Daughter of the Servant – नौकर की पुत्री


summer impression ~ 11 ~ by alice popkorn

भारत के किसी राज्य में बहुत पहले एक राजकुमार था जो जल्द ही राजा बनने वाला था. राज्य की परंपरा के अनुसार राजा बनने से पहले उसे विवाह करना आवश्यक था.

दरबार के एक बुद्धिमान व्यक्ति ने उसे सलाह दी कि वह राज्य की सभी विवाह योग्य युवतियों को बुलाकर उनमें से अपने लिए सुयोग्य वधु का चुनाव करे.

राजकुमार के महल में एक स्त्री काम करती थी जिसकी पुत्री भी विवाह योग्य थी. जब उसने राजकुमार के विवाह के लिए की जा रही तैयारियां होते देखा तो उसका दिल डूबने लगा क्योंकि उसकी पुत्री राजकुमार से बहुत प्रेम करती थी.

उसने घर पहुंचकर राजकुमार के विवाह की खबर अपनी पुत्री को दी. वह यह जानकर अचंभित हो गई कि उसकी पुत्री भी स्वयंवर में जाना चाहती थी.

उसने अपनी पुत्री से कहा, “बिटिया, तुम वहां जाकर क्या करोगी? वहां तो पूरे देश से सुंदर और धनी लड़कियां राजकुमार का वरण करने के लिए आएंगी. राजकुमार से विवाह की इच्छा अपने मन से निकाल दो. मैं जानती हूं कि तुम्हें इससे दुख होगा लेकिन अपने दुख को खुद पर हावी करके अपने जीवन को व्यर्थ न होने दो!”

पुत्री ने कहा, “मां, तुम चिंतित न हो. मैं दुखी नहीं हूं और मेरा निर्णय सही है. मुझे पता है कि राजकुमार मुझे नहीं चुनेगा लेकिन इसी बहाने मुझे कुछ समय के लिए उसके निकट होने का मौका मिलेगा. मेरे लिए यही बहुत है. मैं जानती हूं कि मेरी किस्मत में महलों का प्रेम नहीं लिखा है.”

स्वयंवर की रात को सभी नवयुवतियां महल पहुंचीं. वहां सुंदर-से-सुंदर और धनी युवतियों का जमघट था जो सुंदर वस्त्रों और बहुमूल्य आभूषणों से स्वयं को सुसज्जित करके राजकुमार की नजरों में आने के किसी भी मौके को हाथ से नहीं जाने देना चाहती थीं.

राजकुमार ने तब भरे दरबार में सभी युवतियों से कहा, “मैं तुममें से प्रत्येक को एक बीज दूंगा. इस बीज से पौधा निकलने के छः महीने बाद जो युवती मुझे सबसे सुंदर फूल लाकर देगी मैं उसी से विवाह करुंगा और वही इस राज्य की रानी बनेगी.”

सभी युवतियों को गमले में एक-एक बीज रोपकर दे दिया गया. महल की नौकरानी की पुत्री को बागवानी या पौधे की देखभाल के बारे में कुछ पता नहीं था फिर भी उसने बहुत धैर्य और लगन से गमले की देखभाल की. राजकुमार के प्रति उसके दिल में गहरा प्रेम था और वह आश्वस्त थी कि पौधे से निकलनेवाला फूल बहुत सुंदर होगा.

तीन महीने बीत गए लेकिन गमले में कोई पौधा नहीं उगा. नौकरानी की पुत्री ने सब कुछ करके देख लिया. उसने मालियों और किसानों से बात की, जिन्होंने उसे बागवानी की कुछ तरकीबें सुझाईं, लेकिन किसी ने काम नहीं किया. उसके गमले में कुछ नहीं उगा. इसी सब में छः महीने बीत गए.

अपने खाली गमले को लेकर वह राजमहल पहुंची. उसने देखा कि बाकी युवतियों के गमलों में बहुत अच्छे पौधे उगे थे और हर पौधे में एक अद्वितीय फूल खिला था. हर फूल एक-से-बढ़कर-एक था.

अंत में वह घड़ी आ गई जिसकी सभी बाट जोह रहे थे. राजकुमार दरबार में आया और उसने सभी युवतियों के गमलों और फूल को बहुत गौर से देखा.

