वृद्धावस्था

आख़री सफ़र

(अमरीकन लेखक केंट नेर्बर्न ने आध्यात्मिक विषयों और नेटिव अमरीकन थीम पर कई पुस्तकें लिखीं हैं. नीचे दिया गया प्रसंग उनकी एक पुस्तक से लिया गया है) बीस साल पहले मैं आजीविका के लिए टैक्सी चलाने का काम करता था…. Read More ›

स्वयं से पूछो, “मैं कौन हूं?”

”मैं कौन हूं?” जो स्वयं से इस प्रश्न को नहीं पूछता है, उसके लिए ज्ञान के द्वार बंद ही रह जाते हैं. उस द्वार को खोलने की कुंजी यही है. स्वयं से पूछो कि ”मैं कौन हूं?” और जो प्रबलता… Read More ›

ज़िंदगी की शाम

कुछ सप्ताह पहले मुझे अपने फूफाजी के गुज़र जाने का दुखद समाचार मिला. उससे पहले मेरे पिताजी के एकमात्र चचेरे भाई चल बसे. बीते कुछ सालों में मेरा परिवार कितना सिकुड़ गया! कई दफा ऐसा भी हुआ कि परिवार में जिन्हें… Read More ›

समर्पण

सुबह के साढ़े आठ बजे थे. अस्पताल में बहुत से मरीज़ थे. ऐसे में एक बुजुर्गवार अपने अंगूठे में लगे घाव के टाँके कटवाने के लिए बड़ी उतावली में थे. उन्होंने मुझे बताया कि उन्हें ठीक नौ बजे एक बहुत… Read More ›

भिक्षुणी अम्बपाली (आम्रपाली) के अद्भुत उद्गार

भगवान बुद्ध के प्रभाव में आकर वैशाली की पिंगला-गणिका अम्बपाली (आम्रपाली) एक दिन भिक्षुणी हो गई. उसने समाधि की उच्चतम अवस्था का स्पर्श किया और पूर्णता प्राप्त भिक्षुणियों में वह एक हुई. अपने निरंतर जर्जरित होते हुए शरीर में बुद्ध-वचनों… Read More ›

अपने बच्चों के लिए एक चिठ्ठी

डॉ. प्रवीण चोपड़ा के ब्लॉग पर इस पोस्ट में दिखाए गए स्लाइड-शो ने सभी पाठकों को भावुक कर दिया. मेरे बच्चे अभी बहुत छोटे हैं लेकिन उनके साथ बिताए हर पल मेरी आंखों के सामने आ गए. तीन महीने पहले… Read More ›

सर्बिया की लोक-कथा : वृद्धजनों की प्राणरक्षा

प्राचीन काल में प्रथा थी की जब कोई व्यक्ति साठ वर्ष का हो जाता था तो उसे राज्य से बाहर जंगल में भूखों मरने के लिए भेज दिया जाता था ताकि समाज में केवल स्वस्थ और युवा लोग ही जीवित… Read More ›

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