Posts Tagged 'प्रेम'

समर्पण

समर्पण

सुबह के साढ़े आठ बजे थे. अस्पताल में बहुत से मरीज़ थे. ऐसे में एक बुजुर्गवार अपने अंगूठे में लगे…

प्रेम

प्रेम

(यह कथा ओशो ने अपने एक प्रवचन में कही है) “प्रेम क्या है?”. कल कोई पूछ रहा था. मैंने कहा…