अपने पर्सनल डेवलपमेंट के लिए ये दस काम रोज़ कीजिए

मैं सेल्फ़ डेवलपमेंट या पर्सनल डेवलपमेंट को लेकर हमेशा से ही बहुत उत्साहित हूं. मैं इसे ऐसी कला के रूप में देखता हूं जिसे साधने में पूरा जीवन भी लग सकता है.

यहां मैं आपको ऐसे 10 काम बता रहा हूं जिन्हें यदि आप लगन पूर्वक हर दिन करेंगे तो आपके व्यक्तित्व में बहुत निखार आएगा. आपकी पर्सनालिटी जब चमकेगी तो उसका असर आपके जीवन के हर पक्ष पर पड़ेगा. लोग आपको पसंद करेंगे. आपसे प्रभावित होंगे. आपके काम-काज की सराहना होगी.

1. उन चीजों के बारे में पढ़िए जिन्हें आप खुद में सुधारना चाहते हैं.

क्या कोई ऐसी स्किल है जिसमें आप निपुण होना चाहते हैं? क्या आपकी अंग्रेजी खराब है? आपको खाना बनाना नहीं आता? आप हिंदी टाइपिंग कर सकते हैं?

इनके बारे में पढ़िए. किताब नहीं खरीदना चाहते हों तो नेट पर पढ़िए. उन वेबसाइट्स की खोज कीजिए जो इन स्किल्स के बारे में अच्छे से समझाती हैं.

किताब पढ़ने का एक फ़ायदा यह है कि यह हमें एकाग्र करती है. हमारा ध्यान एक ही जगह पर बनाए रखती है.

यहा आप अधिक प्रोडक्टिव बनना चाहते हैं? अपने काम मे तेजी लाना चाहते हैं? ज्यादा मिलनसार बनना चाहते हैं? आत्म-विश्वास बढ़ाना चाहते हैं?

ये सारे टॉपिक्स और ऐसे ही अनगिनत टॉपिक्स पर दुनिया भर के अच्छे लेखकों ने बहुत बेजोड़ किताबें लिखी हैं. किताबें खरीदिए और उन्हें समय निकालकर पढ़ने की आदत डालिए. अच्छी बातें आपके मन-मस्तिष्क में समाती जाएंगी.

2. अपने मेंटर को खोजिए.

मेंटर किसे कहते हैं? मेंटर वह व्यक्ति है जो आपके गुरु, मित्र, गाइड की भूमिका निभाता है. ऐसा व्यक्ति कोई बुजुर्ग भी हो सकता है और अापका कोई हमउम्र दोस्त भी जिस जैसा आप बनना चाहते हों. मेंटर वह व्यक्ति है जिसने दुनिया देखी है और जो उन बातों के बारे में आपको बताता है जो आप नहीं जानते. मेंटर आपके बारे में, आपकी फ़ील्ड के बारे में, आपके भविष्य की दिशा के बारे में आपको गहराई से बता सकता है.

आप खोजेंगे तो आपको अपना मेंटर ज़रूर मिलेगा. मेंटर की बातों को ध्यान से सुनें और उसके सुझावों को जीवन में उतारने की पूरी कोशिश करें. उस व्यक्ति को अपना मेंटर बनाइए जिसने अपने जीवन में अभूतपूर्व सफलता हासिल की हो. यह ज़रूरी नहीं कि आपका मेंटर बहुत प्रसिद्ध व्यक्ति हो. वह कोई साधारण सा दिखनेवाला अनुभवी दुकानदार भी हो सकता है और कई असफल स्टार्टअप से गुजरते हुए अंततः सफल होने वाला कोई युवक भी.

किताबें आपको बहुत कुछ सिखा सकती हैं लेकिन मेंटर के साथ मिलकर सीखने का मुकाबला दुनिया की कोई बात नहीं कर सकती. यह सीखने का सबसे तेज उपाय है.

3. दिन की समाप्ति पर पूरे दिन का लेखा-जोखा लीजिए.

