नवजात शिशु अपनी मुठ्ठी हमेशा बंद क्यों रखते हैं?

आपका ध्यान कभी इस ओर गया है कि नवजात शिशुओं की मुठ्ठी हमेशा बंद क्यों रहती है? विकासवाद से संबंधित एक पिछली पोस्ट में पामर ग्रेप्स रिफ्लैक्स के बारे में बताया गया था जो वानर प्रजातियों के नवजात शिशुओं को उनकी माता को बड़ी मजबूती से पकड़ने में सहायता देता है. आप यदि बच्चों के किसी डॉक्टर से इस बारे में पूछेंगे तो वो भी यही बताएगा कि नवजात शिशु पामर ग्रेप्स रिफ्लैक्स के कारण अपनी मुठ्ठी बंद रखते हैं.

लेकिन यह तो हमारे प्रश्न का पूरा उत्तर नहीं है. अब यह प्रश्न खड़ा होता है कि हमारे नवजात शिशुओं में पामर ग्रैप्स रिफ्लैक्स क्यों होता है? यह प्रश्न पूछने पर डॉक्टर अपनी भाषा में आपको समझाने का प्रयास करेंगे लेकिन समझा नहीं पाएंगे.

इसलिए हमें यह प्रश्न कुछ अलग तरह से पूछना होगा, “प्रकृति को यह ज़रूरी क्यों लगता है कि नवजात शिशुओं को अपनी मुठ्ठी पूरे समय बंद रखनी चाहिए?”

अब इस प्रश्न का जो उत्तर निकलकर आएगा उससे आप प्रकृति द्वारा की गई व्यवस्था के बारे में जानने पर अचंभित रह जाएंगे.

प्रकृति को यह बात बहुत ज़रूरी लगती है. प्रकृति इससे भी आगे बढ़कर कुछ करती है. नवजात शिशु जब अपनी मुठ्ठी बंद करते हैं तो उनका अंगूठा मुठ्ठी के भीतर रहता है जबकि हम सभी अपना अंगूठा बाहर रखते हैं. फेसबुक पर किसी ने एक सुंदर फोटो पोस्ट की है (नीचे) जिसमें आप मुठ्ठी बंद करने से जुड़ा यह अंतर भली भांति देख सकते हैं.

आपन देखा किस तरह नवजात शिशु अपने अंगूठे को मुठ्ठी के भीतर कर लेते हैं? वे ऐसा क्यों करते हैं? यह बहुत अजीब मुद्रा है और ऐसा करना सहज नहीं होता. लेकिन वे ऐसा जन्म लेने के कुछ समय बाद तक ही करते हैं. मां के गर्भ से बाहर आने के कुछ दिनों तक वे ऐसे ही मुठ्ठी बंद रखते हैं फिर धीरे-धीरे हम लोगों की तरह बंद करने लगते हैं.

इसका कारण यह है कि प्रकृति कुछ भी अकारण नहीं करती. नवजात शिशु के इस प्रकार मुठ्ठी बंद करने के पीछे भी एक बहुत महत्वपूर्ण कारण है. लेकिन पहले तो आप यह सोचिए कि यदि वे हर समय अपनी मुठ्ठी इस तरह बंद नहीं रखेंगे तो क्या हो जाएगा?

पहले तो आप यह जान लें कि मां के गर्भ में बच्चे के खुले हाथ बहुत सारी गड़बड़ कर सकते हैं. फिर भी अंगूठे को मुठ्ठी के भीतर रखने की क्या ज़रूरत है? नवजात शिशुओं का कमज़ोर सा दिखनेवाला नन्हा सा अंगूठा भला क्या गड़बड़ कर सकता है?

अब हम अपने प्रश्न के उत्तर तक आ गए हैं. हमें यह जानना ज़रूरी है कि स्त्री के गर्भ के भीतर सबसे नाज़ुक चीज बच्चा नहीं होता बल्कि वह पतली झिल्लीदार एम्नियोटिक थैली (amniotic sac) होती है जिसमें बच्चा लिपटा होता है. इस थैली में बच्चे को पोषण देने वाला एम्नियोटिक द्रव भरा होता है. इस थैली को मामूली खरोंच या चुभन भी इतनी क्षति पहुंचा सकती है कि बच्चे को गंभीर नुकसान पहुंच सकता है. डॉक्टर भी गर्भवती स्त्री की जांच वगैरह करते वक्त पूरी सावधानी बरतते हैं ताकि एम्नियोटिक सैक को कोई खतरा न हो.

