भौतिकी का भविष्य : फिजिक्स ऑफ़ द इम्पोसिबल

Michio Kaku

आज अपने किताबों के ढेर में कुछ खोजते वक्त मुझे जापानी मूल के अमेरिकी सैद्धांतिक भौतिकशास्त्री मिशियो काकू की किताब “फिजिक्स ऑफ़ द इम्पोसिबल” दिख गई. काकू फ्यूचुरिस्ट भी हैं और भविष्य में विज्ञान की दिशा और दशा के क्षेत्र में उन्होंने बहुत लिखा है. डिस्कवरी चैनल पर भी कई प्रोग्राम में वे अक्सर दिखते रहते हैं.

“फिजिक्स ऑफ़ द इम्पोसिबल” किताब 2008 में आई थी. भौतिकी से हमारा बहुत गहरा नाता है भले ही हम एक विषय के रूप में इसका अध्ययन नहीं करते हों. अनेक क्षेत्रों में हो रही प्रगति के पीछे लाखों वैज्ञानिकों की मेहनत और समर्पण है. वे नित-नई तकनीकें विकसित कर रहे हैं जो हमारे जीवन को अधिक आसान बना रही हैं. लेकिन प्राचीन काल से लेकर आज तक विज्ञान के क्षेत्र में हो चुकी प्रचंड प्रगति के बाद भी अभी ऐसे कई प्रश्न और विषय हैं जिनके सम्बन्ध में केवल अटकल ही लगाई जा सकती है या उन्हें सिरे से खारिज कर दिया जाता है. जैसा कि नाम से ही स्पष्ट है, इस किताब में काकू ने निकट भविष्य से लेकर लाख सालों के भीतर संभव हो सकनेवाले ऐसे अविष्कारों और सिद्धांतों का अनुमान लगाने का प्रयास किया है जो आज असंभव लगते हैं पर ऐसे भविष्य का निर्माण कर सकते है जो किसी जादू से कम नहीं होगा.

यह इस किताब का परिचय मात्र है, विधिवत समीक्षा नहीं. किताब में दिए गए अनूठे विचारों की तह में जाये बिना उनका महत्व नहीं समझा जा सकता. इस पोस्ट में मैं केवल यह बताऊँगा कि काकू के अनुसार भविष्य में भौतिकी किन प्रश्नों का उत्तर किस प्रकार और कब तक दे सकेगी.

काकू ने किताब में वर्णित संभावनाओं को मोटे-मोटे तीन वर्गों में बांटा है. पहले वर्ग की संभावनाएं वे हैं जो आज अस्तित्व में नहीं हैं पर वे भौतिकी के किसी ज्ञात नियम का उल्लंघन नहीं करतीं. यह संभव है कि हममें से कई लोग अपने जीवन काल में अथवा अगली शताब्दी तक लोग इन्हें किसी-न-किसी रूप में वास्तविक जीवन में देख सकें. ये संभावनाएं निम्नलिखित हैं.

1. फ़ोर्स फील्ड – ऐसा अदृश्य आवरण जो नगरों, वायुयानों, और व्यक्तियों की किसी भी हमले से रक्षा कर सके. इसे विज्ञान कथाओं में बहुत दिखाया जाता है. 
2. अदृश्यता –
क्या ऐसी तकनीक या ऐसे मैटेरियल हैं जो मनुष्यों को अदृश्य कर सकते हों? 
3. फेज़र्स और डेथ स्टार –
प्रलयंकारी किरणें और प्रक्षेपास्त्र जो पल भर में ही करोड़ों व्यक्तियों के प्राण हर सकते हों. भयानक. 
4. टेलीपोर्टेशन –
ठोस सामग्री को एक स्थान से दूसरे स्थान तक पहुंचाना, जैसे फैक्स पहुँचता है. 
5. टेलीपैथी –
दूसरों के मानस तक सन्देश भेजना. 
6. साइकोकाइनेसिस –
जीवित प्राणियों और अजीवित पदार्थों को ‘अद्वितीय शक्ति’ का प्रयोग करके प्रभावित करना, जैसे, मशीनें चलाना, चीज़ें हिलाना, घायल कर देना आदि.
7. रोबोट्स –
शतरंज खेलने और गुणा-भाग करनेवाले नहीं बल्कि सुख-दुःख में शरीक होने वाले मददगार रोबोट्स, या फिर मानवता का नाश करनेवाली शैतानी मशीनें?
8. परग्रहवासियों से संपर्क
और उनके यानों का अवलोकन. 
9. महानगरों जितने बड़े अंतरिक्ष यान,
जैसे स्टार-ट्रेक में दिखाए गए थे. 
10. एंटी-मैटर या एंटी-यूनिवर्स –
क्वांटम भौतिकी का भविष्य.