फिर राजकुमार ने परिणाम की घोषणा की. उसने नौकरानी की पुत्री की ओर इशारा करके कहा कि वह उससे विवाह करेगा.

वहां उपस्थित सभी जन रोष व्यक्त करने लगे. उन्होंने कहा कि राजकुमार ने सुंदर फूल लेकर आई युवतियों की उपेक्षा करके उस युवती को चुना जो खाली गमला लेकर चली आई थी.

राजकुमार ने शांतिपूर्वक सभी को संबोधित कर कहा, “केवल यही युवती रानी बनने की योग्यता रखती है क्योंकि उसने सच्चाई और ईमानदारी का फूल खिलाया है. जो बीज मैंने छः महीने पहले सभी युवतियों को दिए थे वे निर्जीव थे. उनसे पौधा उगकर फूल खिलना असंभव था.”

(~_~)

In ancient India a certain prince was about to be crowned Emperor; before that, in accordance with the law, he had to get married.
Advised by a wise man, he decided to call all the young women in the region to choose the most suitable among them.

An old lady who had been a servant in the palace for many years heard the comments on the preparations for the audience and felt a deep sadness, for her daughter nurtured a secret love for the prince.

On reaching home and conveying the news, she was astonished to hear that her daughter also intended to present herself before the prince.

“My child, what are you going to do there? All the prettiest and richest young women in the court will be there. Get that silly idea out of your head! I know that you must be suffering, but don’t change your suffering into madness!”

“Dearest mother, I am not suffering and far less have I gone crazy; I know that I shall never be the chosen one, but it’s my chance to be at least for a few minutes close to the prince. That makes me happy, even knowing that my fate lies elsewhere.”

At night, when the young woman reached the palace, indeed all the prettiest young ladies were there, dressed in the prettiest clothes, displaying the most beautiful jewels, and willing to fight in every possible way for the opportunity that lay open to them.

Surrounded by his court, the prince announced the challenge: “I shall give each of you a seed. The one who brings me the prettiest flower in six months’ time will be the future Empress of India.

The young girl took her seed, planted it in a vase, and even though she did not know much about the art of gardening, took care of the earth with great patience and tenderness, for she thought that if the beauty of flowers was as deep as her love, then she did not need to worry about the result.

Three months passed by and nothing bloomed. The young woman tried a bit of everything, spoke to farmers and peasants – who taught her all sorts of gardening techniques – but nothing worked, all her efforts came to nothing.

Finally, the six months came to an end and nothing had flourished in her vase.

Even knowing that she had nothing to show, she decided to return to the palace, realizing that this would be the last meeting with her beloved. The day arrived for the new audience.

The girl appeared with her vase without a plant, and saw that all the other pretenders had managed to produce fine results, each of them with a prettier flower than the next, all with a variety of shapes and colors.

At last came the moment everyone was waiting for: the prince entered and observed each of the pretenders with great care and attention.

After reviewing them all, he announced the result, pointing to his servant’s daughter as his chosen wife.

Everyone present began to complain, saying that he chose precisely the one candidate who had failed in the assigned task.

Then the prince very calmly clarified the reason for his choice: “She was the only one among you all to cultivate the flower that made her worthy to become an Empress: the flower of honesty. All the seeds that I distributed were sterile, and there was absolutely no way that they could flourish.”

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The Happiest Bird – सबसे खुश पक्षी


dawn by alice popkorn

जंगल में रहनेवाले कौवे को कोई कष्ट नहीं था और वह सुख-चैन से जी रहा था. फिर एक दिन उसने एक हंस को देखा. उजले धवल हंस को देखकर उसने सोचा, “यह हंस कितना सफेद है! और मैं कैसा काला हूं… यह हंस अवश्य ही दुनिया का सबसे खुश पक्षी होगा.”

कौवे ने यह बात हंस से कही. “नहीं भाई, ऐसा नहीं है,” हंस ने जवाब दिया, “बहुत समय तक मुझे भी लगता रहा कि मैं दुनिया का सबसे सुंदर और सुखी पक्षी हूं, लेकिन फिर एक दिन मैंने एक तोते को देखा, जिसके शरीर के दो रंगों की छटा अनूठी थी, जबकि मेरे पास तो केवल एक ही रंग है. अब मुझे लगता है कि तोता ही दुनिया का सबसे सुंदर और सुखी पक्षी है.”

