संतोष

ख़ुशी, संतोष, और कामयाबी

संजय सिन्हा पेशे से पत्रकार हैं और दिल्ली में रहते हैं. फेसुबक पर उनके लंबे स्टेटस जिंदगी और उससे जुड़े मसलों पर संजीदगी से सोचने को मजबूर करते हैं. उन्हें पढ़ने पर यह अहसास गहरा होता है कि अपनी तमाम… Read More ›

मानसिक जंजाल से मुक्ति के उपाय

हमारी समस्या यह नहीं है कि मौलिक और अभिनव विचार कैसे आयें बल्कि यह है कि लम्बे समय से भीतर जड़ जमा चुके नकारात्मक विचार कैसे निकलें. हमारा मष्तिष्क ऐसा भवन है जिसमें पुराना फर्नीचर भरा हुआ है. इसके कुछ… Read More ›

ब्लैकबेरी – बुद्ध – 80%

मेरे एक मित्र ने नया ब्लैकबेरी फोन खरीदा. ये स्मार्टफोन बहुत शानदार हैं और उनमें ईमेल, सैट-नेव, सैंकड़ों वेब एप्लीकेशंस – न जाने क्या-क्या हैं. फोन मिलते ही वह उसके फीचर जानने में जुट गया और घंटों तक बटनों को… Read More ›

जीवन का सौंदर्य

हर दिन, हर समय… दिव्य सौंदर्य हमें घेरे हुए है. क्या आप इसका अनुभव कर पाते हैं? क्या यह आपको छू भी पाता है? हममें से बहुतेरे तो दिन-रात की आपाधापी में इसका अंशमात्र भी देख नहीं पाते. उगते हुए… Read More ›

खोखली सुरक्षा का भ्रम

कुछ दिनों पहले मेरी पिताजी से एक मसले पर बहुत कहा-सुनी हो गयी. मैं होली पर घर जानेवाला था. पिताजी ने होली के पहले घर की सफाई-पुताई कराई. घर में बहुत सा कबाड़ का सामान था जिसे निकालकर फेंकना ज़रूरी… Read More ›

ज़िन्दगी कैसे जियें

“ज़िन्दगी लम्बी नहीं, गहरी होनी चाहिए” – रौल्फ वाल्डो इमर्सन क्योंकि ज़िन्दगी जीने में और जीवित रहने में बहुत बड़ा अंतर है * जब तक जियें तब तक सीखते रहें – हमेशा नया कुछ सीखने और पढने में हम जितना… Read More ›

जितनी लम्बी चादर हो, उतने ही पैर पसारें

खुशहाल ज़िन्दगी जियें, बरबाद ज़िन्दगी नहीं। दूसरों को दिखाने के लिए पैसा खर्च न करें। इस बात को हमेशा ध्यान में रखें कि दुनियावी वस्तुओं में वास्तविक संपत्ति नहीं है। अपने धन का नियोजन करें, धन को अपना नियोजन न… Read More ›

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