Buddha

मोक्ष

मैं शांति, आनंद और मुक्ति की बातें कर रहा हूं. जीवन की वही केंद्रीय खोज है. वह पूरी न हो तो जीवन व्यर्थ हो जाता है. कल यही कह रहा था कि एक युवक ने पूछा, “क्या सभी को मोक्ष… Read More ›

Butter and Stones – पत्थर और घी

सदियों पहले किसी पंथ के पुरोहित नागरिकों के मृत संबंधी की आत्मा को स्वर्ग भेजने के लिए एक कर्मकांड करते थे और उसके लिए बड़ी दक्षिणा माँगते थे. उक्त कर्मकांड के दौरान वे मंत्रोच्चार करते समय मिट्टी के एक छोटे… Read More ›

मन और शांति

मनुष्य का मन अद्भुत है. वही संसार का और मोक्ष का रहस्य है. पाप और पुण्य, बंधन और मुक्ति, स्वर्ग और नर्क सब उसमें ही समाये हुए हैं. अन्धकार और प्रकाश उसी का है. उसमें ही जन्म है, उसमें ही… Read More ›

“जाओ, मैं गालियां नहीं लेता” – बुद्ध

प्रथम पोस्ट – प्रथम भूमिका “बहुत कुछ लिखने को, अच्छा लिखने को और पढ़ने को मन करता है. मन की यही इच्छा मुझे पहले हिंदीज़ेन तक ले गई और फिर निशांत मिश्र तक. आगे पता चला कि निशांत वही हैं… Read More ›

मार्ग का ज्ञान

एक समय भगवान बुद्ध श्रावस्ती में मिगारमाता के पुष्वाराम मे विहार कर रहे थे. धम्म का ज्ञान प्राप्त करने और बुद्ध को सुनने के लिये मोग्गालन नामक ब्राहमण लेखाकार भी अकसर वहां आता था. एक दिन वह कुछ जल्दी आ… Read More ›

ब्लैकबेरी – बुद्ध – 80%

मेरे एक मित्र ने नया ब्लैकबेरी फोन खरीदा. ये स्मार्टफोन बहुत शानदार हैं और उनमें ईमेल, सैट-नेव, सैंकड़ों वेब एप्लीकेशंस – न जाने क्या-क्या हैं. फोन मिलते ही वह उसके फीचर जानने में जुट गया और घंटों तक बटनों को… Read More ›

आम्रपाली और भिक्षुक

बुद्ध अपने एक प्रवास में वैशाली आये. कहते हैं कि उनके साथ दस हज़ार शिष्य भी हमेशा साथ रहते थे. सभी शिष्य प्रतिदिन वैशाली की गलियों में भिक्षा मांगने जाते थे. वैशाली में ही आम्रपाली का महल भी था. वह… Read More ›

बुद्ध प्रसंग

महर्षि रमण और उनके शिष्य अनासक्ति के विषय पर चर्चा कर रहे थे. महर्षि ने कहा – “भारतवर्ष में सदियों पहले ही किसी कवि ने अपने छंद में लिखा था ‘प्रभु, तुमने मुझे तन ढंकने के लिए कपड़ा और भोजन… Read More ›

जागरण

कहते हैं कि ज्ञान प्राप्ति के बाद भगवान् बुद्ध जब एक गाँव से गुज़र रहे थे तब एक किसान उनके रूप और व्यक्तित्व की सुगंध से प्रभावित होकर उनके समीप आ गया. “मित्र, आप कौन हैं?” – किसान ने बुद्ध… Read More ›

बिलाल्पादक की कथा : The Story of Bilalpadaka

किसी नगर में बिलाल्पादक नामक एक धनिक रहता था. वह बहुत स्वार्थी था और सदाचार के कार्यों से कोसों दूर रहता था. उसका एक पड़ोसी निर्धन परन्तु परोपकारी था. एक बार पड़ोसी ने भगवान् बुद्ध और उनके शिष्यों को अपने… Read More ›

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