शांति

मनुष्यता से दिव्यता की ओर

तुम्हारी आत्मा, चेतना, और जीवन दिव्यता का अंश है. यह ईश्वर का ही विस्तार है. तुम स्वयं को ईश्वर तो नहीं कह सकते पर ईश्वर से एकात्म्य तुम्हारा जन्मसिद्द अधिकार है. पानी की एक बूँद सागर नहीं हो सकती लेकिन… Read More ›

प्रसन्नता या शांति?

एक दिन बातों ही बातों में एक अन्तरंग मित्र यह पूछ बैठे, “तुम बहुत अच्छी बातें शेयर करते हो और तुमसे बातें करके अच्छा लगता है. लेकिन तुम हमेशा शांति की बात क्यों करते हो? प्रसन्नता, आनंद, और उत्सव की… Read More ›

मन और शांति

मनुष्य का मन अद्भुत है. वही संसार का और मोक्ष का रहस्य है. पाप और पुण्य, बंधन और मुक्ति, स्वर्ग और नर्क सब उसमें ही समाये हुए हैं. अन्धकार और प्रकाश उसी का है. उसमें ही जन्म है, उसमें ही… Read More ›

जीवन का सौंदर्य

हर दिन, हर समय… दिव्य सौंदर्य हमें घेरे हुए है. क्या आप इसका अनुभव कर पाते हैं? क्या यह आपको छू भी पाता है? हममें से बहुतेरे तो दिन-रात की आपाधापी में इसका अंशमात्र भी देख नहीं पाते. उगते हुए… Read More ›

Follow

Get every new post delivered to your Inbox.

Join 7,778 other followers