एक दिन में आप बहुत कुछ कर सकते हैं. यदि आप पर्सनल डेवलपमेंट को गंभीरता से लेते हों तो आपका ध्यान हमेशा इस ओर होना चाहिए कि आप अपने जीवन में किस तरह अधिक-से-अधिक सुधार ला सकते हैं.

पर्सनल डेवलपमेंट बहुत बड़ा अनुशासन है. यह बहुत अधिक संकल्प शक्ति और ऊर्जा मांगता है. खुद को बदलना चाहनेवाले अधिकांश व्यक्ति इसके बारे में केवल पढ़ते ही रहते हैं या इसकी चर्चा करते रहते हैं. 

आप दिन भर में जो कुछ भी करते हों उसका हिसाब-खिताब रात को सोने से पहले ज़रूर करें. यह ज़रूर देखें कि आपने दिन भर में कितना समय यारी-दोस्ती में या यू-ट्यूब और वॉट्सअप में व्यर्थ कर दिया. इतने समय में कोई महत्वपूर्ण चीज करी या सीखी जा सकती थी.

अपना एसेसमेंट करते रहिए. खुद से पूछिए कि जीवन के किन पक्षों पर आपको अधिक ध्यान देने की ज़रूरत है.

4. अपना पर्सनल हैबिट सिस्टम बनाइए.

अच्छी आदतों से ही अच्छे परिणामों की प्राप्ति होती है. केवल परिणामों के बारे में सोचते रहने से कुछ नहीं होता.

आपके सोच लेने भर से ही जीवन में सुधार नहीं आने लगता. यदि आप खुद में व्यापक बदलाव लाना चाहते हैं तो आपको कुछ कठोर और निर्मम बनना पड़ेगा. फौज के ट्रेनर नए रंगरूट के साथ जितना कठोर बर्ताव करते हैं वैसा ही आपको खुद के प्रति करना पड़ेगा. आप यही जीवन जीते-जीते कुछ और बनने के सपने कब तक देखते रहेंगे? आपको ऐसा पर्सनल डेवलपमेंट सिस्टम बनाना पड़ेगा जहां आप सबसे आसान चीजों से शुरुआत करते हुए आगे बढ़ते चलो.

सबसे आसान क्या हो सकता है? यकीन मानिए लेकिन यदि आप सुबह देर तक सोने वाले प्राणी हों तो सुबह एक घंटे पहले उठना किसी यातना से कम नहीं होता. इसलिए सबसे पहले आसान और छोटा लक्ष्य बनाइए. एक घंटे पहले उठने की बजाए एक सप्ताह तक केवल 15 मिनट पहले उठें. फर्क महसूस होगा. जब यह आदत ढल जाए तो दूसरी आदत को ढालने की कोशिश करें.

5. उनके साथ समय बिताइए जिनके लक्ष्य आप जैसे हों.

पर्सनल डेवलपमेंट को किसी सोलो वीडियो गेम की तरह नहीं होना चाहिए. असलियत में आप तब अधिक निखरते हैं जब आप इसे दूसरों के साथ तालमेल बिठाते या कंपिटीशन करते हुए करते हैं.

इसलिए यह आपके हित में होगा कि आप उन लोगों के साथ अधिक-से-अधिक समय बिताएं जो आपकी ही मंजिल के यात्री हों. जिस तरह किसी प्रतियोगिता की तैयारी अकेले रहकर करने में रस नहीं आता उसी तरह अपने व्यक्तित्व का विकास भी सामूहिक रूप से करने में परिणाम तेजी से मिलते हैं. यह एक स्वस्थ प्रतिस्पर्धा के वातावरण को जन्म देता है. आप चाहें तो मैदान में अकेले भी फुटबॉल खेल सकते हैं लेकिन कोई एक दोस्त भी साथ मिल जाए तो गेम बहुत चैलेंजिंग भी बन जाता है और रोचक भी.

6. खुद को ईमानदारी से पुरस्कार/दंड दें.

यह उन लोगों के लिए बहुत ज़रूरी है जो बुरी आदतों के चंगुल में फंसे हैं और उन्हें छोड़ नहीं पा रहे हैं.

