बैक्टीरिया और वायरस कितने दिनों तक जीवित रहते हैं?

जीव-जंतुओं को संक्रमित करके उन्हें रोगी बनाने वाले बैक्टीरिया, वायरस और अन्य सूक्ष्मजीवियों को रोगाणु (Germs या pathogens) कहा जाता है. कुछ रोगाणु मनुष्यों के शरीर के बाहर आते ही मर जाते हैं जबकि कुछ कई दिनों, महीनों यहां तक कि सदियों तक भी जीवित रहते हैं. किसी भी रोगाणु के जीवित रहने का संबंध उसके पर्यावरण और प्रकृति से होता है. तापमान, नमी और जिस सतह पर वे रहते हैं उसका भी उनके जीवित रहने की अवस्था से सीधा संबंध होता है. इस पोस्ट में हम आपको बता रहे हैं कि आमतौर पर पाए जाने वाले रोगाणु कितना जीवित रहते हैं और हम उनके संक्रमण से बचाव कैसे कर सकते है.

वायरस कितना जीवित रहते हैः वायरस को प्रजनन करने के लिए अपने होस्ट की आनुवांशिक सामग्री की आवश्यकता होती है. कुछ जीवविज्ञानी वायरसों को जीवित की श्रेणी में नहीं रखते क्योंकि वायरस बिना किसी होस्ट के प्रजनन नहीं कर सकते. वायरस कठोर सतहों पर भी सॉफ्ट सतहों की तुलना में देर तक संक्रमणकारी रह सकते हैं. इस तरह कपड़े की तुलना में वायरस प्लास्टिक, कांच और धातु की वस्तुओं पर भी जीवित रह सकते हैं. सूर्य का प्रकाश कम मिलने, कम नमी, और कम तापमान पर वायरसों के जीवित रहने की क्षमता बढ़ जाती है.

लेकिन यह किसी वायरस की प्रजाति पर निर्भर करता है कि वह अधिकतम कितने समय तक जीवित रह सकता है. मामूली बुखार का वायरस (Flu virus) सतहों पर एक दिन तक जीवित रह सकता है लेकिन हमारे हाथ में यह केवल 5 मिनट के लिए ही जीवित रह सकता है. सर्दी के वायरस लगभग एक सप्ताह तक संक्रमणकारी बने रह सकते हैं, यही कारण है कि सर्दी को ठीक होते-होते प्रायः 1 सप्ताह लग जाता है. पेट खराब करके बुखार लाने वाला वायरस कैलिसीवायरस (Calicivirus) सतहों पर कई दिनों या सप्ताह तक बना रह सकता है. हर्पीज़ (Herpes) का वायरस त्वचा पर दो घंटे तक जीवित रह सकता है. गला खराब करने वाला पैराइन्फ्लुएंजा (Parainfluenza) वायरस कठोर सतहों पर दस घंटे तक और छेददार सतहों पर चार घंटे तक जीवित रह सकता है. एड्स का HIV वायरस शरीर के बाहर आने के कुछ समय के भीतर और सूर्य के प्रकाश के संपर्क में आने पर तत्काल ही मर जाता है. चेचक या शीतला या बड़ी माता (smallpox) फैलाने वाला वेरिओला (Variola) वायरस भी बहुत जल्दी मर जाता है. यदि इस वायरस का एरोसोल मिक्स हवा में उड़ा दिया जाए तो 24 घंटे के भीतर 90 प्रतिशत वायरस मर जाते हैं.

बैक्टीरिया कितना जीवित रहते हैः पेट से संबंधित रोग फैलाने वाले ई. कोलाई (Escherichia coli) जैसे बैक्टीरिया नम छेददार सतहों पर लंबे समय तक जीवित रह सकते हैं. जहां वायरस कठोर सतहों पर भी जीवित रह सकते हैं, बैक्टीरिया छेददार सतहों पर अधिक समय तक जीवित रह सकते हैं. सामान्यतः बैक्टीरिया वायरसों की तुलना में अधिक समय तक संक्रमणकारी बने रहते हैं. वायरसों की ही भांति बैक्टीरिया के जीवित रहने की क्षमता भी अनेक कारकों पर निर्भर करती है. यह इसपर भी निर्भर करता है कि बैक्टीरिया किस प्रकार से अपने बीजाणुओं लंबे समय तक (Spores) का निर्माण करते हैं. बैक्टीरिया के बीजाणु विपरीत परिस्तिथियों में भी लंबे समय तक बचे रह सकते हैं. ऐंथ्रेक्स बैक्टीरिया (Bacillus anthracis) के बीजाणु अनेक दशक या शताब्दियों तक सुरक्षित रह सकते हैं.

