गुरु-शिष्य

सत्य का धरातल : The Land of Truth

एक बार किसी आदमी को यह लगने लगा कि सामान्य जीवन में परिपूर्णता नहीं है और उसे सत्य की प्राप्ति करनी चाहिए. उसने ज्ञानी गुरु की खोज करना शुरू कर दिया. उसने बहुत से ग्रन्थ पढ़े, कई मठों में प्रवेश… Read More ›

परम सत्य

“लोग अक्सर ही सत्य को भूल क्यों जाते हैं”, यात्री ने गुरु से पूछा. “कैसा सत्य?”, गुरु ने पूछा. “मैं जीवन में कई बार सत्य के मार्ग से भटक गया”, यात्री ने कहा, “और हर बार मैं किसी भांति मार्ग… Read More ›

जीवन का आनंद

“इस साल मैंने अपने जीवन का पूरी तरह से आनंद लिया”, शिष्य ने गुरु से कहा. “अच्छा?”, गुरु ने पूछा, “क्या-क्या किया तुमने?” “सबसे पहले मैंने गोताखोरी सीखी”, शिष्य ने कहा, “फिर मैं दुर्गम पर्वतों पर विजय पाने के लिए… Read More ›

चुनाव

शिष्य ने गुरु से पूछा, “यदि मैं आपसे यह कहूं कि आपको आज सोने का एक सिक्का पाने या एक सप्ताह बाद एक हज़ार सिक्के पाने के विकल्प में से एक का चुनाव करना है तो आप क्या लेना पसंद… Read More ›

मन

“मेरे मन के साथ कुछ गड़बड़ है” शिष्य ने कहा, “मेरे विचार तर्कसंगत नहीं हैं”. गुरु ने कहा, “शांत सरोवर और उफनती नदी, दोनों जल ही हैं” शिष्य गुरु की बात नहीं समझ पाया और मुंह बाए देखता रहा. गुरु… Read More ›

परिवर्तन

ज़ेन शिष्य ने गुरु से पूछा, “मैं दुनिया को बदलना चाहता हूँ? क्या यह संभव है?” गुरु ने पूछा, “क्या तुम दुनिया को स्वीकार कर सकते हो?” शिष्य ने कहा, “नहीं, मैं इसे स्वीकार नहीं कर सकता. यहाँ युद्ध, गरीबी,… Read More ›

मन और पत्थर

एक ज़ेन शिष्य ने गुरु से प्रश्न किया, “ज़ेन में ऐसा क्या है जो बहुत बुद्धिमान लोग भी इसे समझ नहीं पाते?” ज़ेन गुरु उठे, उन्होंने एक पत्थर उठाया और पूछा, “यदि झाड़ियों से एक शेर निकलकर हमारी ओर बढ़ने… Read More ›

प्रवाह

  एक ज़ेन शिष्य ने गुरु से पूछा, “क्या आप मुझे जीवन में सदैव काम आनेवाली सलाह देंगे?” गुरु ने कहा, “अवश्य, हर परिस्थिति के अनुरूप स्वयं में परिवर्तन लाते रहो.” शिष्य ने कहा, “हम्म… क्या आप मुझे कुछ सरल… Read More ›

घृणा

  एक ज़ेन संन्यासी ने अपने गुरु से पूछा, “हमें अपने शत्रुओं से कैसा व्यवहार करना चाहिए?” गुरु ने कहा, “तुम अपने शत्रुओं से केवल घृणा ही कर सकते हो?” शिष्य ने अचरज से कहा, “ऐसा कहकर क्या आप घृणा… Read More ›

उचित-अनुचित

“क्या आप उचित-अनुचित में विश्वास करते हैं?”, युवक ज़ेन संन्यासी ने अपने गुरु से पूछा. गुरु ने उत्तर दिया, “नहीं, मैं इनमें विश्वास नहीं करता.” “लेकिन कल ही मैंने आपको एक निर्धन व्यक्ति को दान देते देखा. यदि आप उचित… Read More ›