इसलिए मनुष्यों के नवजात शिशुओं के हाथों में होनेवाला पामर ग्रैप्स रिफ्लैक्स मां को मजबूती से जकड़ने के लिए नहीं बल्कि एम्नियोटिक सैक को नाखूनों की खरोंच से बनाने के लिए है. नवजात शिशुओं के नाखून बहुत छोटे और पतले होते हैं लेकिन उनमें बहुत धार होती है. मुठ्ठी बंद होने पर और अंगूठे के मुठ्ठी के भीतर होने पर प्रकृति यह सुनिश्चित कर देती है कि मां और शिशु दोनों सुरक्षित रहें.

लेकिन नाखून तो पैरों में भी होते हैं, और पैरों को तो मुठ्ठी की तरह नहीं सिकोड़ा जा सकता? और गर्भ में शिशु अपने पैर चलाते रहते हैं. फिर पैरों की उंगलियों के नाखूनों से एम्नियोटिक थैली को नुकसान क्यों नहीं पहुंचता?

इसका उत्तर भी बहुत रोचक है. आपको कभी मौका मिले तो नवजात शिशु के पैरों के नाखून गौर से देखिएगा. आप देखेंगे कि उनके पैरों के नाखून उंगलियों और अंगूठे के नाखून की तरह बाहर निकले नहीं होते बल्कि इस प्रकार से धंसे हुए होते हैं कि उनके धारदार किनारे पैरों के अंगूठे और उंगलियों की स्किन के नीचे दब जाते हैं. यही कारण है कि नवजात शिशुओं के हाथों के नाखून काटने की ज़रूरत पड़ती है लेकिन पैरों के नाखून काटने का समय बहुत बाद में आता है. प्रकृति को यह पता है कि पैरों के नाखून हाथों के नाखूनों की तरह मुठ्ठी में नहीं छुप सकते इसलिए यह व्यवस्था की गई है कि वे चारों ओर से स्किन घिरे रहें ताकि उनके धारदार किनारे कहीं खरोंच न लगा सकें.

अब एक प्रश्न और उठता है: यदि गर्भस्थ शिशु किसी कारण से अपनी मुठ्ठी बंद नहीं कर सके तो क्या होगा?

ऐसा होने पर सबसे सामान्य बात यह हो सकती है कि उसके नाखून एम्नियोटिक झिल्ली को नुकसान पहुंचा दें, जिसके अलग-अलग परिणाम हो सकते हैं लेकिन इससे अंततः नुकसान ही होता है. गर्भस्थ शिशु के मुठ्ठी बंद नहीं कर पाने पर एक अन्य गंभीर जटिलता हो सकती है जिसे एम्नियोटिक बैंड सिंड्रोम (amniotic band syndrome) कहते हैं. आपने ऐसे शिशु या व्यक्ति कभी देखे होंगे जिनके जन्म से ही कोई हाथ या अंगलियां या पंजे या हाथ-पैर का कोई भाग नदारद होता है. यह बहुत ही दुर्भाग्यपूर्ण स्थिति होती है और मेडिकल साइंस यह मानता है कि ऐसा तब होता है जब नवजात शिशु के हाथों या पैरों के प्रहार से एम्नियोटिक झिल्ली की परत टूट उखड़ जाती है और उसके टुकड़े या रेशे शिशु के हाथ या पैर के साथ लिपटकर उन हिस्सों की बढ़त रोक देते हैं. लेकिन ऐसा शिशु के नाखूनों या हाथ-पैर के झिल्ली से टकराने पर हमेशा नही होता. कभी-कभी यह अचानक अपने आप ही हो जाता है और इसके कारणों का अभी तक पता नहीं चला है.

By William Adams, Pediatrician (1981-present). Featured image.

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