मन

मन

“मेरे मन के साथ कुछ गड़बड़ है” शिष्य ने कहा, “मेरे विचार तर्कसंगत नहीं हैं”. गुरु ने कहा, “शांत सरोवर और उफनती नदी, दोनों जल ही हैं” शिष्य गुरु की बात नहीं समझ पाया और मुंह बाए देखता रहा. गुरु… Read More ›

मन और पत्थर

एक ज़ेन शिष्य ने गुरु से प्रश्न किया, “ज़ेन में ऐसा क्या है जो बहुत बुद्धिमान लोग भी इसे समझ नहीं पाते?” ज़ेन गुरु उठे, उन्होंने एक पत्थर उठाया और पूछा, “यदि झाड़ियों से एक शेर निकलकर हमारी ओर बढ़ने… Read More ›

चित्त की धूल

प्रत्येक व्यक्ति एक दर्पण है. सुबह से सांझ तक इस दर्पण पर धूल जमती है. जो मनुष्य इस धूल को जमते ही जाने देते हैं, वे दर्पण नहीं रह जाते. और जैसा स्वयं का दर्पण होता है, वैसा ही ज्ञान होता… Read More ›

मन के छिद्र बंद करो

रात्रि बीत गई है और खेतों में सुबह का सूरज फैल रहा है. एक छोटा सा नाला अभी-अभी पार हुआ है. गाड़ी की आवाज सुन चांदनी के फूलों से सफेद बगुलों की एक पंक्ति सूरज की ओर उड़ गई है…. Read More ›

मन और शांति

मनुष्य का मन अद्भुत है. वही संसार का और मोक्ष का रहस्य है. पाप और पुण्य, बंधन और मुक्ति, स्वर्ग और नर्क सब उसमें ही समाये हुए हैं. अन्धकार और प्रकाश उसी का है. उसमें ही जन्म है, उसमें ही… Read More ›

Follow

Get every new post delivered to your Inbox.

Join 7,790 other followers