कौवा तोते के पास गया. तोते ने कहा, “जब तक मैंने मोर को नहीं देखा था तब तक मुझे अपने रूप-रंग पर बड़ा गुमान था. मोर जितना सुंदर तो कोई हो ही नहीं सकता. मेरे दोरंगी पंखों का मोर से कैसा मुकाबला!”

फिर कौवा मोर को खोजने चला. उसे मोर एक चिड़ियाघर में मिला जहां उसके पिंजड़े के बाहर सैंकड़ों लोग उसकी सुंदरता की सराहना कर रहे थे. जब लोग वहां से चले गए तो कौवे ने मोर से पूछा, “मोर भइया, तुम कितने सुंदर हो! हजारों लोग रोज तुम्हें देखने यहां आते हैं. मुझे तो वे देखकर ही दुत्कार देते हैं. मुझे लगता है कि तुम दुनिया के सबसे सुखी और खुश रहने वाले पक्षी हो.”

मोर ने कहा, “मुझे भी यही लगता था भाई, कि मैं दुनिया का सबसे सुंदर और खुश पक्षी हूं, लेकिन मेरी सुंदरता ही मेरी शत्रु बन गई है. इसी के कारण अब मैं इस चिड़ियाघर में कैद हूं. यहां मैं सारे पशु-पक्षियों का मुआयना करने के बाद मैं इस नतीजे पर पहुंचा हूं कि तुम्हें छोड़कर बाकी सभी पक्षी यहां कैद हैं. अब मुझे यह लगने लगा है कि मैं मोर न होकर एक कौवा होता तो आजाद होता और मनमर्जी से कहीं भी घूमता फिरता.”


A crow lived in the forest and was absolutely satisfied in life. But one day he saw a swan. “This swan is so white,” he thought, “and I am so black. This swan must be the happiest bird in the world.”

He expressed his thoughts to the swan. “Actually,” the swan replied, “I was feeling that I was the happiest bird around until I saw a parrot, which has two colors. I now think the parrot is the happiest bird in creation.” The crow then approached the parrot. The parrot explained, “I lived a very happy life until I saw a peacock. I have only two colors, but the peacock has multiple colors.”

The crow then visited a peacock in the zoo and saw that hundreds of people had gathered to see him. After the people had left, the crow approached the peacock. “Dear peacock,” the crow said, “you are so beautiful. Every day thousands of people come to see you. When people see me, they immediately shoo me away. I think you are the happiest bird on the planet.”

The peacock replied, “I always thought that I was the most beautiful and happy bird on the planet. But because of my beauty, I am entrapped in this zoo. I have examined the zoo very carefully, and I have realized that the crow is the only bird not kept in a cage. So for past few days I have been thinking that if I were a crow, I could happily roam everywhere.”

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Discover the Habits of Exceedingly Healthy People – स्वास्थ्य को संजोनेवाले उपाय


food prayer by cornelia kopp

आपको आश्चर्य होता होगा कि आपके परिजनों या मित्रों में कुछ लोग ऐसे भी हैं जो कभी बीमार नहीं पड़ते. जब दूसरे लोग बदलते मौसम की गड़बड़ियों जैसे जुकाम, वायरल, पेट की गड़बड़ या आंखों की बीमारी से परेशान दिखते हैं तब भी ये लोग भले-चंगे बने रहते हैं. क्या कारण है कि कुछ लोग बहुत कम बीमार पड़ते हैं जबकि कुछ लोग हमेशा किसी-न-किसी स्वास्थ्य समस्या से ग्रस्त दिखते हैं?