ई. कोलाई और साल्मोनेला (Salmonella) के बैक्टीरिया भोजन से होने वाली विषाक्तता (food poisoning) के प्रमुख कारण हैं. ये शरीर के बाहर कुछ दिनों तक जीवित रह सकते हैं. बहुत सारे प्राणघातक संक्रमण करने वाला खतरनाक बैक्टीरिया स्टेफाइलोकोकस औरियस (Staphylococcus aureus या S. aureus) इस प्रकार के बीजाणु बनाता है जो कपड़ों पर कई सप्ताह तक जीवित रह सकते हैं. स्ट्रेप्टोकोकस न्यूमोनिया (Streptococcus pneumoniae) और स्ट्रेप्टोकोकस पायोजीनस (Streptococcus pyogenes) बैक्टीरिया कान और गले के इन्फेक्शन के लिए उत्तरदायी होते हैं और ये बच्चों के पालनों और स्टफ़्ड टॉय पर रात भर तक के लिए जीवित रह सकते हैं और कई बार सतहों को साफ़ कर देने पर भी नहीं मरते.

अन्य प्रकार के रोगाणुः केवल वायरस और बैक्टीरिया ही रोगों को फैलाने वाले सूक्ष्मजीवी नहीं हैं. फफूंद (Fungi), प्रोटोजोओ (protozoa), और शैवाल (algae) भी हमें संक्रमित कर सकते हैं. फफूंद कई प्रकार की होती है और उसके बीजाणु मिट्टी में कई दशकों या शताब्दियों तक जीवित रह सकते हैं. कपड़ों पर फफूंद कई महीनों तक जीवित रह सकती है. कुछ बीजाणु पानी के बिना 24 से 48 घंटों के भीतर मर जाते हैं लेकिन कुछ अधिक टिकाऊ होते हैं. रोगाणुओं के बीजाणु लगभग हर जगह मिलते हैं. अपने आसपास नमी को कम रखना इनसे बचाव के लिए सबसे बढ़िया उपाय है. सूखे मौसम में हालांकि रोगाणुओं की वृद्धि की दर कम होती है लेकिन ये अधिक आसानी से फैल सकते हैं.

कुछ प्रोटोजोआ रोगाणु कोष या सिस्ट (cysts) बनाते हैं. सिस्ट बैक्टीरिया के बीजाणुओं की तरह प्रतिरोध नहीं करती लेकिन यह गीली मिट्टी में कई दिनों तक जीवित रह सकती है. वस्तुओं को तेज गरम पानी में धोने या उबालने से प्रोटोजोआ के इन्फेक्शन का खतरा कम हो जाता है.

रोगाणुओं के बचाव के तरीकेः ठीक तरह से हाथ धोने से अधिकांश रोगाणुओं से बचा जा सकता है. हमारे घरों के किचन में बर्तन धोने के काम आने वाला स्पंज रोगाणुओं के पलने-बढ़ने के लिए उपयुक्त वस्तु है क्योंकि यह गीला रहता है और इसमें खाद्य पदार्थों के कण लगे होते हैं. परिवेश में नमी को नियंत्रित करने, सतहों को सूखा रखने, और रोगाणुओं को किसी भी प्रकार के पोषक पदार्थों से दूर रखने से उनकी बढ़त रोकी जा सकती है. वायरस हमारे घर की सतहों पर लंबे समय तक जीवित रह सकते हैं लेकिन पर्याप्त अवसर नहीं मिलने पर वे स्वयं की प्रतियां नहीं बना पाते. वातावरण में नमी या आर्द्रता 10 प्रतिशत से कम होने पर उनकी बढ़त नियंत्रित हो जाती है.

साबुन से हाथ धोना रोगाणुओं से बचने का सबसे प्रभावी उपाय है. जिन सतहों पर रोगाणुओं के होने की संभावना अधिक होती हो वहां रोगाणु-रोधी रसायनों का छिड़काव करना चाहिए. ब्लीच और एल्कोहल इसी प्रकार के रसायन हैं जो आसानी से उपलब्ध हो सकते हैं. जिन कपड़ों के संक्रमित होने की आशंका हो उन्हें 60° सेंटीग्रेड से अधिक गर्म पानी में धोकर ब्लीच करना चाहिए. वाशिंग मशीन के ड्रायर की गर्मी भी रोगाणुओं को खत्म कर देती है.

यहां यह बात भी ध्यान देने योग्य है कि आपके शरीर के भीतर रोगाणुओं के जीवित व उपस्थित होने का अर्थ यह नहीं है कि वे आपको संक्रमित भी कर रहे होंगे. फ्लू के वायरस शरीर में एक दिन के लिए जीवित रह सकते हैं लेकिन उनका असली खतरा शरीर में उनके प्रवेश के पांच मिनटों तक ही होता है. इसी अवधि में वे संक्रमण फैला सकते हैं, इससे अधिक समय बीतने पर उनकी संक्रामकता कम हो जाती है. कोई भी रोगाणु आपके स्वास्थ्य को किस सीमा तक प्रभावित कर सकता है इसका संबंध उनके शरीर में प्रवेश के मार्ग और आपके प्रतिरक्षा तंत्र से भी होता है. यदि आपकी इम्यूनिटी अच्छी है तो वे आपको कुछ नहीं बिगाड़ सकते. (featured image, MERS Coronavirus Particles)

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