carnegie का वाक्य केवल HR और management के लिए नहीं है।

यह माता-पिता के लिए है — जो अपने बच्चे में क्या देखते हैं? यह शिक्षकों के लिए है — जो अपने छात्र में क्या देखते हैं? यह दोस्तों के लिए है — जो एक-दूसरे में क्या देखते हैं? और यह हमारे लिए है — जो हम खुद में क्या देखते हैं?

जो मिट्टी देखता है — उसे मिट्टी मिलती है। जो सोना देखता है — उसे सोना मिलता है।

नज़रिया बदलिए। खुदाई शुरू कीजिए।



Discover more from हिंदीज़ेन : HindiZen

Subscribe to get the latest posts sent to your email.

4 responses to “मिट्टी में सोना — Andrew Carnegie का नज़रिया”

  1. सही है.. जब आप खुदाई करते हैं तो आपकी नज़र मिट्टी को नहीं बल्कि सोने को टटोलती हैं…

  2. सही है.. जब आप खुदाई करते हैं तो आपकी नज़र मिट्टी को नहीं बल्कि सोने को टटोलती हैं…

Leave a comment

Trending

Discover more from हिंदीज़ेन : HindiZen

Subscribe now to keep reading and get access to the full archive.

Continue reading

Discover more from हिंदीज़ेन : HindiZen

Subscribe now to keep reading and get access to the full archive.

Continue reading