कलाकार

प्रार्थना के हाथ : The Praying Hands

पंद्रहवीं शताब्दी में वर्तमान जर्मनी के न्यूरेमबर्ग शहर के समीप एक गाँव में एक परिवार रहता था जिसमें १८ बच्चे थे. इतने सारे बच्चों को भोजन उपलब्ध कराने के लिए परिवार का मुखिया अर्थात उन बच्चों का पिता प्रतिदिन अठारह… Read More ›

साल्वाडोर डाली

रेखांकन सबसे ईमानदार कला है. इसमें धोखाधड़ी की गुंजाईश नहीं है. रेखाचित्र या तो अच्छा होता है या बेकार. परिपूर्णता से मत डरो. यह तुम्हें कभी नसीब नहीं होगी! मैं किसी शख्स के चेहरे से मेल खाता पोर्ट्रेट नहीं बनाता… Read More ›

जॉर्जो मोरांदी

जॉर्जो मोरांदी (1890 – 1964) महान इतालवी चित्रकार थे। उन्होंने बहुत सीमित रंगों का उपयोग करके असंख्य ‘स्टिल लाइफ़’ चित्र बनाए. उनके चित्रों में एक-सी घरेलू वस्तुओं का फीका संयोजन बहुतायत में दीखता है। उनके बाद के लगभग सभी चित्रकारों… Read More ›

फलों के चित्र – पॉल सेज़ां

मुझे फलों के चित्र बनाना अच्छा लगता है. वे चुपचाप दीवार पर टंगे हुए अपने रंग उड़ने की माफी मांगते हैं. उनकी सुगंध से विचार जन्म लेते हैं. इन चित्रों में वे अपनी खुशबू लेकर आते हैं और  उनकी छूटी… Read More ›

ग्राउचो मार्क्स के बोलवचन

ग्राउचो मार्क्स (1890 – 1977) अमेरिकन कॉमेडियन और फिल्म-स्टार थे. वे अपनी हाज़िर जवाबी और चुटीले कथनों के लिए जाने जाते हैं. आज हिन्दीज़ेन के पाठकों के लिए हर बार से हटकर कुछ अलग. पसंद आनेपर टिप्पणियों में बताइए. 01… Read More ›

माइकलेंजेलो की कलासाधना

जिन लोगों को इटली के सिस्टाइन चैपल (गिरजाघर) में जाने का सौभाग्य प्राप्त हुआ है वे उसकी भीतरी छत पर अंकित कलाकृतियों को देखकर दांतों तले उंगली दबा लेते हैं. बाइबिल में वर्णित सृष्टि की पूरी कथा वहां पर चित्रों… Read More ›

कुंदनलाल सहगल की बेजोड़ मानवता

बोलती फिल्मों का दौर बीत जाने के बाद जिस आवाज़ को हिन्दुस्तानी जनता का अपार प्रेम मिला वह कुंदनलाल सहगल की आवाज़ थी. मैं खुशकिस्मत हूँ कि अपने परिवार में पुराने संगीत के प्रति लगाव होने के कारण मैं बचपन… Read More ›

पिकासो के रोचक संस्मरण – भाग 2

पाब्लो पिकासो की महान सफलता उनके स्कूल शिक्षकों के लिए बहुत बड़ा आघात थी. पिकासो ने दस वर्ष की अवस्था में स्कूल छोड़ दिया था क्योंकि उन्हें पढने-लिखने में दिक्कत होती थी. वे वर्णमाला के अक्षर याद नहीं रख पाते… Read More ›

पिकासो के रोचक संस्मरण – भाग 1

एक बार पिकासो की बातचीत एक अमेरिकन सेनाधिकारी से हो रही थी. बातों-बातों में अधिकारी ने पिकासो से कहा कि उसे अमूर्त चित्रकला पसंद नहीं है क्योंकि वह अयथार्थवादी होती है. पिकासो ने इसका कोई जवाब नहीं दिया. बातों का… Read More ›

कलाकार की करुणा

महान फ्रांसीसी मूर्तिकार ऑगस्त रोदाँ (August Rodin) को एक सरकारी इमारत का प्रवेश द्वार सुसज्जित करने के लिए कहा गया। उस द्वार पर और उसके इर्दगिर्द मूर्तियाँ लगाई जानी थीं। ज्यों-ज्यों रोदाँ काम करते गए, दरवाजे का आकार भी बढ़ता… Read More ›