दूसरे वर्ग में वे संभावनाएं या असम्भावनाएँ हैं जिनके लिए आवश्यक तकनीक की खोज करना फिलहाल तो मुमकिन नहीं है लेकिन यदि ये संभव हैं तो इसमें हजारों से लेकर एक लाख वर्ष तक लग सकते हैं. ये चीज़ें हैं:-

1. प्रकाश से भी तेज गति से यात्रा करना अर्थात एक सैकंड में तीन लाख किलोमीटर से भी अधिक की गति से यात्रा! 
2. टाइम-ट्रेवल –
भूतकाल या भविष्य की यात्रा, पर कैसे? 
3. समानांतर ब्रह्माण्ड –
क्या ऐसे अनंत विश्व भी हैं जहाँ आप, हम और सभी कुछ वैसे ही घटित हो रहा है जैसे ‘यहाँ’ हो रहा है? 

तीसरे वर्ग में वे संभावनाएं या असम्भावनाएँ हैं जो भौतिकी के ज्ञात नियमों का उल्लंघन करती हैं. यदि इनमें से एक भी संभव हो गयी तो हमारे वर्तमान ज्ञान की सारी धारणा बदलनी पड़ेगी. ये हैं:-

1. शाश्वत गति की खोज – मशीन को एक बार चला दो तो वह स्वतः अनंत काल तक चलती रहे, कार्य करे, आदि. जैसे एक डायनामो को मोटर से जोड़ दें तो. डायनामो को घुमाने पर बिजली बने जो मोटर को घुमाये, वही मोटर फिर डायनामो को घुमाये… कितना सरल लगता है न? 
2. प्रिकोग्नीशन –
साफ़-साफ़ कहें तो भविष्य और उसमें होनेवाली घटनाओं का ज्ञान होना. यह कार्य-कारण के नियम का उल्लंघन होगा. 

काकू स्पष्ट कहते हैं कि भले ही आज इन संभावनाओं या असंभावनाओं को स्वप्न या गल्प कहकर खारिज कर दिया जाए लेकिन भविष्य में इनमें से कुछ तो ज़रूर सही साबित होंगी. विश्वास न हो तो कल्पना करें कि विश्व सन 1900 में कैसा था और आज कैसा है. ज्यादा नहीं तो आज से पच्चीस साल पीछे ही लौटकर देख लें, बात समझ में आ जाएगी:)

काकू की यह किताब लगभग 350 पेज की है और काफी रोचक है. इसे पढने के लिए भौतिकी के विद्यार्थी होने की आवश्यकता नहीं है. इसी जैसी अन्य कई रोचक किताबें मैंने पढी हैं जिनके बारे में आपको बताता रहूँगा. Photo by Alex Knight on Unsplash

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There are 2 comments

  1. pushpendra dubey

    हमारे यहाँ नारद मुनि गुरुत्वाकर्षण के नियम का उल्लंघन करते हुए पूरे ब्रहमांड में बिना यान के घूमते रहते हैं, भौतिक शास्त्र इसे सिद्ध कर सकता है . पुस्तक की जानकारी देने के लिए धन्यवाद. इससे सम्बंधित और जानकारियाँ दीजिये . इन्तजार रहेगा .

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