मैं इस पोस्ट में आपको ऐसे उपायों के बारे में बताऊंगी जो अच्छे स्वास्थ्य का आधार हैं तथा इनका पालन करने से शरीर रोगों का मुकाबला करने में सक्षम बना रहता है और व्याधियां आसानी से अपनी गिरफ्त में नहीं लेतीं. इनमें से कुछ तो बहुत सरल-सहज हैं जबकि कुछ को विस्तृत रिसर्च में पाया गया है-

अच्छा आराम –

स्वस्थ रहने के लिए यह ज़रूरी है कि शरीर को पर्याप्त आराम दिया जाए. यदि आप रात-रात भर काम-काज या मनोरंजन के लिए खुद को जगाए रखते हैं तो आपका इम्यून सिस्टम प्रभावी तरीके से काम नहीं करता. रात को दस बजे तक सोने की आदत डालने तथा कम्प्यूटर स्क्रीन आदि की रोशनी से दूर रहने से शरीर में मेलेटोनिन की वृद्धि होती है जो इम्यून सिस्टम को सुदृढ़ करता है.

आहार में पोषक तत्वों का समावेश –

आहार में उत्तम गुणवत्ता के भोज्य पदार्थ तथा विटामिन C और ज़िंक प्रदान करनेवाले सब्जियों-फलों के समावेश से स्वास्थ्य का संरक्षण होता है. इसी के साथ ही भोजन में चीनी तथा नमक को कम करना भी ज़रूरी है. रिफ़ाइंड चीनी के प्रयोग से इम्यून सिस्टम सुस्त पड़ जाता है. अच्छे स्वास्थ्य के धारक सामान्यतः चाय-कॉफी, कार्बोनेटेड ड्रिंक्स, कैंडी-चॉकलेट और आइसक्रीम से परहेज करते हैं जिससे उनका शरीर सशक्त बना रहता है.

मालिश, योग और एक्यूप्रेशर –

किसी भी तरह का तनाव शरीर को कमज़ोर करता है. रिसर्च से पता चला है कि सतत तनाव में रहनेवालों का स्वास्थ्य खराब होने की संभावना बहुत बढ़ जाती है. स्वास्थ्य के प्रति सजग रहनेवाले व्यक्ति अपने तनाव पर लगाम लगाने का प्रयास करते हैं. मालिश से शरीर को अनेक लाभ होते हैं. इससे ब्लड-प्रेशर और एंज़ाइटी कम होती है जिससे व्यक्ति को राहत का अनुभव होता है. योग तथा एक्यूप्रेशर से भी इम्यून सिस्टम सशक्त बनता है. एक्यूप्रेशर में शरीर के किसी खास बिंदु जैसे थायमस ग्रंथि पर संतुलित दबाव डालने से इम्यून तथा लिंफेटिक सिस्टम की कार्यप्रणाली में सुधार होता है.

शीतल स्नान –

बहुत से लोग ठंडे पाने से नहाने के विचार से ही भयभीत हो जाते हैं, लेकिन रिसर्च से यह पता चला है कि शीतकाल में भी ठंडे पानी से नहाने से श्वेत रक्त कणिकाओं की सक्रियता बढ़ जाती है जिससे शरीर हानिकारक जीवाणुओं तथा रोगाणुओं के विरुद्ध लड़ने में अतिरिक्त सक्षम हो जाता है. अनेक देशों में स्वास्थ्य के प्रति सजग लोग हर मौसम में ठंडे पानी से ही नहाते हैं.

सकारात्मकता –

सकारात्मक के उजले पक्ष को कम करके मत आंकिए. सकारात्मक रवैया रखनेवाले व्यक्तियों को आंतरिक प्रेरणा और ऊर्जा की कमी नहीं पड़ती. नकारात्मकता से घिरते ही शरीर और मन हर चीज से लड़ने की ताकत खो देता है. जीवन के उजले पक्षों को देखने और उनके प्रति कृतज्ञ रहनेवाले व्यक्ति तनावग्रस्त नहीं रहते और तनावजन्य व्याधियों से दूर रहते हैं. सकारात्मकता को बढ़ाने का सबसे सरल उपाय यह है कि आप किसी भी घटना या व्यक्ति के उजले पक्षों पर भी नज़र डालें और बुरी बातों से सीख लेते हुए आगे बढ़ें. किसी भी रूप में कटुता तथा वैरभाव से दूर रहें. जीवन के विविध पक्षों के लिए आभारी रहने के बारे में लिखी इस अंग्रेजी पोस्ट को भी देखिए.

आशा है कि आप ऊपर बताए गए उपायों को ध्यान में रखेंगे, उनका अनुसरण करेंगे और अपने स्वास्थ्य को परिपूर्ण बनाए रखने के लिए भरसक प्रयास करेंगे. याद रखें, तंदरुस्ती हज़ार नियामत है.