इसके लिए यह तय कर लीजिए कि किसी विशेष लक्ष्य को प्राप्त कर लेने पर आप खुद को एक रिवार्ड देंगे. यह रिवार्ड किसी भी रूप में हो सकता है. कई दिनों तक जंक-फूड से दूर रहने का रिवार्ड शानदार आइस्क्रीम भी हो सकती है और सिनेमा हॉल में एक मूवी भी. जिन बुरी आदतों के कारण आपके पैसे बरबाद हो रहे थे उन्हें छोड़ने पर बचनेवाले पैसों से अपने लिए उपयोगी सामान जैसे किताबें या जूते खरीदिए.

यदि किसी दिन दोस्तों से बातें करने में बहुत अधिक समय निकल गया हो तो खुद को सज़ा देने के लिए अपने फोन को कुछ घंटों के लिए स्विच ऑफ़ कर लें. यकीन करें, उन कुछ घंटों में दुनिया बरबाद नहीं हो जाएगी. खुद से आपने जो वादे किए हैं उन्हें यदि आप किसी वज़ह से तोड़ दें अपने ऊपर कठोर अनुशासन लागू करके ऐसा दंड़ निर्धारित करें कि अगली बार आपको अपने तय मार्ग से विचलित होने में आसानी नहीं हो.

7. अपने प्रति ईमानदार और जवाबदेह रहें.

टालमटोल करते रहने और हर काम को बाद में करने की बात करते रहने से आप कहीं नहीं पहुंचेंगे. वास्तविक परिवर्तन तभी आएगा जब जमीनी हकीक़त पर आपमें कोई सॉलिड चेंज आएगा.

यह इस लिस्ट की सबसे कठिन बात है. यदि यह एक बात ही सध जाए तो बाकी सारे काम आसान हो जाते हैं. इसे साधने के लिए आप पिछली पोस्ट पढ़ें जहां मैंने यह बताया है कि हमारे पास समय की बहुतायत नहीं है. हमारा टाइम बहुत लिमिटेड है और उतने में ही हमें बहुत कुछ करना है. यदि हम हर बात को टालते रहेंगे तो हम कहीं के नहीं रहेंगे.

किताब खरीदना बहुत आसान बात है. किताब को साथ में लेकर घूमना भी बहुत आसान है. किताब को पूरी पढ़ लेना भी कठिन नहीं है, लेकिन उस किताब में दी गई सलाह को अपने जीवन में पूरी तरह से सफलता से उतार लेना वाकई बहुत कठिन काम है. ऐसा मैं इसलिए कह रहा हूं कि मैं न जाने कितनी ही बार इसमें असफल रहा हूं. 

यदि मैं टालमटोल करते रहने से मुझे हो चुके नुकसान और इस आदत से निकलने के मेरे प्रयासों के बारे में लिखने बैठूं तो पूरा ब्लॉग भर जाएगा. इसलिए आप मुझमें भरोसा करें और यह मान लें कि खुद के प्रति ईमानदार होने के सिवाय आपको पास कोई चॉइस नहीं है. 

आपको अपना ही न्यायाधीश बनना है. अपने जीवन के बारे में आपको ही फैसला करना है. कोई दूसरा इसमें आपकी मदद नहीं कर सकता.

8. अपने लिए रोल मॉडल्स ढूंढिए.

मैं इस बात को बार-बार कहता हूं कि सेल्फ़-डेवलपमेंट आसान नहीं है. यह कोई स्किल नहीं है जिसे कोई थोड़े से प्रयासों से सीख ले. यह जीवन को जीने का एक तरीका है. रिफ़ाइंड तरीका. इसलिए उन लोगों की ओर देखिए जो इन तरीकों को अपने जीवन में उतार चुके हैं. इंटरनेट की दुनिया ऐसे लोगों से भरी है जो आपके रोल मॉडल बन सकते हैं. इनमें से अनेक लोग जीवन की कई विषमताओं और त्रासदी का सामना करके उठ खड़े हुए हैं. आप उनपर भरोसा कर सकते हैं. उनकी प्रेरणा देने वाली पोस्टों और प्रसंगों को पढ़ने पर आप खुद में आशा का संचार कर सकते हैं.

