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क्या तुम मनुष्य हो?
क्या तुम मनुष्य हो? प्रेम में तुम्हारी जितनी गहराई हो, मनुष्यता में उतनी ही ऊंचाई होगी. और परिग्रह में जितनी ऊंचाई हो, मनुष्यता में उतनी ही क्षुद्रता होगी. प्रेम और परिग्रह जीवन की दो दिशाएं हैं. प्रेम पूर्ण है, तो … Continue reading
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