Source: “Discover the Seven Habits of Exceedingly Healthy People,”  from naturalnews.com, by Carolanne Wright. Carolanne believes if we want to see change in the world, we need to be the change. As a nutritionist, natural foods chef and wellness coach, she has encouraged others to embrace a healthy lifestyle of green living for over 13 years. Through her website http://www.Thrive-Living.net, she looks forward to connecting with other like-minded people who share a similar vision.

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Narcissus – नरगिस की कहानी


cornelia kopp

अल्केमिस्ट ने वह किताब पढ़ने के लिए उठाई जिसे कारवां में कोई अपने साथ लाया था. पन्ने पलटने पर उसे किताब में नारसिसस की कहानी दिखी.

अलकेमिस्ट को नारसिसस की कहानी के बारे में पता था. नारसिसस एक युवक था जिसने किसी झील के किनारे बैठकर पानी में अपना अक्स देखा. अपने अप्रतिम रूप को देखकर वह खुद पर इतना मोहित हो गया कि सुध-बुध खो बैठा और झील में गिरकर डूब गया (एक दूसरी कहानी यह कहती है कि वह खुद को देखकर सब कुछ भूल गया और वहीं बैठे-बैठे उसने भूख-प्यास से दम तोड़ दिया).

कहते हैं कि जिस जगह वो गिरा था वहां एक सुंदर फूल उगा, जिसे हम नरगिस के नाम से जानते हैं.

लेकिन उस किताब में नारसिसस की इस कहानी के अलावा और कुछ भी बयां किया गया था. उसमें लिखा था कि नारसिसस की मौत के बाद उस वन की देवियां उस झील तक आईं, और उन्होंने देखा कि झील का मीठा पानी खारा हो चुका था.

“तुम क्यों रो रही हो?”, वनदेवियों ने झील से पूछा.

“ये आंसू नारसिसस के लिए हैं”, झील ने कहा.

“हम जानते हैं कि नारसिसस के गुज़र जाने का तुम्हें सबसे ज्यादा दुख है” उन्होंने कहा, “क्योंकि हमने उसे हमेशा दूर से ही देखा जबकि तुमने उसकी सुंदरता को करीब से जी भर के निहारा”.

“लेकिन… क्या वो बहुत सुंदर था?”, झील ने पूछा.

“तुमसे बेहतर इस बात को कौन जान सकता है?”, वनदेवियों ने अचरज से कहा, “तुम्हारे किनारे पर बैठकर ही तो वह पानी में अपनी छवि को निहारता रहता था!”

यह सुनकर झील कुछ पल को चुप रही, फिर वह बोली:

“मैं नारसिसस के लिए रोती रही लेकिन मुझे यह पता न था कि वह सुंदर था. मेरे रोने की वज़ह कुछ और थी. जब वह मेरे किनारों पर बैठकर मुझे देखता था तो मुझे उसकी आंखों में अपनी खूबसूरती नज़र आती थी.”

“कितनी सुंदर है यह कहानी”, अल्केमिस्ट ने खुद से कहा.


The Alchemist picked up a book that someone in the caravan had brought. Leafing through the pages, he found a story about Narcissus.
The Alchemist knew the legend of Narcissus, a youth who daily knelt beside a lake to contemplate his own beauty. He was so fascinated by himself that, one morning, he fell into the lake and drowned.
At the spot where he fell, a flower was born, which was called the narcissus.
But this was not how the author of the book ended the story. He said that when Narcissus died, the Goddesses of the Forest appeared and found the lake, which had been fresh water, transformed into a lake of salty tears.
“Why do you weep?” the Goddesses asked.
“I weep for Narcissus,” the lake replied.
“Ah, it is no surprise that you weep for Narcissus,” they said, “for though we always pursued him in the forest, you alone could contemplate his beauty close at hand.”
“But….. was Narcissus beautiful?” the lake asked.
“Who better than you to know that?” the Goddesses said in wonder, “After all, it was by your banks that he knelt each day to contemplate himself!”
The lake was silent for some time. Finally it said:
“I weep for Narcissus, but I never noticed that Narcissus was beautiful. I weep because, each time he knelt beside my banks, I could see, in the depths of his eyes, my own beauty reflected.”
“What a lovely story,” the Alchemist thought.
(From the blog of Paulo Coelho)