मैं मुख्यतः Quora और Medium वेबसाइट्स पर ऐसे बहुत से व्यक्तियों को फ़ॉलो करता हूं. मैंने उनसे बहुत कुछ सीखा है. वे मेरे रोल मॉडल हैं. मैं कई सिंगर्स और ऐक्टर्स  को पसंद करता हूं लेकिन वे मेरे रोल मॉडल नहीं हैं. वे मुझे ज़िंदगी को बेहतर जीने के तरीके नहीं सिखाते. मैं इटरनेट का उपयोग मनोरंजन के लिए नहीं बल्कि खुद को इंप्रूव करने के लिए करता हूं. यदि आप मेरे रोल मॉडल्स के बारे में जानना चाहते हैं तो मेरा मीडियम प्रोफ़ाइल देख सकते हैं.

9. अपनी प्रगति को आंकते रहिए.

मेरे एक मेंटर ने मुझसे कभी कहा था, “यदि तुम अपनी प्रगति को माप नहीं सकते तो कुछ भी करने में सार नहीं है.”

इस वाक्य का अर्थ मुझे बहुत समय के बाद समझ में आया. आप कितनी ही सतही या कितनी ही महान लगने वाली गतिविधि कर रहे हों लेकिन यदि आप उससे आने वाले बदलाव का आकलन नहीं कर पा रहे हों तो आप वास्तव में कुछ नहीं कर रहे हैं. आपको खुद में आनेवाले परिवर्तनों की गति को नापने का कोई पैमाना विकसित करना होगा.

इसी से आपके सही राह पर होने की पहचान होगी. यदि आप इसे करने में सक्षम हो जाएंगे तो आपको स्वयं ही यह पता चलने लगेगा कि आपको कब किस कार्य में कितनी ऊर्जा लगानी है, किस चीज में वृद्धि लानी है और किसमें कमी लानी है. अपने लक्ष्य को प्राप्त करने में आनेवाली कठिनाइयों के समाधान करना तब आपके लिए सरल हो जाएगा.

10. लगन और धैर्य ही सफलता की कुंजी है.

केवल लगन से काम नहीं चलता. कुछ काम हम बहुत जोश और उमंग से शुरु कर देते हैं लेकिन समय बीतने के साथ-साथ हमारा हौसला मंद पड़ने लगता है.

सेल्फ़-डेवलपमेंट रातों-रात नहीं होता. हो ही नहीं सकता. इसके लिए अपार धैर्य भी चाहिए.

यह बहुत ही धीमी गति की प्रक्रिया है और इसे बहुत तेज गति से नहीं होना चाहिए. जो जितनी तेजी से ऊपर उठने की सोचता है वह उतनी ही तेजी से नीचे भी गिरता है.

इसीलिए खेल का मैदान हो या ज़िंदगी की जंग, कंसिस्टेंसी बनाए रखना बहुत ज़रूरी है. यदि कंसिसंटेंसी हो तो व्यक्तित्व में होनेवाले परिवर्तन अधिक गहराई तक समाकर पकड़ बना लेते हैं. फिर वे आपको अपने पथ से भटकने नहीं देते. वे आपके सुदृढ़ कैरेक्टर और कंडक्ट की रचना करते हैं. धैर्यपूर्वक लगन से कर्म करते रहना इस प्रक्रिया की सबसे कठिन बात है. ये किसी टैबलेट की तरह नहीं है जिसे पानी से गटक लिया और हो गया.

किसी भी औसत व्यक्ति के लिए सेल्फ़-डेवलपमेंट या पर्सनल डेवलपमेंट कर पाना कठिन होता है. यह पूरा समर्पण, अनुशालन, जागरुकता और परिश्रम मांगता है. इसे अपनी जीवनशैली का अंग बनाए बिना आप सफल नहीं हो सकते. 


निकोलस कोल की छोटी सी मीडियम पोस्ट पर आधारित, जिसमें हमेशा की तरह मैंने बहुत अधिक विस्तार कर दिया.

Photo by Cassidy Kelley on Unsplash

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