संगीत

संयम और संगीत ही साधना है

सुबह जा चुकी है. धूप गर्म हो रही है और मन छाया में चलने को है. एक वृद्ध अध्यापक आये हें. वर्षों से साधना में लगे हैं. तन सूख कर हड्डी हो गया है. आंखें धूमिल हो गयी हैं और… Read More ›

जीवन का सौंदर्य

हर दिन, हर समय… दिव्य सौंदर्य हमें घेरे हुए है. क्या आप इसका अनुभव कर पाते हैं? क्या यह आपको छू भी पाता है? हममें से बहुतेरे तो दिन-रात की आपाधापी में इसका अंशमात्र भी देख नहीं पाते. उगते हुए… Read More ›

तीन तारोंवाला वायलिन और ज़िंदगी

18 नवंबर 1995 को न्यू यॉर्क के लिंकन सेंटर के एवरी फ़िशर हॉल में वायलिन वादक इत्ज़ाक पर्लमान स्टेज पर पर वायलिन बजाने के लिए आया. स्टेज तक पहुंचना – और चलकर पहुंचना पर्लमान के लिए कोई मामूली उपलब्धि नहीं… Read More ›

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