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खुशियों के लकी नंबर


time alice popkorn

एक अकेले दिन में ही आपको अपने फिटनेस गोल्स को पूरा करना है, घर और ऑफिस के ज़रूरी काम निपटाने हैं, और खुद को तरोताजा रखने के लिए थोड़ा मनबहलाव भी करना है. लेकिन आज के माहौल में एक दिन पूरा नहीं पड़ता. ऐसा लगता है कि थोड़ा सा वक्त और मिलता तो बहुत कुछ किया जा सकता था. ऐसे में थोड़े से सुकून के लिए मैं आपको कुछ ऐसे लकी नंबर देती हूं जिनसे आपको बहुत मदद मिलेगी. मैं इन्हें लकी नंबर इसलिए कहती हूं क्योंकि ये आपको कोई ज़रूरी काम कर डालने के लिए बहुत प्रोत्साहित करते हैं. कई विशेषज्ञों ने लंबी-चौड़ी रिसर्च और खोजबीन के बाद इन्हें आजमाया है और ये अपना काम बखूबी करते हैं. ये हैं वे लकी नंबरः

लकी नंबर 2 -

प्रसिद्ध पुस्तक “गेटिंग थिंग्स डन” (Getting Things Done) के लेखक डेविड एलन कहते हैं कि यदि आपको लगता है कि आप किसी काम को 2 मिनट में पूरा कर सकते हैं तो उसे तुरंत कर डालिए! ये “Two-Minute Rule” आपको बहुत से छोटे लेकिन ज़रूरी कामों को झटपट पहली फुर्सत में पूरा कर देने में मदद करेगा और आपके कामों की फेहरिस्त कुछ छोटी तो हो ही जाएगी.

लकी नंबर 5 -

यदि आप घर या दफ्तर में किसी कठिन चीज से जूझ रहे हैं तो “Five-Minute Rule” का प्रयोग करें. काम को ऊबकर या खीझकर टालें नहीं बल्कि खुद से कहें, “मैं इस काम को करने के लिए अच्छे से पूरे 5 मिनट दूंगा और उसके बाद यदि मेरा मन रुकने को कहेगा तो ही रुकूंगा.” अपने मन में लगन विकसित करने के लिए इस नियम का अभ्यास करें और खुद से कहें, “मैं इस प्रोजेक्ट पर कम-से-कम 5 मिनट काम करने के बाद ही उठूंगा.” आप 5 मिनट के बाद भी आप काम करते रहना चाहें तो अच्छी बात है. यदि आप रुक भी जाएं तो भी आपने काम को 5 मिनट तो दे ही दिए… अब आपको काम को 5 मिनट कम देने हैं. लेखक एम जे रायन ने अपनी किताब “This Year I Will” में इसपर बहुत विस्तार से लिखा है.

लकी नंबर 11 -

आप स्वस्थ रहना और लंबी आयु पाना चाहते हैं लेकिन इसके लिए हल्की-फुल्की एक्सरसाइज़ या वॉक करने के लिए एक घंटा भी समय नहीं निकाल पा रहे तो यह टिप आपके काम की है. हार्वर्ड मेडिकल स्कूल के रोगविज्ञानी आई-मिन ली ने लंबी रिसर्च के बाद यह निष्कर्ष निकाला है कि स्वस्थ रहने और लंबी आयु के लिए रोज़ाना कम-से-कम 11 मिनट की एक्सरसाइज़ करनेवाले लोग एक्सरसाइज़ नहीं करनेवालों से औसतन 1.8 वर्ष अधिक जीते हैं. रोज़ाना थोड़ी सी शारीरिक कसरत करने से ही स्वास्थ्य पर इतना प्रभाव पड़ता है. इससे भी अधिक व्यापक प्रभाव डालनेवाली बात के बारे में अंत में लिखा गया है.

लकी नंबर 15 -

आप अच्छे स्वास्थ्य के लिए या किसी बीमारी या परहेज के कारण बहुत सी चीजों के खाने या पीने पर नियंत्रण रखना चाहते हैं लेकिन कभी-कभी आपका मन ललचा जाता है. आपका मन भी थोड़ी सी और चटपटी चाट या आइसक्रीम खाने को करता है न? या शायद आपको सिगरेट की तलब से निजात नहीं मिल पा रही हो. ऐसी छटपटाहट होने पर लकी नंबर 15 को याद रखें. इस विषय पर की गई रिसर्च से पता चला है कि हमारी अधिकांश उत्कट इच्छाएं लगभग 15 मिनट तक प्रबल बनी रहती हैं. वैज्ञानिक एलन मार्लेट बताते हैं कि ऐसी इच्छाएं लहरों के समान होती है- ये अपनी उठान तक पहुंचती हैं और फिर गिरने लगती हैं. ऐसे में आपके लिए ज़रूरी होगा कि आप इस लहर का शिकार बनने की बजाए उनकी सवारी करें. इस बात को ध्यान में रखें कि आपकी लालसा को कमज़ोर होने में लगभग 15 मिनट का वक्त लगेगा और अपने किसी संकल्प को बनाए रखने के लिए हम 15 मिनटों तक तो कष्ट झेल ही सकते हैं.

लकी नंबर 20 -

आप किसी समस्या के समाधान में जी-जान से जुटे हैं लेकिन कोई हल नहीं निकल रहा. आप ठहरिए, थोड़ा सुस्ताइए. एक ब्रेक ले लीजिए और लगभग 20 मिनटों के लिए कोई बिल्कुल अलहदा चीज करिए. कहीं टहल आइए, दो-तीन गाने सुन लीजिए, आंखें बंद करके लेट जाइए या अपने किसी दोस्त से बातें कर लीजिए. फिर आप अपने काम की ओर लौटिए. बहुत संभव है कि आपको समस्या का हल एक झटके में कौंध जाए. हो सकता है कि हल आपके सामने ही मौजूद रहा हो और आप काम के दबाव में उसे देख नहीं पाए हों. कई बार क्रासवर्ड या सुडोकू करते वक्त आपके सामने ऐसे “अहा” मौके आए होंगे. काम के बीच में छो़टे-छोटे ब्रेक्स लेने का यही फायदा है. असल में जब कभी आप अपने काम के तयशुदा पैटर्न को बदलते हैं तो आपका दिमाग तनाव से मुकाबला करनेवाले रसायनों को सक्रिय कर देता है. दिमाग में आनेवाला यह रासायनिक परिवर्तन आपको राहत देता है और आपकी रचनाशीलता में वृद्धि करता है, जिसके कारण आपको उपाय रहस्यमयी रूप से सूझने लगते हैं. अनुसंधानकर्ता द्वय हर्बर्ट बैंसन और विलियम प्रोक्टर ने इसे “the breakout principle” का नाम दिया.

लकी नंबर 43 -

यदि रोज़ाना 11 मिनट का एक्सरसाइज़ प्रोग्राम आपको बहुत कम लगता है और आपके पास थोड़ा अतिरिक्त समय है तो एक्सरसाइज़ का अधिकतम लाभ उठाने के लिए आपको रोज़ाना औसतन 43 मिनट अपने स्वास्थ्य के लिए समर्पित करने होंगे. ऐसा पाया गया है कि रोज़ाना इतने मिनटों तक एक्सरसाइज़ करनेवालों की औसत आयु दूसरों की तुलना में 4.2 साल अधिक होती है. यदि 43 मिनट कुछ ज्यादा लग रहे हों तो आपके पास 22 मिनटों का विकल्प है जो आपकी जिंदगी में 3.4 साल जोड़ सकता है. इसके बारे में विस्तार से यहां पढ़ें.


meg-seligThis post is © Meg Selig. Meg is the author of Changepower! 37 Secrets to Habit Change Success (Routledge, 2009), on sale here and here. She earned her M.A. Ed. in counseling at Washington University in St. Louis. In addition to her consulting work, she is also an adjunct professor of counseling at St. Louis Community College at Florissant Valley where she teaches a short class on “Habit Change.” Meg lives in St. Louis, Missouri. Her blogs can be found at www.psychologytoday.com/blog/changepower. Follow her on Twitter and Facebook

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